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टीचर्स डे पर रेडियो सबरंग मिलवा रहा है एक ऐसी टीचर से जिसका समाज ने मज़ाक उड़ाया मगर उन्होंने बच्चों को जीने की नई राह दिखाई. रीटा रानी की लंबाई तीन फ़ुट से कम ही है मगर उन्होंने बच्चों को ऊँची उड़ान दी है. सुनिए स्वाति चौहान से उनकी बातचीत-
नदी... जिसे हम माँ कहते हैं। नदी... जो जीवन देती है, खेतों को सींचती है, बच्चों को खिलखिलाने का कारण देती है। नदी शब्द बोलते ही एक स्वच्छ, शांत और कल-कल करती हुई बहती हुई तस्वीर मन में आ जाती है। मगर जब रेडियो सबरंग की टीम हिंडन नदी के छठ घाट पहुँची तो वहाँ था सिर्फ़ चीखता हुआ सन्नाटा और उस नदी की पीड़ा। चारों तरफ फैला कचरा — प्लास्टिक की थैलियाँ, टूटी हुई मूर्तियाँ, गंदे कपड़े, सड़ी हुई फूल मालाएं और अपनी कोशिशों से इन सब को हिंडन नदी से बाहर निकालते हुए इस नदी की पीड़ा को कम करते हुए पर्यावरण प्रहरी मयंक चौधरी। स्वाति चौहान ने मयंक से पूछा उनके 60 दिनों के चैलेंज के बारे में-
क्या आप जानते हैं कि विरुद्ध आहार क्या होता है? ये हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदग़ी से जुड़ा विषय है मगर हम उसके बारे में ज्यादा भरोसेमंद बातें नहीं जानते। विरुद्ध आहार का मतलब है दो ऐसे आहार जिनकी प्रकृति एक दूसरे के विरुद्ध होती है और साथ लेने पर नुक़सान भी कर सकता है। रेडियो सबरंग की संगीता रावत ने बात की आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर मनीषा शर्मा-
विश्व पर्यावरण दिवस पर कई तरह के कार्यक्रम आयोजित होते हैं और उनमें एक प्रमुख कार्यक्रम होता है पौधारोपण का। मगर एक सवाल जो भारत के संदर्भ में बार-बार उठता है - क्या 45 डिग्री तक की गर्मी में पेड़ लगाना सही है? क्या इस दिन सिर्फ प्रतीकात्मक कार्यक्रम करने चाहिए या कोई व्यावहारिक कदम भी? इसी पर लोगों से बात की रेडियो सबरंग की अनुराधा श्रीवास्तव ने कुछ आम लोगों से-
क्या आप जानते हैं कि हॉर्मोनल इंबैलेंस यानी हॉर्मोन्स का असंतुलन क्या होता है? दरअसल ये महिलाओं को काफ़ी प्रभावित करता है और साथ ही अलग-अलग उम्र में लोगों को प्रभावित करता है। रेडियो सबरंग की सुमन ठाकुर ने और जानकारी ली आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर मनीषा शर्मा से-
ख़ास मुलाक़ात एक ऐसे व्यक्ति के साथ जो न सिर्फ़ लोगों की मुस्कान सँवारती हैं बल्कि धरती माँ की मुस्कान भी बचाने में लगी हैं। मिलिए एक साइलेंट ग्रीन वॉरियर से जो एक डेंटिस्ट भी है और वो वेस्ट मैनेजमेंट पर गहराई से काम कर रही है। वो अपना काम शांति से मगर पूरी प्रतिबद्धता से निभा रही हैं। समाज के लिए ये वो अनसुने हीरो हैं जिनसे मिलना, जिन्हें जानना एक प्रिविलेज होता है। रेडियो सबरंग की स्वाति चौहान की मुलाक़ात डॉक्टर विद्या शेखर से-
गर्मी के मौसम में क्या खा सकते हैं और साथ ही सुबह से शाम तक दिनचर्या कैसी रहनी चाहिए, ये एक अहम सवाल होता है। इस मौसम में थकान, चिड़चिड़ेपन और अपच से भी जूझते हैं। ऐसे में आयुर्वेद के ज़रिए समझने की कोशिश करते हैं कि कैसे ख़ुद का ध्यान रखा जाए। आयुर्वेदाचार्य मनीषा शर्मा से बात की रेडियो सबरंग की संगीता रावत ने।
दही भारतीय खानपान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसे लेकर कई तरह की धारणाएँ हैं। कुछ लोग कहते हैं कि रात में दही नहीं खाना चाहिए, तो कुछ मानते हैं कि दही से सर्दी-जुकाम हो जाता है। कोई इसे सेहत के लिए वरदान मानता है, तो कोई सावधानी बरतने की सलाह देता है। आखिर सच क्या है? ऐसे ही सवालों के साथ रेडियो सबरंग की अनुराधा श्रीवास्तव ने बात की आयुर्वेद डॉक्टर मनीषा शर्मा से-
क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद के मुताबिक़ हमारे शरीर की प्रकृति तीन तरह की होती है- वात, पित्त और कफ़। ये हमारी सेहत, आदतों और बीमारियों को भी प्रभावित करती है। रेडियो सबरंग की हेमा अधिकारी ने बात की डॉक्टर मनीषा शर्मा से और पूछा कि इस प्रकृति का हमारी सेहत पर क्या असर पड़ता है, इसे कैसे पहचाना जाए और इसका संतुलन कैसे बनाया जाए?
दुनिया 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के तौर पर मनाती है। इस मौक़े पर रेडियो सबरंग बात उठा रहा है एक बेहद संवेदनशील और अहम विषय पर। वो विषय है किशोरों के मेंटल हेल्थ का। इस उम्र में किशोरों के शरीर, मन और भावनाओं में बदलाव आ रहा होता है। ये उम्र सवालों और संघर्षों की भी है। ऐसे में अगर उनके मुद्दों की अनदेखी हो जाए तो वो बात उनके मन में घर कर जाती है और वो मानसिक स्वास्थ्य से जूझने लगते हैं। इन्हीं विषयों पर बात की रेडियो सबरंग की स्वाति चौहान ने डॉक्टर मनोज पाल से, जो कि पिछले 20 वर्षों से मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम किया है।
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