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दुनिया 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के तौर पर मनाती है। इस मौक़े पर रेडियो सबरंग बात उठा रहा है एक बेहद संवेदनशील और अहम विषय पर। वो विषय है किशोरों के मेंटल हेल्थ का। इस उम्र में किशोरों के शरीर, मन और भावनाओं में बदलाव आ रहा होता है। ये उम्र सवालों और संघर्षों की भी है। ऐसे में अगर उनके मुद्दों की अनदेखी हो जाए तो वो बात उनके मन में घर कर जाती है और वो मानसिक स्वास्थ्य से जूझने लगते हैं। इन्हीं विषयों पर बात की रेडियो सबरंग की स्वाति चौहान ने डॉक्टर मनोज पाल से, जो कि पिछले 20 वर्षों से मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम किया है।
By Radio Sabrangदुनिया 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के तौर पर मनाती है। इस मौक़े पर रेडियो सबरंग बात उठा रहा है एक बेहद संवेदनशील और अहम विषय पर। वो विषय है किशोरों के मेंटल हेल्थ का। इस उम्र में किशोरों के शरीर, मन और भावनाओं में बदलाव आ रहा होता है। ये उम्र सवालों और संघर्षों की भी है। ऐसे में अगर उनके मुद्दों की अनदेखी हो जाए तो वो बात उनके मन में घर कर जाती है और वो मानसिक स्वास्थ्य से जूझने लगते हैं। इन्हीं विषयों पर बात की रेडियो सबरंग की स्वाति चौहान ने डॉक्टर मनोज पाल से, जो कि पिछले 20 वर्षों से मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम किया है।