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इंटरनेट और टेक्नॉलॉजी के इस दौर में अगर इनका इस्तेमाल किसानों के हित में सही ढंग से किया जाए तो देश का अन्नदाता बहुत सी मुश्किलों से निकल सकता है। इसी सोच के साथ जर्मनी से नौकरी छोड़कर आए अमित वर्मा ने काम किया है। अपने इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग के ज्ञान का इस्तेमाल उन्होंने किसानों और उनके परिवारों की मदद के लिए किया है। उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार से डायवर्सिफ़िकेशन के लिए सम्मान भी मिल चुका है। रेडियो सबरंग की रमणी श्याम ने बात की अमित वर्मा से-
आपने भी सुना होगा लोगों को कहते हुए कि आजकल डिप्रेशन में हूँ। विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है कि दुनिया में 30 करोड़ से ज़्यादा लोग डिप्रेशन का शिकार हैं और भारत में ये संख्या पाँच करोड़ से ज़्यादा है। मगर ये डिप्रेशन है क्या और इससे बाहर आने के रास्ते क्या हैं। यही जानने के लिए रेडियो सबरंग की दीपिका वाल्दिया ने बात की साइकॉलॉजिस्ट डॉक्टर वंदना प्रकाश से-
तू ज़िंदा है ज़िंदगी की जीत पे यक़ीन कर, अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर
और ऐसी ही हंसमुख हैं बिंदु जिनके जज़्बे ने कैंसर जैसी डरावनी बीमारी के बीच भी अपने हौसलों को अलग ही उड़ान दी है।
ग़ाज़ियाबाद के शिप्रा सनसिटी में रहने वाली बिंदु सिंह को इस समय कैंसर है और जल्द ही उनका एक गंभीर ऑपरेशन होने वाला है।
ऐसे माहौल में भी जब रेडियो सबरंग की टीम उनसे मिली तो हम सब उनकी हंसी और हौसले के क़ायल हो गये।
आपको याद है वो टाइम जब हमें आस-पास फुदकती हुई गौरैया दिखती थी, दाना चुगती हुई, एक डाल से दूसरी डाल पर जाती हुई, नन्ही गौरैया। अब हमें वो गौरैया कम ही दिखाई देती है, धीरे-धीरे वो हमारे बीच से ग़ायब सी हो रही हैं। इसी को ध्यान में रखकर चिड़ियों को एक आशियाना देने की कोशिश कर रही हैं दो प्यारी बच्चियाँ- लवलीन और लावण्या। घर में बेकार हो रहे डिब्बों से इन चिड़ियों के लिए घरौंदे तैयार करती हैं ये दोनों। रेडियो सबरंग की स्वाति चौहान मिलीं लवलीन से और उनकी इस कोशिश के बारे में जाना।
सफलता के पैमाने लोगों की ज़िंदग़ी में अलग-अलग होते हैं। किसी के लिए पैसे कमाना तो किसी के लिए अपने बच्चों को किसी मुक़ाम तक पहुँचाना सफलता हो सकता है। ऐसे ही किसी की प्राथमिकता अच्छी सेहत हो सकती है और वही उनके लिए सफलता का पैमाना होगा। आज की हमारी मेहमान हैं असम की समीक्षा गाँधी, जो कि एक फ़िटनेस एक्सपर्ट भी हैं और 2023 के बड़े बॉडी बिल्डिंग इवेंट में हिस्सा लेंगी। रेडियो सबरंग की निमिषा माथुर ने उनसे बात की-
दुर्गा पूजा की धूम पिछले दिनों हर ओर रही और विजयदशमी होने के बावजूद उसका असर हम सभी पर अब भी है। कहीं भी पंडाल के ज़रिए बड़े पैमाने पर दुर्गा पूजा का आयोजन करना आसान नहीं होता। अब सोचिए अगर सिर्फ़ महिलाएँ मिलकर ये पूरी ज़िम्मेदारी उठाने का फ़ैसला करें तो? कुछ ऐसी ही हुआ है ग़ाज़ियाबाद में। यहाँ शालीमार गार्डन में कुछ महिलाओं ने मिलकर अनन्या नारी दुर्गोत्सव का आयोजन किया। विजयदशमी के अवसर पर वहाँ पहुँचीं रेडियो सबरंग की रमणी श्याम-
नवरात्रि के साथ ही शुरू हो जाती है त्यौहारों की धूम भी। हर बार दुर्गा पूजा के मौके पर सजने वाले पंडालों में अलग-अलग थीम देखने को मिलती है। शिप्रा सनसिटी के सेंट्रल पार्क में पिछले 20 सालों से भी ज़्यादा समय से दुर्गा पूजा बड़े पैमाने पर होती है और दिल्ली-एनसीआर में ये पूजा काफ़ी प्रसिद्ध है। इस बार पंडाल में दो ख़ास फ़ीचर्स देखने को मिलने वाले हैं। नव दुर्गा के रूप इस बार पंडाल में दिखेंगे और साथ ही पंडाल छाऊ नृत्य की थीम पर तैयार किया गया है। पंडाल की तैयारियों का जायज़ा लेने पहुँचीं रेडियो सबरंग की दीपिका वाल्दिया-
छोटी बड़ी पार्टियाँ हों या कोई और खाने-पीने का आयोजन। अक़्सर हमने प्लास्टिक या थर्मोकोल से बने बर्तनों का ही इस्तेमाल होते देखा है। इसके बाद ये कूड़े में फेंके जाते हैं और पर्यावरण को भी नुक़सान पहुँचाते हैं। आप सोच सकते हैं कि इसका उपाय फिर क्या हो सकता है। तो इसका एक दिलचस्प उपाय लेकर आए हैं दिल्ली के पुनीत दत्त। उपाय ये है कि आप खाना भी खाएँ और फिर बाद में बर्तन भी खा जाएँ। हैरत में मत पड़िए, अगर बर्तन गुड़ और गेहूँ से बने हों तो खाए जा सकते हैं। पुनीत दत्त जी ने आटावेयर नाम से कैसे ये बर्तन तैयार किए हैं, ये जानने के लिए उनसे बात की रेडियो सबरंग की अर्चना ठाकुर ने-
एचआईवी के मरीज़ों को लेकर समाज में अब भी कई जगह लोग ग़लतफ़हमियों का शिकार हैं। सोचिए ऐसे में उस डॉक्टर के बारे में जो न उनकी सेवा करे, उनका इलाज करे बल्कि ज़रूरत होने पर उन्हें गोद भी ले लेती हैं। ऐसी ही डॉक्टर हैं रूबी बंसल। उन्होंने अपने काम से समाज के लिए एक मिसाल बनाई है। आख़िर इस तरह की सोच कहाँ से आई और कैसे उन्होंने इस बारे में सोचा, इसी पर डॉक्टर रूबी बंसल से बात की रेडियो सबरंग की निमिषा माथुर ने-
मुश्किलें सामने हों तो नए रास्ते खोलने वाले युवा और विफलता से भी परेशान न होकर सबक सीखने वाले एक और युवा। ये दो हैं रेडियो सबरंग के आज के मेहमान। भारत का आज का युवा हर क्षेत्र में अपनी समझदारी से लोगों का दिल जीत रहे हैं। सबसे पहले संगीता रावत आपको मिलवाएँगी पटना के अंशुल आर्यन से जिन्होंने कोविड के मुश्किल दौर में एडवोकेट का काम छोड़कर फ़ूड वैन शुरू की और आज लोग उनके खान के दीवाने हो रहे हैं। उसके बाद मिलिए यश जैन से, जिन्होंने सीए की मुश्किल परीक्षा पास की और अनुराधा श्रीवास्तव से बातचीत में उन्होंने बताया इस सफलता के गुर भी। सुनिए ये एपिसोड रमणी श्याम के साथ-
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