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एक ऐसी पेंटर जो दुनिया में बना रही है अपनी पहचान मगर वो है अभी क्लास 8 की स्टूडेंट।
दीपशिखा डे नाम की इस स्टूडेंट की ख़ासियत है उसकी पेंटिंग और उस पेंटिंग को नासा की ओर से आयोजित पेंटिंग कॉम्पिटीशन में मिला पहला प्राइज़।
दीपशिखा- नोएडा के सेक्टर 30 में स्थित डीपीएस स्कूल की स्टूडेंट हैं।
रेडियो सबरंग की स्वाति चौहान ने दीपशिखा से बात की और उस अवॉर्ड विनिंग पेंटिंग के बारे में पूछा।
योग का मतलब लोग अक़सर आसन या प्राणायाम को ही मान लेते हैं। मगर ऐसा नहीं है।
योग के कई अंग होते हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौक़े पर आइए आपको बताते हैं इसी के बारे में।
रेडियो सबरंग की दीपिका वाल्दिया ने बात की है योग गुरु सनी मलिक से, जिन्होंने इस बारे में कई दिलचस्प बातें बताई हैं।
आप भी ज़रूर सुनिए और शेयर करिए।
वो परछाई जिसकी छाँव में ज़िंदग़ी की कड़ी से कड़ी धूप तीखी न लगे, जिसकी गोदी में घर से बाहर दुनिया की पहली झलक मिली हो और जिसकी उंगली पकड़कर लंबे से लंबा या मुश्किल रास्ता आसानी से तय हो सके। ऐसे सभी फ़ादर्स का डेडिकेटेड है हमारा ये फ़ादर्स डे स्पेशल एपिसोड। तो आज के इस एपिसोड में सुनिए तीन ख़ास कहानियाँ। एक ऐसे फ़ादर जो स्पेशल चाइल्ड की देखभाल कर रहे हैं, मिलेंगे एक ऐसे परिवार से जिसमें तीन पीढ़ियाँ हैं यानी पिता और बच्चों की दो जोड़ियाँ और अंत में एक ऐसे फ़ादर से जो कपड़े प्रेस करके और गाड़ी धोकर अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने की कोशिश कर रहे हैं।
अभी कुछ ही दिनों पहले आपने ख़बर पढ़ी होगी कि एक बच्चे ने अपने माँ को इसलिए मार दिया क्योंकि उन्होंने उसे पबजी गेम खेलने से रोका। इस तरह की ख़बरें हम सबको डिस्टर्ब करती हैं मगर ख़ुद आजकल के पेरेंट्स इस तरह के अग्रेशन पर क्या सोचते हैं और इसके पीछे क्या साइकॉलॉजिकल रीज़न्स हो सकते हैं।
आज के एपिसोड में स्वाति चौहान के साथ सुनिए इसी पर पेरेंट्स की राय और क्या कहती हैं क्लिनिकल साइकॉलॉजिस्ट वंदना प्रकाश।
रेडियो सबरंग के आधार सम्मान स्पेशल में दो ख़ास लोगों से मुलाक़ात। सबसे पहले एक ऐसी ब्यूटी क्वीन से जो सिर्फ़ तन से ही नहीं बल्कि मन से भी ब्यूटीफ़ुल हैं।
मिसेज़ इंडिया 2019 की टाइमलेस ब्यूटी चारू गोयल से निमिषा माथुर की बातचीत और दूसरी ऐसी मेहमान वो हैं, जो किडनी से जुड़ी बीमारी से जूझने के बाद अब ऐसे ही लोगों की मदद भी कर रही हैं।
उनका नाम है सीमा कौल और उनसे हमें मिलवा रही हैं रेडियो सबरंग की सुमित्रा रौथाण।
पर्यावरण का संरक्षण हर एक व्यक्ति की ज़िम्मेदारी है और इसमें बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को शामिल होना चाहिए।
इस एपिसोड में मिलिए दीपाली सिन्हा से जिन्होंने बच्चों को पर्यावरण बचाने के नए-नए तरीक़े सिखाए हैं।
साथ ही जानिए कि कैसे दीपाली ने अपने घर में हुई शादी को भी ईको-फ़्रेंडली ढंग से किया।
सुनिए दीपाली से रमणी श्याम की ये बेहद दिलचस्प बातचीत।
अपने आस-पास के पेड़-पौधों की देखभाल सिर्फ़ हमारे लिए ही नहीं हमारी अगली पीढ़ियों के लिए भी बेहद अहम है। और उसके साथ ही ज़रूरी है जगह-जगह पर पौधारोपण भी।
इसके अलावा पर्यावरण के संरक्षण के कई कामों में लगे हैं शिप्रा सनसिटी के योगेश रावत।
रेडियो सबरंग ने विश्व पर्यावरण दिवस के ख़ास मौक़े पर उनसे मुलाक़ात की।
सुनिए निमिषा माथुर की योगेश रावत से ये बातचीत।
घरों में भगवान को पूरी आस्था से रखने के बाद अगर मूर्ति टूट जाए या पुरानी हो जाए तो अक़सर आपने भी उन्हें पेड़ों की जड़ों या मंदिरों के इर्द-गिर्द रखे देखा होगा। ऐसी मूर्तियों को दोबारा जीवन देने वाली शिखा गुप्ता को इस बार का रेडियो सबरंग का आधार सम्मान दिया गया। और आज की दूसरी मेहमान है एक ऐसी युवा जिन्होंने नौकरी की रट न लगाकर ख़ुद अपना काम शुरू किया। उन्हें भी आधार सम्मान मिला है। तो आइए रेडियो सबरंग की अनुराधा श्रीवास्तव और हेमा अधिकारी से सुनते हैं इन दोनों मेहमानों की ख़ास बातचीत-
क़ानून, कोर्ट-कचहरी ये सब बहुत सारे लोगों के लिए डराने वाले हो सकते हैं क्योंकि उन्हें सही क़ानूनी सहायता ही नहीं मिल पाती।
सही सहायता पाने के लिए बहुत से लोगों के पास उतने संसाधन नहीं होते ऐसे में उन्हें न्याय न मिल पाना भी ग़लत होगा।
इसे देखते हुए ही नीति सिन्हा जी ने समाधान नाम से लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का रास्ता खोला है।
उन्हें इस बार के रेडियो सबरंग के आधार सम्मान से सम्मानित किया गया है।
सुनिए दीपिका वाल्दिया की नीति सिन्हा जी से ख़ास बातचीत और बताइए आपको कैसी लगी ये बातचीत [email protected] पर।
पर्यावरण के बारे में जो भी थोड़ा बहुत सजग है वो ये समझता है कि प्लास्टिक इसे कितना नुक़सान पहुँचा रहा है। ऐसे में ज़रूरी है कि प्लास्टिक को सही ढंग से इकट्ठा करके उसे रीसाइकल या नष्ट करने की कोशिश की जाए। ऐसी ही कोशिश करने वाली तनु अग्रवाल थीं रेडियो सबरंग की ओर से आधार सम्मान पाने वालों में। और दूसरी मेहमान हैं ऐसी टीचर जिन्होंने लंबे समय तक अपना समय बच्चों को पढ़ाने उन्हें सँवारने में लगा दिया। ऐसे ही टीचर्स को उनके स्टूडेंट्स लंबे समय तक याद रखते हैं। तो आइए मिलते हैं तनु अग्रवाल और वीना त्यागी जी से।
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