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छोटी बड़ी पार्टियाँ हों या कोई और खाने-पीने का आयोजन। अक़्सर हमने प्लास्टिक या थर्मोकोल से बने बर्तनों का ही इस्तेमाल होते देखा है। इसके बाद ये कूड़े में फेंके जाते हैं और पर्यावरण को भी नुक़सान पहुँचाते हैं। आप सोच सकते हैं कि इसका उपाय फिर क्या हो सकता है। तो इसका एक दिलचस्प उपाय लेकर आए हैं दिल्ली के पुनीत दत्त। उपाय ये है कि आप खाना भी खाएँ और फिर बाद में बर्तन भी खा जाएँ। हैरत में मत पड़िए, अगर बर्तन गुड़ और गेहूँ से बने हों तो खाए जा सकते हैं। पुनीत दत्त जी ने आटावेयर नाम से कैसे ये बर्तन तैयार किए हैं, ये जानने के लिए उनसे बात की रेडियो सबरंग की अर्चना ठाकुर ने-
By Radio Sabrangछोटी बड़ी पार्टियाँ हों या कोई और खाने-पीने का आयोजन। अक़्सर हमने प्लास्टिक या थर्मोकोल से बने बर्तनों का ही इस्तेमाल होते देखा है। इसके बाद ये कूड़े में फेंके जाते हैं और पर्यावरण को भी नुक़सान पहुँचाते हैं। आप सोच सकते हैं कि इसका उपाय फिर क्या हो सकता है। तो इसका एक दिलचस्प उपाय लेकर आए हैं दिल्ली के पुनीत दत्त। उपाय ये है कि आप खाना भी खाएँ और फिर बाद में बर्तन भी खा जाएँ। हैरत में मत पड़िए, अगर बर्तन गुड़ और गेहूँ से बने हों तो खाए जा सकते हैं। पुनीत दत्त जी ने आटावेयर नाम से कैसे ये बर्तन तैयार किए हैं, ये जानने के लिए उनसे बात की रेडियो सबरंग की अर्चना ठाकुर ने-