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Lavleen: A young environmentalist saving our sparrows


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आपको याद है वो टाइम जब हमें आस-पास फुदकती हुई गौरैया दिखती थी, दाना चुगती हुई, एक डाल से दूसरी डाल पर जाती हुई, नन्ही गौरैया। अब हमें वो गौरैया कम ही दिखाई देती है, धीरे-धीरे वो हमारे बीच से ग़ायब सी हो रही हैं। इसी को ध्यान में रखकर चिड़ियों को एक आशियाना देने की कोशिश कर रही हैं दो प्यारी बच्चियाँ- लवलीन और लावण्या। घर में बेकार हो रहे डिब्बों से इन चिड़ियों के लिए घरौंदे तैयार करती हैं ये दोनों। रेडियो सबरंग की स्वाति चौहान मिलीं लवलीन से और उनकी इस कोशिश के बारे में जाना।

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