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आगंतुक। अज्ञेय
आँखों ने देखा पर वाणी ने बखाना नहीं।
भावना ने छुआ पर मन ने पहचाना नहीं।
राह मैंने बहुत दिन देखी, तुम उस पर से आए भी, गए भी,
- कदाचित्, कई बार -
पर हुआ घर आना नहीं।
By Nayi Dhara Radioआगंतुक। अज्ञेय
आँखों ने देखा पर वाणी ने बखाना नहीं।
भावना ने छुआ पर मन ने पहचाना नहीं।
राह मैंने बहुत दिन देखी, तुम उस पर से आए भी, गए भी,
- कदाचित्, कई बार -
पर हुआ घर आना नहीं।