Pratidin Ek Kavita

Algani | Shahanshah Alam


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अलगनी | शहंशाह आलम 


अलगनी पर मैंने क्या चीज़ सुखाई

कविता की वो गीली किताबें

जिसे बारिश ने पढ़ा था पूरे मन से


जो बारिश मेघालय में होती होगी

वही बारिश हुई इस दफ़ा मेरे पटना में


अलगनी पर मैंने और क्या चीज़ सुखाई

कविता की किताबों के अलावा

अपने कपड़े… नहीं न

अपने जूते… नहीं न

अपने मोजे… नहीं न


अपना पूरा घर सुखाया

धूप के निकलने पर

और अपनी देह को भी

टाँगकर रखा अलगनी पर


अब जब बारिश के बाद ठंड आएगी

दस्तक देगी अलगनी ही मेरे दरवाज़े पर।


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Pratidin Ek KavitaBy Nayi Dhara Radio