
Sign up to save your podcasts
Or


अपना अभिनय इतना अच्छा करता हूँ । नवीन सागर
घर से बाहर निकला
फिर अपने बाहर निकल कर
अपने पीछे-पीछे चलने लगा
पीछे मैं इतने फ़ासले पर छूटता रहा
कि ओझल होने से पहले दिख जाता था
एक दिन
घर लौटने के रास्ते में ओझल हो गया
ओझल के पीछे कहाँ जाता
घर लौट आया
दीवारें धुँधली पड़ कर झुक-सी गईं
सीढ़ियाँ नीचे से ऊपर
ऊपर से नीचे होने लगीं
पर वह घर नहीं लौटा
घर से बाहर निकला
फिर मुझसे बाहर निकल कर चला गया
मैं आईने में देखता हूँ
वह आईने में से मुझे नहीं देखता
मैं बार-बार लौटता हूँ
पर वह नहीं लौटता
घर में किसी को शक नहीं है
मूक चीज़ें जानती हैं पर मुझसे पूछती नहीं हैं
कि वह
कहाँ गया और तुम कौन हो!
अपना अभिनय इतना अच्छा करता हूँ
कि हूबहू लगता हूँ
दरवाज़े खुल जाते हैं -
नींद के नीम अँधेरे चलचित्र में जागा हुआ
सूने बिस्तर पर सोता हूँ।
By Nayi Dhara Radioअपना अभिनय इतना अच्छा करता हूँ । नवीन सागर
घर से बाहर निकला
फिर अपने बाहर निकल कर
अपने पीछे-पीछे चलने लगा
पीछे मैं इतने फ़ासले पर छूटता रहा
कि ओझल होने से पहले दिख जाता था
एक दिन
घर लौटने के रास्ते में ओझल हो गया
ओझल के पीछे कहाँ जाता
घर लौट आया
दीवारें धुँधली पड़ कर झुक-सी गईं
सीढ़ियाँ नीचे से ऊपर
ऊपर से नीचे होने लगीं
पर वह घर नहीं लौटा
घर से बाहर निकला
फिर मुझसे बाहर निकल कर चला गया
मैं आईने में देखता हूँ
वह आईने में से मुझे नहीं देखता
मैं बार-बार लौटता हूँ
पर वह नहीं लौटता
घर में किसी को शक नहीं है
मूक चीज़ें जानती हैं पर मुझसे पूछती नहीं हैं
कि वह
कहाँ गया और तुम कौन हो!
अपना अभिनय इतना अच्छा करता हूँ
कि हूबहू लगता हूँ
दरवाज़े खुल जाते हैं -
नींद के नीम अँधेरे चलचित्र में जागा हुआ
सूने बिस्तर पर सोता हूँ।