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बढ़ते रहना
( अपनी छात्राओं के लिए )
तुम जब पहली बार सामने पड़ी
प्यारी बच्ची थी
चाहे शांत चाहे शरारती
चाहे चुप चाहे बातूनी
चाहे लापरवाह चाहे उत्साही
चाहे सीधी चाहे निर्भीक
चाहे जीती चाहे हारी
चाहे पास चाहे फ़ेल
दौड़कर आयी चाहे उदास लौटी
प्रशंसा पायी चाहे डाँट खायी
तुम हँसी रोयी खेली नाची
झगड़ी मिलकर रही
सम्मान किया शिकायत की
तुमने सुना नहीं सुना
माना नहीं माना
किया नहीं किया
चिढ़ी परेशान किया गर्व दिया
बीमार पड़ी मेरा भी काम किया
तुम बड़ी हुई
मैं तुम्हारी शादी में आया
तुम्हें पढ़ा सुना देखा
तुम्हारी नौकरी लगी
तुमने ज़मीन ली
घरवालों का इलाज कराया
भाई बहनों को सँवारा
तुमने मेहनत की जूझी
तुम्हारा नाम हुआ
तुमने समाचार दिया
गुरु पूर्णिमा शिक्षक दिवस की बधाई दी
तुम कहीं मिली मैंने पहचान लिया
तुमने पूछा- सर पहचाना? मैं बहुत पछताया
तुम्हारे दोस्त माँ बाप रिश्तेदार सहकर्मी मिले
तुम्हारी बातें हुईं
तुम भूल गयीं
तुम्हारी याद आ गयी
तुम्हारी कितनी स्मृतियाँ हैं
तुम बच्ची थी तब से लेकर
तुम बड़ी हुई
जैसे मेरे भीतर बड़ी हुई
बढ़ते रहना
हमेशा खुश रहना
• शशिभूषण
10.01.2026
By Shashi Bhooshanबढ़ते रहना
( अपनी छात्राओं के लिए )
तुम जब पहली बार सामने पड़ी
प्यारी बच्ची थी
चाहे शांत चाहे शरारती
चाहे चुप चाहे बातूनी
चाहे लापरवाह चाहे उत्साही
चाहे सीधी चाहे निर्भीक
चाहे जीती चाहे हारी
चाहे पास चाहे फ़ेल
दौड़कर आयी चाहे उदास लौटी
प्रशंसा पायी चाहे डाँट खायी
तुम हँसी रोयी खेली नाची
झगड़ी मिलकर रही
सम्मान किया शिकायत की
तुमने सुना नहीं सुना
माना नहीं माना
किया नहीं किया
चिढ़ी परेशान किया गर्व दिया
बीमार पड़ी मेरा भी काम किया
तुम बड़ी हुई
मैं तुम्हारी शादी में आया
तुम्हें पढ़ा सुना देखा
तुम्हारी नौकरी लगी
तुमने ज़मीन ली
घरवालों का इलाज कराया
भाई बहनों को सँवारा
तुमने मेहनत की जूझी
तुम्हारा नाम हुआ
तुमने समाचार दिया
गुरु पूर्णिमा शिक्षक दिवस की बधाई दी
तुम कहीं मिली मैंने पहचान लिया
तुमने पूछा- सर पहचाना? मैं बहुत पछताया
तुम्हारे दोस्त माँ बाप रिश्तेदार सहकर्मी मिले
तुम्हारी बातें हुईं
तुम भूल गयीं
तुम्हारी याद आ गयी
तुम्हारी कितनी स्मृतियाँ हैं
तुम बच्ची थी तब से लेकर
तुम बड़ी हुई
जैसे मेरे भीतर बड़ी हुई
बढ़ते रहना
हमेशा खुश रहना
• शशिभूषण
10.01.2026