सावित्री बाई के काव्यांश
भारत की पहली महिला शिक्षक सावित्री बाई का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा में माली समाज में हुआ। उनका विवाह ज्योतिबा फुले से हुआ। महात्मा फुले ने उनकी शिक्षा का दायित्व संभाला।
सामाजिक विरोध का सामना करते सावित्री बाई ने सन 1848 में पुणे में लड़कियों के लिये पहला स्कूल स्थापित किया। सावित्री-ज्योतिबा दंपति ने कुल 18 स्कूल शुरू किये और चलाए। दलित समुदाय के उत्थान के लिये नेटिव मेल स्कूल, पुणे और सोसाइटी फॉर प्रमोटिंग द एजुकेशन ऑफ महार, मंग्स (Mangs) जैसे शैक्षिक ट्रस्टों की शुरुआत की।
सन 1863 में, ज्योतिराव और सावित्री बाई ने बालहत्या प्रतिबंधक गृह की स्थापना की, जो कन्या भ्रूण हत्या रोकने और गर्भवती ब्राह्मण विधवाओं और बलात्कार पीड़ितों की सहायता के लिये भारत का पहला गृह था। अस्पृश्यता समाप्त करने के लिए सन 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना सावित्री बाई और ज्योतिराव फुले का एक महान समाज सुधार प्रदेय है।
सावित्री बाई ने काव्य फुले (1854) और बावन काशी सुबोध रत्नाकर (1892) नामक दो प्रसिद्ध कृतियाँ लिखीं। 'गो, गेट एजुकेशन' सावित्री बाई की प्रसिद्ध कविता है। सावित्री बाई की जयंती के अवसर पर प्रस्तुत हैं मज़दूर बिगुल, समालोचन, स्त्रीकाल, फॉर्वर्ड प्रेस, द वायर, अनिता भारती, गूगल के सौजन्य से उनके कुछ काव्यांश:-
सावित्री बाई के काव्यांश
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ज्ञान नहीं, विद्या नहीं
पढ़-लिखकर शिक्षित होने की मंशा नहीं
बुद्धि होकर भी उसे व्यर्थ गँवाए
उसे कैसे कहें इंसान?
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ज्ञान के बिना सब खो जाता है
ज्ञान के बिना हम जानवर बन जाते हैं
इसलिए ख़ाली न बैठो और जा कर शिक्षा लो
तुम्हारे पास सीखने का सुनहरा मौक़ा है
इसलिए सीखो और जाति के बन्धन तोड़ो।
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हमारे जानी दुश्मन का
नाम है अज्ञान
उसे धर दबोचो
मज़बूत पकड़ कर पीटो
और उसे जीवन से भगा दो।
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संसार में स्वाभिमान से जीने के लिए
शिक्षा प्राप्त करो
मनुष्यों का सच्चा गहना है शिक्षा
विद्यालय जाओ
पहला काम है पढ़ाई, दूसरा काम खेल-कूद
पढ़ाई से फुर्सत मिले तभी करो घर की साफ़-सफाई
चलो, अब पाठशाला जाओ।
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जो वाणी से उच्चार करे
वैसा ही बर्ताव करे
वे ही नर नारी पूजनीय
सेवा परमार्थ
पालन करे व्रत यथार्थ
और होवे कृतार्थ
वे सब वंदनीय।
सुख हो दुख
कुछ स्वार्थ नही
जो जतन से करे अन्यो का हित
वे ही ऊँचे,
मानवता का रिश्ता जो जानते हैं वे सब
सावित्री कहे सच्चे संत।
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मेरी जन्मभूमि
मुझे वंदनीय और दिल से प्यारी
मैं उसका गौरव गीत गाती हूँ।
चयन : शशिभूषण