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स्वामी विवेकानंद की कविता, 'जाग्रत देवता'।
कविता 'जाग्रत देवता' वेदांत दर्शन, "यत्र जीव तत्र शिवरूप" की प्रतिध्वनि ही है। वाचन : शशिभूषण
By Shashi Bhooshanस्वामी विवेकानंद की कविता, 'जाग्रत देवता'।
कविता 'जाग्रत देवता' वेदांत दर्शन, "यत्र जीव तत्र शिवरूप" की प्रतिध्वनि ही है। वाचन : शशिभूषण