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बारिश । गिरधर राठी
बारिश
जहाँ जोड़ती है
ठीक वहीं तोड़ती है
गुनगुनाती है
अपने-आप
लहराती
हहराती है
अपने-आप
चुप हो जाती है
बरसती रहती है अपने-आप
तुम्हें कुछ नहीं करने देती
...
दीवार है
बारिश हे
बनती और टूटती
टूट-टूट पड़ती
एकांत पर
एकांत
बारिश में (भी)
ढहता नहीं
By Nayi Dhara Radioबारिश । गिरधर राठी
बारिश
जहाँ जोड़ती है
ठीक वहीं तोड़ती है
गुनगुनाती है
अपने-आप
लहराती
हहराती है
अपने-आप
चुप हो जाती है
बरसती रहती है अपने-आप
तुम्हें कुछ नहीं करने देती
...
दीवार है
बारिश हे
बनती और टूटती
टूट-टूट पड़ती
एकांत पर
एकांत
बारिश में (भी)
ढहता नहीं