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बातें । नवीन सागर
बातें करते हुए
बातों के परे हम एक-एक के
होते जाते हैं
सोते जाते हैं जैसे सफ़र में बैठ-बैठ
बातों में होते हैं हम जितना
उतने से कई गुना कहीं और
होते हैं
आख़िर को दिखते हैं ना होकर
होते हैं जहाँ वहाँ
दिखते ही नहीं हैं।
By Nayi Dhara Radioबातें । नवीन सागर
बातें करते हुए
बातों के परे हम एक-एक के
होते जाते हैं
सोते जाते हैं जैसे सफ़र में बैठ-बैठ
बातों में होते हैं हम जितना
उतने से कई गुना कहीं और
होते हैं
आख़िर को दिखते हैं ना होकर
होते हैं जहाँ वहाँ
दिखते ही नहीं हैं।