भीतर उमड़ रहा ज्वालामुखी
उसे बहने दो....
मैंने यह नहीं कहती
तुम मेरे पास रहो,
किन्तु अपने पास होने का
एहसास तो दो....
तुम्हें चाहूँ
यह मेरी आस नहीं थी....
किन्तु तुम्हें भुला पाऊँ,
कदाचित यह मेरी नियति नहीं है......
माना रिश्ता यह
अभिव्यक्ति का नहीं,
मन में बसी
भावनाओं का है....
मुझे पता है
तुम नहीं आओगे...
जाने फ़िर भी क्यों
तुम्हारे आने के इंतज़ार का है....
जीवन तुम्हारे बिना
यह सरल नहीं होगा,
जानती हूँ, किन्तु