Pratidin Ek Kavita

Badi Bi | Aniruddh Umat


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बड़ी-बी। अनिरुद्ध उमट


बड़ी-बी दरवाज़ा खोलो

तुम्हारी पान


घुँघरू, ख़त लाने में हुई मुझसे देरी बहुत

'हम नहीं जानते तुम कौन हो'


बड़ी-बी हाथ में ख़त लिए

मुँह में पान चबाए


छमछम करती दरवाज़े की दहलीज़ पर आ

हैरान थी


'हमने अपने मरने का दिन तय कर रखा था

हमने समझा वह आ गया है'


कहती बड़ी-बी मेरी आँखों में झाँक रही थी

'ठीक है गड्ढा ठीक ही खुदा है'


कहती वह उतरी और एक मुट्ठी मिट्टी

हमें दे गई

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Pratidin Ek KavitaBy Nayi Dhara Radio