
Sign up to save your podcasts
Or


बड़ी-बी। अनिरुद्ध उमट
बड़ी-बी दरवाज़ा खोलो
तुम्हारी पान
घुँघरू, ख़त लाने में हुई मुझसे देरी बहुत
'हम नहीं जानते तुम कौन हो'
बड़ी-बी हाथ में ख़त लिए
मुँह में पान चबाए
छमछम करती दरवाज़े की दहलीज़ पर आ
हैरान थी
'हमने अपने मरने का दिन तय कर रखा था
हमने समझा वह आ गया है'
कहती बड़ी-बी मेरी आँखों में झाँक रही थी
'ठीक है गड्ढा ठीक ही खुदा है'
कहती वह उतरी और एक मुट्ठी मिट्टी
हमें दे गई
By Nayi Dhara Radioबड़ी-बी। अनिरुद्ध उमट
बड़ी-बी दरवाज़ा खोलो
तुम्हारी पान
घुँघरू, ख़त लाने में हुई मुझसे देरी बहुत
'हम नहीं जानते तुम कौन हो'
बड़ी-बी हाथ में ख़त लिए
मुँह में पान चबाए
छमछम करती दरवाज़े की दहलीज़ पर आ
हैरान थी
'हमने अपने मरने का दिन तय कर रखा था
हमने समझा वह आ गया है'
कहती बड़ी-बी मेरी आँखों में झाँक रही थी
'ठीक है गड्ढा ठीक ही खुदा है'
कहती वह उतरी और एक मुट्ठी मिट्टी
हमें दे गई