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बड़ी होती लड़की । दीप्ति कुशवाह
स्कूल से निकलकर
पानठेला
फिर चौराहा
आगे
कटिंग सैलून तक
लड़की नज़र नहीं उठाती
कानों में पड़ती उन बातों पर,
जिनके अभिप्राय
कक्षा में पढ़ाए अर्थों से
होते हैं सर्वथा ज़ुदा
कोई प्रतिक्रिया नहीं दर्शाती
पर
घर आकर वह चुप नहीं रहती
धर किनारे बस्ते को
माँ से कहती है रोज़
‘स्कर्ट को थोड़ा और लंबा कर दो’
By Nayi Dhara Radioबड़ी होती लड़की । दीप्ति कुशवाह
स्कूल से निकलकर
पानठेला
फिर चौराहा
आगे
कटिंग सैलून तक
लड़की नज़र नहीं उठाती
कानों में पड़ती उन बातों पर,
जिनके अभिप्राय
कक्षा में पढ़ाए अर्थों से
होते हैं सर्वथा ज़ुदा
कोई प्रतिक्रिया नहीं दर्शाती
पर
घर आकर वह चुप नहीं रहती
धर किनारे बस्ते को
माँ से कहती है रोज़
‘स्कर्ट को थोड़ा और लंबा कर दो’