Pratidin Ek Kavita

Bahut Dinon Se | Muktibodh


Listen Later

बहुत दिनों से | गजानन माधव मुक्तिबोध


मैं बहुत दिनों से बहुत दिनों से

बहुत-बहुत सी बातें तुमसे चाह रहा था कहना

और कि साथ यों साथ-साथ

फिर बहना बहना बहना

मेघों की आवाज़ों से

कुहरे की भाषाओं से

रंगों के उद्भासों से ज्यों नभ का कोना-कोना

है बोल रहा धरती से

जी खोल रहा धरती से

त्यों चाह रहा कहना

उपमा संकेतों से

रूपक से, मौन प्रतीकों से


मैं बहुत दिनों से बहुत-बहुत-सी बातें

तुमसे चाह रहा था कहना!

जैसे मैदानों को आसमान,

कुहरे की मेघों की भाषा त्याग

बिचारा आसमान कुछ

रूप बदलकर रंग बदलकर कहे।

...more
View all episodesView all episodes
Download on the App Store

Pratidin Ek KavitaBy Nayi Dhara Radio