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नेपाल और भारत की साझा विरासत की दूसरी यात्रा मुक्तिनाथ से काली गण्डकी के साथ रुरुक्षेत्र तक उतरती है। यह कड़ी शालिग्राम, हिमालयी व्यापार, नदी-बाजार, मेले और स्थानीय स्मृति को एक ही विरासत-पथ में पढ़ती है। ऊँचाई, घर, भोजन और बोलियाँ बदलती हैं, फिर भी यात्रियों को सहारा देने वाली सामुदायिक परंपरा बनी रहती है। कथा धार्मिक स्मृति के साथ भूगोल और जीवित सामाजिक जीवन को बराबर महत्व देती है। यह ‘नेपाल और भारत की साझा विरासत’ शृंखला का भाग 2 है, प्रस्तुतकर्ता मुकुल शर्मा और बशिष्ठ बिहार।
वीडियो देखें: https://youtu.be/qFY1-Ha9MFs
पूरी शृंखला: https://www.youtube.com/playlist?list=PLBcLogUEvFuU
नेपाल और भारत की साझा विरासत की पहली यात्रा वराहक्षेत्र से पशुपतिनाथ तक जाती है और नेपाल के चार धामों के व्यापक भूगोल का द्वार खोलती है। यह कड़ी मंदिरों के साथ नदियों, बस्तियों, बाजारों, भाषाओं, भोजन और बदलते भू-दृश्य को भी यात्रा का हिस्सा बनाती है। वराहक्षेत्र और पशुपति के बीच चलते हुए हम देखते हैं कि तीर्थ केवल पूजा नहीं, बल्कि समुदायों और स्मृतियों को जोड़ने वाला जीवित मार्ग है। कथा नेपाल की विविध जातीय और भाषाई परंपराओं को उनके अपने संदर्भ में समझने और सम्मान देने पर बल देती है। यह ‘नेपाल और भारत की साझा विरासत’ शृंखला का भाग 1 है, प्रस्तुतकर्ता मुकुल शर्मा और बशिष्ठ बिहार।
पिछले बीस–पच्चीस वर्षों में नेपाल के गाँव, परिवार, उत्पादन, बाज़ार और जीवन कितना बदल गया? हम आज जहाँ खड़े हैं, वहाँ कैसे पहुँचे—और यहाँ से कहाँ जा सकते हैं? यह संक्षिप्त ऑडियो परिचय इन्हीं प्रश्नों से पुस्तक “नेपाल: अतीत पर पुनर्विचार, भविष्य की पुनर्कल्पना” की यात्रा शुरू करता है.
निःशुल्क हिंदी संस्करण पढ़ें:
https://bashisthabihar.com/hindi-books/#hindi-free-edition
लेखन और वाचन: मुकुल शर्मा बशिष्ठ
https://bashisthabihar.com/
दस भागों की नेपाली सभ्यता श्रृंखला का भाग 10। यह अंतिम कड़ी पुराने क्षेत्रीय संसारों को साथ रखकर बताती है कि कई सभ्यताओं के हिस्से आधुनिक नेपाल में कैसे जुड़े।
लेखन और वाचन: मुकुल शर्मा।
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दस भागों की नेपाली सभ्यता श्रृंखला का भाग 9। यह कड़ी युद्ध, कूटनीति, अनुकूलन और राजनीतिक समझ के सहारे बड़े शक्तिशाली पड़ोसियों के बीच नेपाल के टिके रहने की कहानी कहती है।
लेखन और वाचन: मुकुल शर्मा।
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दस भागों की नेपाली सभ्यता श्रृंखला का भाग 8। यह कड़ी भूगोल, नेतृत्व, संस्थाओं, सैन्य संगठन और प्रतिद्वंद्वियों की कमजोरियों के माध्यम से गोरखा की विजय समझाती है।
लेखन और वाचन: मुकुल शर्मा।
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दस भागों की नेपाली सभ्यता श्रृंखला का भाग 7। यह कड़ी बताती है कि काठमांडू उपत्यका कैसे उस राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र में बदली जिसे नेपाल नाम से जाना गया।
लेखन और वाचन: मुकुल शर्मा।
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दस भागों की नेपाली सभ्यता श्रृंखला का भाग 6। यह कड़ी आधुनिक सीमाओं से पहले की तराई के सांस्कृतिक, धार्मिक, व्यापारिक और राजनीतिक भूगोल को समझाती है।
लेखन और वाचन: मुकुल शर्मा।
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दस भागों की नेपाली सभ्यता श्रृंखला का भाग 5। यह कड़ी सिंजा और खस संसार को पश्चिमी हिमालयी इतिहास के केंद्र में रखती है और नेपाल पर उनके प्रभाव को समझाती है।
लेखन और वाचन: मुकुल शर्मा।
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दस भागों की नेपाली सभ्यता श्रृंखला का भाग 4। यह कड़ी व्यापार, धर्म, कूटनीति और प्रवास के माध्यम से नेपाल, तिब्बत और पार-हिमालयी संसार के संबंधों को देखती है।
लेखन और वाचन: मुकुल शर्मा।
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