हालांकि प्रेमचंद ने यह कहानी काफी व्यंग्यात्मक और हास्यपूर्ण ढंग से लिखी है परंतु इस कहानी के माध्यम से उनके कहने का यही मतलब है जिन्दगी के सही निर्वाह के लिए सिर्फ डिग्रीयां ही काफी नहीं होती आपको प्रैक्टिकल होना पड़ता है। और पढ़ाई का अर्थ सिर्फ किताबों को रट कर पास होना नहीं बल्कि किताबो के विषय का अभिप्राय समझना और आम जीवन में उस पढ़ाई का सदुपयोग करना है।