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बीस बरस बाद । सत्यम तिवारी
जो जहाँ है वहाँ नहीं मिलेगा
मरीचिकाएं अब एक पुरानी सदा हैं
और उठे हुए हाथ हवा में गिर जाते हैं
तय करना मुश्किल है ऐसे में मनुष्य की गति
शुरू ही होता है जिसका कालखंड
बीस बरस पूर्व
बर्फ़ के टुकड़े-सा चला है मेरा प्यार
और दूर है तुम्हारा हाथ इतना दूर
वास्तुनिष्ठ सत्य जितना वास्तु से
चश्मा आँख से पानी का
कि हाथों हाथ लिया जाएगा फौरी सुझाव
और साक्ष्यों के अभाव में मिलेगी माफ़ी
निर्देशक छूटे हुए दृश्य से पल्ला झाड़ेगा
निर्माता अनाकर्षक किरदार पर डालेगा पर्दा
तीन बार दिन में लोटे से जल देगा
और रुकने के आग्रह पर चल देगा
देवता ऐसे आएगा कविता में
जैसे दुर्घटना का साक्ष्य छुपाने को बिल्ली
उलट दिशा में दौड़ेने लगेगा तुम्हारा अंतःकरण।
By Nayi Dhara Radioबीस बरस बाद । सत्यम तिवारी
जो जहाँ है वहाँ नहीं मिलेगा
मरीचिकाएं अब एक पुरानी सदा हैं
और उठे हुए हाथ हवा में गिर जाते हैं
तय करना मुश्किल है ऐसे में मनुष्य की गति
शुरू ही होता है जिसका कालखंड
बीस बरस पूर्व
बर्फ़ के टुकड़े-सा चला है मेरा प्यार
और दूर है तुम्हारा हाथ इतना दूर
वास्तुनिष्ठ सत्य जितना वास्तु से
चश्मा आँख से पानी का
कि हाथों हाथ लिया जाएगा फौरी सुझाव
और साक्ष्यों के अभाव में मिलेगी माफ़ी
निर्देशक छूटे हुए दृश्य से पल्ला झाड़ेगा
निर्माता अनाकर्षक किरदार पर डालेगा पर्दा
तीन बार दिन में लोटे से जल देगा
और रुकने के आग्रह पर चल देगा
देवता ऐसे आएगा कविता में
जैसे दुर्घटना का साक्ष्य छुपाने को बिल्ली
उलट दिशा में दौड़ेने लगेगा तुम्हारा अंतःकरण।