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Shiv Puran [Complete] शिव महपुराण - All Episodes | Shiva Shiva | Om Namah Shivaya
भगवान शिव की कहानी [From http://bhajansansar.com]: दैत्यों का स्वभाव तो सदैब से शक्तिसम्पन्न होते ही देवतावों और मनुष्यो को पीड़ित करना रहा है | ब्रह्मा जी से वर पाने के बाद तरकसुर के ३ पुत्रों ने मयदानव के द्वारा ३ नगर बनवाए | उसमे एक सोने का एक चांदी का एक लोहे का था | ये नगर आकाश में इधर उधर घूम सकते थे | इसमें बढे बढे भवन थे बाग़ , सड़के थी | करोडो दानव उसमे निवास करते | सुख सुविधा तो उन नगरों में इतनी थी की कोई भी दवन जो भी इच्छा करता उसे वह मिल जाता | इतना ही नहीं तरकसुर के पुत्र ने तपस्या करके ब्रह्मा जी से वर मांगकर मुर्दो को भी जीवित कर देने वाली बाबड़ी बनवाई | कोई भी दानव अगर मर जाता तो उसे उस बाबड़ी में ले जाया जाता | वह पुनः जीवित हो जाता और पहले से ज़्यदा शक्तिशाली हो जाता | फिर क्या था दानव निर्भय होकर देवतओं को डराने लगे | वे जगह जगह देवतओं को भगाकर इधर उधर विचरने लगे | वे मर्यादाहीन दनाव देवतओं के उद्यानों को तहस नहस करदेते और ऋषियों के पवित्र आश्रमों को भी नष्ट कर देते | इनके अत्याचारों से चारो तरफ हाहाकार मच गया | इस प्रकार जब सब लोक पीड़ित हो गए तो साभी देवता इंद्रा के साथ मिलकर उन नगरों पर प्रहार करने लगे | किन्तु बर्ह्मा जी के वर के प्रभाव से सबअसुर पुनः जीवित हो जाते थे | सभी देवता मिलकर बह्मा जी के पास गए | बह्मा जी ने देवतओं को बताया की भगवान् शिव (lord Shiva )के अलावा आपको कोई भी इस समस्या से नहीं निकाल सकता | तदन्तर बर्ह्मा जी के नेतृत्व में सभी देवता भगवान् शिव Lord Shiva के पास गए | भगवान् शिव (lord Shiva )शरनपन्नो को अभयदान देने वाले है . तेजराशी पारवती जी के पति भगवान् शिव Lord Shiva के दर्शन पाकर सभी देवतओं ने सर झुककर प्रणाम किया | भगवान् शिव Lord Shiva ने आशीर्वाद स्वरुप कहा कहिये आप सब की क्या इच्छा है | भगवान् शिव Lord Shiva की आज्ञा पाकर देवतओं ने भगवान् शिवकी स्तुति की और कहा हम मन वाणी , कर्म से आपकी शरण में हैं आप हमपर कृपा करे | भगवान् शिव Lord Shiva ने प्रसन्न होकर कहा आप सब भय रहित होकर कहिये मैं आपका क्या कार्य करू |
इस प्रकार जब महादेव जी ( Lord Shiva ) ने देवतओं को अभयदान दे दिया तब बर्ह्मा जी ने हाथ जोड़कर कहा- सर्वेशर आपकी कृपा से प्रजापति के पद पर प्रतिष्ठित होकर मैंने दानवो को एक वर दे दिया था | जिससे उन्होंने सब मर्यादायों को तोड़ दिया आपके सिवा उनका कोई वध नहीं कर सकता | तब भगवान् शिव ( Lord Shiva )ने कहा – देवताओं ! में धनुष – बाण धारण करके रथ में सवार हो उनके वध शीध्र ही करूँगा | देवतागण संतुष्ट होकर भगवान् शिव ( Lord Shiva ) की जय जय कार करने लगे . आपको Shiv Mahapuran in hindi कैसी लगी हमें द्वारा ज़रूर बताये| दोस्तों आपके पास Shiv Puran In Hindi story हो तो हमारे साथ शेयर करे .
Shiv Puran [Complete] शिव महपुराण - All Episodes | Shiva Shiva | Om Namah Shivaya
भगवान शिव की कहानी [From http://bhajansansar.com]: दैत्यों का स्वभाव तो सदैब से शक्तिसम्पन्न होते ही देवतावों और मनुष्यो को पीड़ित करना रहा है | ब्रह्मा जी से वर पाने के बाद तरकसुर के ३ पुत्रों ने मयदानव के द्वारा ३ नगर बनवाए | उसमे एक सोने का एक चांदी का एक लोहे का था | ये नगर आकाश में इधर उधर घूम सकते थे | इसमें बढे बढे भवन थे बाग़ , सड़के थी | करोडो दानव उसमे निवास करते | सुख सुविधा तो उन नगरों में इतनी थी की कोई भी दवन जो भी इच्छा करता उसे वह मिल जाता | इतना ही नहीं तरकसुर के पुत्र ने तपस्या करके ब्रह्मा जी से वर मांगकर मुर्दो को भी जीवित कर देने वाली बाबड़ी बनवाई | कोई भी दानव अगर मर जाता तो उसे उस बाबड़ी में ले जाया जाता | वह पुनः जीवित हो जाता और पहले से ज़्यदा शक्तिशाली हो जाता | फिर क्या था दानव निर्भय होकर देवतओं को डराने लगे | वे जगह जगह देवतओं को भगाकर इधर उधर विचरने लगे | वे मर्यादाहीन दनाव देवतओं के उद्यानों को तहस नहस करदेते और ऋषियों के पवित्र आश्रमों को भी नष्ट कर देते | इनके अत्याचारों से चारो तरफ हाहाकार मच गया | इस प्रकार जब सब लोक पीड़ित हो गए तो साभी देवता इंद्रा के साथ मिलकर उन नगरों पर प्रहार करने लगे | किन्तु बर्ह्मा जी के वर के प्रभाव से सबअसुर पुनः जीवित हो जाते थे | सभी देवता मिलकर बह्मा जी के पास गए | बह्मा जी ने देवतओं को बताया की भगवान् शिव (lord Shiva )के अलावा आपको कोई भी इस समस्या से नहीं निकाल सकता | तदन्तर बर्ह्मा जी के नेतृत्व में सभी देवता भगवान् शिव Lord Shiva के पास गए | भगवान् शिव (lord Shiva )शरनपन्नो को अभयदान देने वाले है . तेजराशी पारवती जी के पति भगवान् शिव Lord Shiva के दर्शन पाकर सभी देवतओं ने सर झुककर प्रणाम किया | भगवान् शिव Lord Shiva ने आशीर्वाद स्वरुप कहा कहिये आप सब की क्या इच्छा है | भगवान् शिव Lord Shiva की आज्ञा पाकर देवतओं ने भगवान् शिवकी स्तुति की और कहा हम मन वाणी , कर्म से आपकी शरण में हैं आप हमपर कृपा करे | भगवान् शिव Lord Shiva ने प्रसन्न होकर कहा आप सब भय रहित होकर कहिये मैं आपका क्या कार्य करू |
इस प्रकार जब महादेव जी ( Lord Shiva ) ने देवतओं को अभयदान दे दिया तब बर्ह्मा जी ने हाथ जोड़कर कहा- सर्वेशर आपकी कृपा से प्रजापति के पद पर प्रतिष्ठित होकर मैंने दानवो को एक वर दे दिया था | जिससे उन्होंने सब मर्यादायों को तोड़ दिया आपके सिवा उनका कोई वध नहीं कर सकता | तब भगवान् शिव ( Lord Shiva )ने कहा – देवताओं ! में धनुष – बाण धारण करके रथ में सवार हो उनके वध शीध्र ही करूँगा | देवतागण संतुष्ट होकर भगवान् शिव ( Lord Shiva ) की जय जय कार करने लगे . आपको Shiv Mahapuran in hindi कैसी लगी हमें द्वारा ज़रूर बताये| दोस्तों आपके पास Shiv Puran In Hindi story हो तो हमारे साथ शेयर करे .
Shiv Puran [Complete] शिव महपुराण - All Episodes | Shiva Shiva | Om Namah Shivaya
भगवान शिव की कहानी [From http://bhajansansar.com]: दैत्यों का स्वभाव तो सदैब से शक्तिसम्पन्न होते ही देवतावों और मनुष्यो को पीड़ित करना रहा है | ब्रह्मा जी से वर पाने के बाद तरकसुर के ३ पुत्रों ने मयदानव के द्वारा ३ नगर बनवाए | उसमे एक सोने का एक चांदी का एक लोहे का था | ये नगर आकाश में इधर उधर घूम सकते थे | इसमें बढे बढे भवन थे बाग़ , सड़के थी | करोडो दानव उसमे निवास करते | सुख सुविधा तो उन नगरों में इतनी थी की कोई भी दवन जो भी इच्छा करता उसे वह मिल जाता | इतना ही नहीं तरकसुर के पुत्र ने तपस्या करके ब्रह्मा जी से वर मांगकर मुर्दो को भी जीवित कर देने वाली बाबड़ी बनवाई | कोई भी दानव अगर मर जाता तो उसे उस बाबड़ी में ले जाया जाता | वह पुनः जीवित हो जाता और पहले से ज़्यदा शक्तिशाली हो जाता | फिर क्या था दानव निर्भय होकर देवतओं को डराने लगे | वे जगह जगह देवतओं को भगाकर इधर उधर विचरने लगे | वे मर्यादाहीन दनाव देवतओं के उद्यानों को तहस नहस करदेते और ऋषियों के पवित्र आश्रमों को भी नष्ट कर देते | इनके अत्याचारों से चारो तरफ हाहाकार मच गया | इस प्रकार जब सब लोक पीड़ित हो गए तो साभी देवता इंद्रा के साथ मिलकर उन नगरों पर प्रहार करने लगे | किन्तु बर्ह्मा जी के वर के प्रभाव से सबअसुर पुनः जीवित हो जाते थे | सभी देवता मिलकर बह्मा जी के पास गए | बह्मा जी ने देवतओं को बताया की भगवान् शिव (lord Shiva )के अलावा आपको कोई भी इस समस्या से नहीं निकाल सकता | तदन्तर बर्ह्मा जी के नेतृत्व में सभी देवता भगवान् शिव Lord Shiva के पास गए | भगवान् शिव (lord Shiva )शरनपन्नो को अभयदान देने वाले है . तेजराशी पारवती जी के पति भगवान् शिव Lord Shiva के दर्शन पाकर सभी देवतओं ने सर झुककर प्रणाम किया | भगवान् शिव Lord Shiva ने आशीर्वाद स्वरुप कहा कहिये आप सब की क्या इच्छा है | भगवान् शिव Lord Shiva की आज्ञा पाकर देवतओं ने भगवान् शिवकी स्तुति की और कहा हम मन वाणी , कर्म से आपकी शरण में हैं आप हमपर कृपा करे | भगवान् शिव Lord Shiva ने प्रसन्न होकर कहा आप सब भय रहित होकर कहिये मैं आपका क्या कार्य करू |
इस प्रकार जब महादेव जी ( Lord Shiva ) ने देवतओं को अभयदान दे दिया तब बर्ह्मा जी ने हाथ जोड़कर कहा- सर्वेशर आपकी कृपा से प्रजापति के पद पर प्रतिष्ठित होकर मैंने दानवो को एक वर दे दिया था | जिससे उन्होंने सब मर्यादायों को तोड़ दिया आपके सिवा उनका कोई वध नहीं कर सकता | तब भगवान् शिव ( Lord Shiva )ने कहा – देवताओं ! में धनुष – बाण धारण करके रथ में सवार हो उनके वध शीध्र ही करूँगा | देवतागण संतुष्ट होकर भगवान् शिव ( Lord Shiva ) की जय जय कार करने लगे . आपको Shiv Mahapuran in hindi कैसी लगी हमें द्वारा ज़रूर बताये| दोस्तों आपके पास Shiv Puran In Hindi story हो तो हमारे साथ शेयर करे .
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भगवान शिव की कहानी [From http://bhajansansar.com]: दैत्यों का स्वभाव तो सदैब से शक्तिसम्पन्न होते ही देवतावों और मनुष्यो को पीड़ित करना रहा है | ब्रह्मा जी से वर पाने के बाद तरकसुर के ३ पुत्रों ने मयदानव के द्वारा ३ नगर बनवाए | उसमे एक सोने का एक चांदी का एक लोहे का था | ये नगर आकाश में इधर उधर घूम सकते थे | इसमें बढे बढे भवन थे बाग़ , सड़के थी | करोडो दानव उसमे निवास करते | सुख सुविधा तो उन नगरों में इतनी थी की कोई भी दवन जो भी इच्छा करता उसे वह मिल जाता | इतना ही नहीं तरकसुर के पुत्र ने तपस्या करके ब्रह्मा जी से वर मांगकर मुर्दो को भी जीवित कर देने वाली बाबड़ी बनवाई | कोई भी दानव अगर मर जाता तो उसे उस बाबड़ी में ले जाया जाता | वह पुनः जीवित हो जाता और पहले से ज़्यदा शक्तिशाली हो जाता | फिर क्या था दानव निर्भय होकर देवतओं को डराने लगे | वे जगह जगह देवतओं को भगाकर इधर उधर विचरने लगे | वे मर्यादाहीन दनाव देवतओं के उद्यानों को तहस नहस करदेते और ऋषियों के पवित्र आश्रमों को भी नष्ट कर देते | इनके अत्याचारों से चारो तरफ हाहाकार मच गया | इस प्रकार जब सब लोक पीड़ित हो गए तो साभी देवता इंद्रा के साथ मिलकर उन नगरों पर प्रहार करने लगे | किन्तु बर्ह्मा जी के वर के प्रभाव से सबअसुर पुनः जीवित हो जाते थे | सभी देवता मिलकर बह्मा जी के पास गए | बह्मा जी ने देवतओं को बताया की भगवान् शिव (lord Shiva )के अलावा आपको कोई भी इस समस्या से नहीं निकाल सकता | तदन्तर बर्ह्मा जी के नेतृत्व में सभी देवता भगवान् शिव Lord Shiva के पास गए | भगवान् शिव (lord Shiva )शरनपन्नो को अभयदान देने वाले है . तेजराशी पारवती जी के पति भगवान् शिव Lord Shiva के दर्शन पाकर सभी देवतओं ने सर झुककर प्रणाम किया | भगवान् शिव Lord Shiva ने आशीर्वाद स्वरुप कहा कहिये आप सब की क्या इच्छा है | भगवान् शिव Lord Shiva की आज्ञा पाकर देवतओं ने भगवान् शिवकी स्तुति की और कहा हम मन वाणी , कर्म से आपकी शरण में हैं आप हमपर कृपा करे | भगवान् शिव Lord Shiva ने प्रसन्न होकर कहा आप सब भय रहित होकर कहिये मैं आपका क्या कार्य करू |
इस प्रकार जब महादेव जी ( Lord Shiva ) ने देवतओं को अभयदान दे दिया तब बर्ह्मा जी ने हाथ जोड़कर कहा- सर्वेशर आपकी कृपा से प्रजापति के पद पर प्रतिष्ठित होकर मैंने दानवो को एक वर दे दिया था | जिससे उन्होंने सब मर्यादायों को तोड़ दिया आपके सिवा उनका कोई वध नहीं कर सकता | तब भगवान् शिव ( Lord Shiva )ने कहा – देवताओं ! में धनुष – बाण धारण करके रथ में सवार हो उनके वध शीध्र ही करूँगा | देवतागण संतुष्ट होकर भगवान् शिव ( Lord Shiva ) की जय जय कार करने लगे . आपको Shiv Mahapuran in hindi कैसी लगी हमें द्वारा ज़रूर बताये| दोस्तों आपके पास Shiv Puran In Hindi story हो तो हमारे साथ शेयर करे .
Shiv Puran [Complete] शिव महपुराण - All Episodes | Shiva Shiva | Om Namah Shivaya
भगवान शिव की कहानी [From http://bhajansansar.com]: दैत्यों का स्वभाव तो सदैब से शक्तिसम्पन्न होते ही देवतावों और मनुष्यो को पीड़ित करना रहा है | ब्रह्मा जी से वर पाने के बाद तरकसुर के ३ पुत्रों ने मयदानव के द्वारा ३ नगर बनवाए | उसमे एक सोने का एक चांदी का एक लोहे का था | ये नगर आकाश में इधर उधर घूम सकते थे | इसमें बढे बढे भवन थे बाग़ , सड़के थी | करोडो दानव उसमे निवास करते | सुख सुविधा तो उन नगरों में इतनी थी की कोई भी दवन जो भी इच्छा करता उसे वह मिल जाता | इतना ही नहीं तरकसुर के पुत्र ने तपस्या करके ब्रह्मा जी से वर मांगकर मुर्दो को भी जीवित कर देने वाली बाबड़ी बनवाई | कोई भी दानव अगर मर जाता तो उसे उस बाबड़ी में ले जाया जाता | वह पुनः जीवित हो जाता और पहले से ज़्यदा शक्तिशाली हो जाता | फिर क्या था दानव निर्भय होकर देवतओं को डराने लगे | वे जगह जगह देवतओं को भगाकर इधर उधर विचरने लगे | वे मर्यादाहीन दनाव देवतओं के उद्यानों को तहस नहस करदेते और ऋषियों के पवित्र आश्रमों को भी नष्ट कर देते | इनके अत्याचारों से चारो तरफ हाहाकार मच गया | इस प्रकार जब सब लोक पीड़ित हो गए तो साभी देवता इंद्रा के साथ मिलकर उन नगरों पर प्रहार करने लगे | किन्तु बर्ह्मा जी के वर के प्रभाव से सबअसुर पुनः जीवित हो जाते थे | सभी देवता मिलकर बह्मा जी के पास गए | बह्मा जी ने देवतओं को बताया की भगवान् शिव (lord Shiva )के अलावा आपको कोई भी इस समस्या से नहीं निकाल सकता | तदन्तर बर्ह्मा जी के नेतृत्व में सभी देवता भगवान् शिव Lord Shiva के पास गए | भगवान् शिव (lord Shiva )शरनपन्नो को अभयदान देने वाले है . तेजराशी पारवती जी के पति भगवान् शिव Lord Shiva के दर्शन पाकर सभी देवतओं ने सर झुककर प्रणाम किया | भगवान् शिव Lord Shiva ने आशीर्वाद स्वरुप कहा कहिये आप सब की क्या इच्छा है | भगवान् शिव Lord Shiva की आज्ञा पाकर देवतओं ने भगवान् शिवकी स्तुति की और कहा हम मन वाणी , कर्म से आपकी शरण में हैं आप हमपर कृपा करे | भगवान् शिव Lord Shiva ने प्रसन्न होकर कहा आप सब भय रहित होकर कहिये मैं आपका क्या कार्य करू |
इस प्रकार जब महादेव जी ( Lord Shiva ) ने देवतओं को अभयदान दे दिया तब बर्ह्मा जी ने हाथ जोड़कर कहा- सर्वेशर आपकी कृपा से प्रजापति के पद पर प्रतिष्ठित होकर मैंने दानवो को एक वर दे दिया था | जिससे उन्होंने सब मर्यादायों को तोड़ दिया आपके सिवा उनका कोई वध नहीं कर सकता | तब भगवान् शिव ( Lord Shiva )ने कहा – देवताओं ! में धनुष – बाण धारण करके रथ में सवार हो उनके वध शीध्र ही करूँगा | देवतागण संतुष्ट होकर भगवान् शिव ( Lord Shiva ) की जय जय कार करने लगे . आपको Shiv Mahapuran in hindi कैसी लगी हमें द्वारा ज़रूर बताये| दोस्तों आपके पास Shiv Puran In Hindi story हो तो हमारे साथ शेयर करे .
Shiv Puran [Complete] शिव महपुराण - All Episodes | Shiva Shiva | Om Namah Shivaya
भगवान शिव की कहानी [From http://bhajansansar.com]: दैत्यों का स्वभाव तो सदैब से शक्तिसम्पन्न होते ही देवतावों और मनुष्यो को पीड़ित करना रहा है | ब्रह्मा जी से वर पाने के बाद तरकसुर के ३ पुत्रों ने मयदानव के द्वारा ३ नगर बनवाए | उसमे एक सोने का एक चांदी का एक लोहे का था | ये नगर आकाश में इधर उधर घूम सकते थे | इसमें बढे बढे भवन थे बाग़ , सड़के थी | करोडो दानव उसमे निवास करते | सुख सुविधा तो उन नगरों में इतनी थी की कोई भी दवन जो भी इच्छा करता उसे वह मिल जाता | इतना ही नहीं तरकसुर के पुत्र ने तपस्या करके ब्रह्मा जी से वर मांगकर मुर्दो को भी जीवित कर देने वाली बाबड़ी बनवाई | कोई भी दानव अगर मर जाता तो उसे उस बाबड़ी में ले जाया जाता | वह पुनः जीवित हो जाता और पहले से ज़्यदा शक्तिशाली हो जाता | फिर क्या था दानव निर्भय होकर देवतओं को डराने लगे | वे जगह जगह देवतओं को भगाकर इधर उधर विचरने लगे | वे मर्यादाहीन दनाव देवतओं के उद्यानों को तहस नहस करदेते और ऋषियों के पवित्र आश्रमों को भी नष्ट कर देते | इनके अत्याचारों से चारो तरफ हाहाकार मच गया | इस प्रकार जब सब लोक पीड़ित हो गए तो साभी देवता इंद्रा के साथ मिलकर उन नगरों पर प्रहार करने लगे | किन्तु बर्ह्मा जी के वर के प्रभाव से सबअसुर पुनः जीवित हो जाते थे | सभी देवता मिलकर बह्मा जी के पास गए | बह्मा जी ने देवतओं को बताया की भगवान् शिव (lord Shiva )के अलावा आपको कोई भी इस समस्या से नहीं निकाल सकता | तदन्तर बर्ह्मा जी के नेतृत्व में सभी देवता भगवान् शिव Lord Shiva के पास गए | भगवान् शिव (lord Shiva )शरनपन्नो को अभयदान देने वाले है . तेजराशी पारवती जी के पति भगवान् शिव Lord Shiva के दर्शन पाकर सभी देवतओं ने सर झुककर प्रणाम किया | भगवान् शिव Lord Shiva ने आशीर्वाद स्वरुप कहा कहिये आप सब की क्या इच्छा है | भगवान् शिव Lord Shiva की आज्ञा पाकर देवतओं ने भगवान् शिवकी स्तुति की और कहा हम मन वाणी , कर्म से आपकी शरण में हैं आप हमपर कृपा करे | भगवान् शिव Lord Shiva ने प्रसन्न होकर कहा आप सब भय रहित होकर कहिये मैं आपका क्या कार्य करू |
इस प्रकार जब महादेव जी ( Lord Shiva ) ने देवतओं को अभयदान दे दिया तब बर्ह्मा जी ने हाथ जोड़कर कहा- सर्वेशर आपकी कृपा से प्रजापति के पद पर प्रतिष्ठित होकर मैंने दानवो को एक वर दे दिया था | जिससे उन्होंने सब मर्यादायों को तोड़ दिया आपके सिवा उनका कोई वध नहीं कर सकता | तब भगवान् शिव ( Lord Shiva )ने कहा – देवताओं ! में धनुष – बाण धारण करके रथ में सवार हो उनके वध शीध्र ही करूँगा | देवतागण संतुष्ट होकर भगवान् शिव ( Lord Shiva ) की जय जय कार करने लगे . आपको Shiv Mahapuran in hindi कैसी लगी हमें द्वारा ज़रूर बताये| दोस्तों आपके पास Shiv Puran In Hindi story हो तो हमारे साथ शेयर करे .
Shiv Puran [Complete] शिव महपुराण - All Episodes | Shiva Shiva | Om Namah Shivaya
भगवान शिव की कहानी [From http://bhajansansar.com]: दैत्यों का स्वभाव तो सदैब से शक्तिसम्पन्न होते ही देवतावों और मनुष्यो को पीड़ित करना रहा है | ब्रह्मा जी से वर पाने के बाद तरकसुर के ३ पुत्रों ने मयदानव के द्वारा ३ नगर बनवाए | उसमे एक सोने का एक चांदी का एक लोहे का था | ये नगर आकाश में इधर उधर घूम सकते थे | इसमें बढे बढे भवन थे बाग़ , सड़के थी | करोडो दानव उसमे निवास करते | सुख सुविधा तो उन नगरों में इतनी थी की कोई भी दवन जो भी इच्छा करता उसे वह मिल जाता | इतना ही नहीं तरकसुर के पुत्र ने तपस्या करके ब्रह्मा जी से वर मांगकर मुर्दो को भी जीवित कर देने वाली बाबड़ी बनवाई | कोई भी दानव अगर मर जाता तो उसे उस बाबड़ी में ले जाया जाता | वह पुनः जीवित हो जाता और पहले से ज़्यदा शक्तिशाली हो जाता | फिर क्या था दानव निर्भय होकर देवतओं को डराने लगे | वे जगह जगह देवतओं को भगाकर इधर उधर विचरने लगे | वे मर्यादाहीन दनाव देवतओं के उद्यानों को तहस नहस करदेते और ऋषियों के पवित्र आश्रमों को भी नष्ट कर देते | इनके अत्याचारों से चारो तरफ हाहाकार मच गया | इस प्रकार जब सब लोक पीड़ित हो गए तो साभी देवता इंद्रा के साथ मिलकर उन नगरों पर प्रहार करने लगे | किन्तु बर्ह्मा जी के वर के प्रभाव से सबअसुर पुनः जीवित हो जाते थे | सभी देवता मिलकर बह्मा जी के पास गए | बह्मा जी ने देवतओं को बताया की भगवान् शिव (lord Shiva )के अलावा आपको कोई भी इस समस्या से नहीं निकाल सकता | तदन्तर बर्ह्मा जी के नेतृत्व में सभी देवता भगवान् शिव Lord Shiva के पास गए | भगवान् शिव (lord Shiva )शरनपन्नो को अभयदान देने वाले है . तेजराशी पारवती जी के पति भगवान् शिव Lord Shiva के दर्शन पाकर सभी देवतओं ने सर झुककर प्रणाम किया | भगवान् शिव Lord Shiva ने आशीर्वाद स्वरुप कहा कहिये आप सब की क्या इच्छा है | भगवान् शिव Lord Shiva की आज्ञा पाकर देवतओं ने भगवान् शिवकी स्तुति की और कहा हम मन वाणी , कर्म से आपकी शरण में हैं आप हमपर कृपा करे | भगवान् शिव Lord Shiva ने प्रसन्न होकर कहा आप सब भय रहित होकर कहिये मैं आपका क्या कार्य करू |
इस प्रकार जब महादेव जी ( Lord Shiva ) ने देवतओं को अभयदान दे दिया तब बर्ह्मा जी ने हाथ जोड़कर कहा- सर्वेशर आपकी कृपा से प्रजापति के पद पर प्रतिष्ठित होकर मैंने दानवो को एक वर दे दिया था | जिससे उन्होंने सब मर्यादायों को तोड़ दिया आपके सिवा उनका कोई वध नहीं कर सकता | तब भगवान् शिव ( Lord Shiva )ने कहा – देवताओं ! में धनुष – बाण धारण करके रथ में सवार हो उनके वध शीध्र ही करूँगा | देवतागण संतुष्ट होकर भगवान् शिव ( Lord Shiva ) की जय जय कार करने लगे . आपको Shiv Mahapuran in hindi कैसी लगी हमें द्वारा ज़रूर बताये| दोस्तों आपके पास Shiv Puran In Hindi story हो तो हमारे साथ शेयर करे .
Yajur Veda Complete Audio - Episode 3
'Yajur Veda' is one of the four Vedas of Hindu culture. The work Yajur Veda is a combination of two words: 'Yajus' meaning sacrifice and Veda meaning knowledge. In simple terms, Yajur Veda is a step-by-step guide for performing various religious rituals and ceremonies in the right way. But if we dig deeper into the classical meaning of Yajur Veda, it has a much deeper significance than just a book of rituals. It seeks to create a deeper level of consciousness among people.
Yajur Veda is full of mantras that help the soul of the deceased to lead a comfortable afterlife.
Yajur Veda consists of two major sacrifices: Darsapurnamasa and Asvamedha. The sacrificial ceremony in Darsapurnamasa sacrifice is performed at the new and full moon. In the Asvamedha or the horse sacrifice, 609 domestic and wild animals are tied to 21 sacrificial posts. Some of the hymns from Yajur Veda are still very popular in Hinduism. In Hindu mythology, there is a famous story surrounding the Yajur Veda. The student of the great guru Ved Vyas, Vaisampayana, learned about Yajur Veda from him.
Yajur Veda is quintessentially divided into two major parts: Shukla or the white Yajur Veda and Krishna or the black Yajur Veda. Both these parts have different kinds of writing in it; Shukla has Shatapatha Brahmana text while Krishna Had the Brahmana prose.
Yajur Veda Complete Audio - Episode 2
'Yajur Veda' is one of the four Vedas of Hindu culture. The work Yajur Veda is a combination of two words: 'Yajus' meaning sacrifice and Veda meaning knowledge. In simple terms, Yajur Veda is a step-by-step guide for performing various religious rituals and ceremonies in the right way. But if we dig deeper into the classical meaning of Yajur Veda, it has a much deeper significance than just a book of rituals. It seeks to create a deeper level of consciousness among people.
Yajur Veda is full of mantras that help the soul of the deceased to lead a comfortable afterlife.
Yajur Veda consists of two major sacrifices: Darsapurnamasa and Asvamedha. The sacrificial ceremony in Darsapurnamasa sacrifice is performed at the new and full moon. In the Asvamedha or the horse sacrifice, 609 domestic and wild animals are tied to 21 sacrificial posts. Some of the hymns from Yajur Veda are still very popular in Hinduism. In Hindu mythology, there is a famous story surrounding the Yajur Veda. The student of the great guru Ved Vyas, Vaisampayana, learned about Yajur Veda from him.
Yajur Veda is quintessentially divided into two major parts: Shukla or the white Yajur Veda and Krishna or the black Yajur Veda. Both these parts have different kinds of writing in it; Shukla has Shatapatha Brahmana text while Krishna Had the Brahmana prose.
Yajur Veda Complete Audio - Episode 1
'Yajur Veda' is one of the four Vedas of Hindu culture. The work Yajur Veda is a combination of two words: 'Yajus' meaning sacrifice and Veda meaning knowledge. In simple terms, Yajur Veda is a step-by-step guide for performing various religious rituals and ceremonies in the right way. But if we dig deeper into the classical meaning of Yajur Veda, it has a much deeper significance than just a book of rituals. It seeks to create a deeper level of consciousness among people.
Yajur Veda is full of mantras that help the soul of the deceased to lead a comfortable afterlife.
Yajur Veda consists of two major sacrifices: Darsapurnamasa and Asvamedha. The sacrificial ceremony in Darsapurnamasa sacrifice is performed at the new and full moon. In the Asvamedha or the horse sacrifice, 609 domestic and wild animals are tied to 21 sacrificial posts. Some of the hymns from Yajur Veda are still very popular in Hinduism. In Hindu mythology, there is a famous story surrounding the Yajur Veda. The student of the great guru Ved Vyas, Vaisampayana, learned about Yajur Veda from him.
Yajur Veda is quintessentially divided into two major parts: Shukla or the white Yajur Veda and Krishna or the black Yajur Veda. Both these parts have different kinds of writing in it; Shukla has Shatapatha Brahmana text while Krishna Had the Brahmana prose.
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