1967, 1968, 1969... मेरे बचपन और जवानी के बीच में झूलते यह तीन साल .....मेरे दिल के बहुत क़रीब हैं ....न रूड़की अब वैसा रहा है और न ही मैं अब वैसा हूँ ... समय अपना काम दोनों पर ही कर गया है ....पर यादें आज भी ताज़ा हैं मानो कल की बात हो...
1967, 1968, 1969... मेरे बचपन और जवानी के बीच में झूलते यह तीन साल .....मेरे दिल के बहुत क़रीब हैं ....न रूड़की अब वैसा रहा है और न ही मैं अब वैसा हूँ ... समय अपना काम दोनों पर ही कर गया है ....पर यादें आज भी ताज़ा हैं मानो कल की बात हो...