बीते बचपन की वो यादें जो मेरे दिल के बहुत क़रीब हैं... जिनका कोई मतलब नहीं है पर जो बिना मतलब के मेरे आगे पीछे घूमती रहती हैं... जिनके होने से मैं हूँ ... आईये चलें एक बार फिर गंगा नदी की नहर के तट पर बसे रुड़की शहर की ओर, जैसा वो था 1968 में और मुझसे वहीं मिलें जब मैं आठवीं में था