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(अल्लहड़ बनारसी और रमती बंजारन) जिसके (लेखक शरद दुबे) और (वक्ता RJ रविंद्र सिंह) है !
बनारस घूम आये क्या
अगर कार के सामने साड़ आ जाए
तो समझ लेना आप बनारस मे है
अगर पता पूछने पर कोई घर तक पहुचा जाए
तो समझ लेना आप बनारस मे है
सुबह सुबह हर घर से घंटो कि आवज आ जाए
तो समझ लेना आप बनारस मे है
घाटो पर अगर अघोरी नजर आ जाए
तो समझ लेना आप बनारस मे है
शाम के वक्त घाटो पर गिटार वादन सुना जाए
तो समझ लेना आप बनारस मे है
आकाशवाणी के सामने कि कुल्ल्हड़ वाली चाय पसंद आये
तो समझ लेना आप बनारस मे है
अगर टेम्पो का भाडा देने से पहले हम रोज आने का धौस दिखाये
तो समझ लेना आप बनारस मे है
अगर नेता किसी मन्दिर मे बार बार आये
तो समझ लेना आप बनारस मे है
अगर कुछ ना खरीदने वालो कि भिड़ माल मे दिखा जाए
तो समझ लेना आप बनारस मे है
बाहर का नया आदमी अगर ठगा जाए
तो समझ लेना आप बनारस मे है
मालिकों को वेंडरो का इन्तजार हुआ जाए
तो समझ लेना आप बनारस मे है
अगर पान कि दुकान चलाने वाला देश चलाये
तो समझ लेना आप बनारस मे है
By Sharad Dubey(अल्लहड़ बनारसी और रमती बंजारन) जिसके (लेखक शरद दुबे) और (वक्ता RJ रविंद्र सिंह) है !
बनारस घूम आये क्या
अगर कार के सामने साड़ आ जाए
तो समझ लेना आप बनारस मे है
अगर पता पूछने पर कोई घर तक पहुचा जाए
तो समझ लेना आप बनारस मे है
सुबह सुबह हर घर से घंटो कि आवज आ जाए
तो समझ लेना आप बनारस मे है
घाटो पर अगर अघोरी नजर आ जाए
तो समझ लेना आप बनारस मे है
शाम के वक्त घाटो पर गिटार वादन सुना जाए
तो समझ लेना आप बनारस मे है
आकाशवाणी के सामने कि कुल्ल्हड़ वाली चाय पसंद आये
तो समझ लेना आप बनारस मे है
अगर टेम्पो का भाडा देने से पहले हम रोज आने का धौस दिखाये
तो समझ लेना आप बनारस मे है
अगर नेता किसी मन्दिर मे बार बार आये
तो समझ लेना आप बनारस मे है
अगर कुछ ना खरीदने वालो कि भिड़ माल मे दिखा जाए
तो समझ लेना आप बनारस मे है
बाहर का नया आदमी अगर ठगा जाए
तो समझ लेना आप बनारस मे है
मालिकों को वेंडरो का इन्तजार हुआ जाए
तो समझ लेना आप बनारस मे है
अगर पान कि दुकान चलाने वाला देश चलाये
तो समझ लेना आप बनारस मे है