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(अल्लहड़ बनारसी और रमती बंजारन) कविता के (लेखक शरद दुबे) और (वक्ता RJ रविंद्र सिंह) है !
उनके सिवा
ये शर्द हवाएं बिखरे पत्ते तन्हाई!
ये दिसम्बर तू लाया है उसके सिवा !!
वो बोली थी फ़िर भी ना आई!
अकेले तु आया है उसके सिवा !!
वो बाते गुजरी यादे ना आई याद !
सब कुछ भुल गया उसके सिवा!!
वो मुलाकाते मुलाकातो मे हुई बात!
ना आयी याद जो गुजरी रात बस उसके सिवा!!
उसका मिलना घण्टों बाते करना!
ना रही याद बस उसके सिवा!!
उन बातो को खुद से अलग कर पाना!
कितना मुस्किल था बस उनके सिवा!!
उसके साथ हुई मुलाकात साथ हुई बात !
सब थी हमारे साथ बस उनके सिवा !!
उनका वो वादा वादो मे हुई बात सब थी
हमारे साथ बस उनके सिवा
By Sharad Dubey(अल्लहड़ बनारसी और रमती बंजारन) कविता के (लेखक शरद दुबे) और (वक्ता RJ रविंद्र सिंह) है !
उनके सिवा
ये शर्द हवाएं बिखरे पत्ते तन्हाई!
ये दिसम्बर तू लाया है उसके सिवा !!
वो बोली थी फ़िर भी ना आई!
अकेले तु आया है उसके सिवा !!
वो बाते गुजरी यादे ना आई याद !
सब कुछ भुल गया उसके सिवा!!
वो मुलाकाते मुलाकातो मे हुई बात!
ना आयी याद जो गुजरी रात बस उसके सिवा!!
उसका मिलना घण्टों बाते करना!
ना रही याद बस उसके सिवा!!
उन बातो को खुद से अलग कर पाना!
कितना मुस्किल था बस उनके सिवा!!
उसके साथ हुई मुलाकात साथ हुई बात !
सब थी हमारे साथ बस उनके सिवा !!
उनका वो वादा वादो मे हुई बात सब थी
हमारे साथ बस उनके सिवा