नव पाषाण युग से चली आ रही चाक पर मिट्टी के वर्तन ढालने की कला अभी हाशिये पर है। इस कला सह उद्यम को पुनः जीवित कर इसे बाजार दिलाना न सिर्फ इनकी आजीविका के लिये बल्कि पर्यावरण के लिए भी संगत है।
नव पाषाण युग से चली आ रही चाक पर मिट्टी के वर्तन ढालने की कला अभी हाशिये पर है। इस कला सह उद्यम को पुनः जीवित कर इसे बाजार दिलाना न सिर्फ इनकी आजीविका के लिये बल्कि पर्यावरण के लिए भी संगत है।