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Listen in to a recitation of the famous poem “Chand Ka Kurta” by Ramdhari Singh Dinkar.
Lyrics in Hindi:
सन सन चलती हवा रात भर जाड़े में मरता हूं
आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का
बच्चे की सुन बात कहा माता ने अरे सलोने
जाड़े की तो बात ठीक है पर मैं तो डरती हूं
कभी एक अंगुल भर चौड़ा कभी एक फुट मोटा
घटता बढ़ता रोज किसी दिन ऐसा भी करता है
अब तू ही यह बता नाप तेरा किस रोज लिवायें?
By aksListen in to a recitation of the famous poem “Chand Ka Kurta” by Ramdhari Singh Dinkar.
Lyrics in Hindi:
सन सन चलती हवा रात भर जाड़े में मरता हूं
आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का
बच्चे की सुन बात कहा माता ने अरे सलोने
जाड़े की तो बात ठीक है पर मैं तो डरती हूं
कभी एक अंगुल भर चौड़ा कभी एक फुट मोटा
घटता बढ़ता रोज किसी दिन ऐसा भी करता है
अब तू ही यह बता नाप तेरा किस रोज लिवायें?