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Kavita Path episodes

  • Lafson Ki Wapasi - Aks

    Listen in to a recitation of the poem "Lafson Ki Wapasi" written by Aks.


    Lyrics in Hindi:

    सिंगापुर में हूँ आजकल, ये तो है सही,

    दिल्ली वाला हूँ मगर, ये मत भूलिएगा कभी।


    ज़िंदगी की दौड़ में सब कुछ पा लिया है सही,

    पर जो खो गया था बचपन में, वो मिल न सका कभी।


    कलम को भूल बैठे थे, कुछ साल पहले सही,

    अब लफ़्ज़ फिर से आने लगे हैं, जैसे लौटे कोई कभी।


    किसी मिसरे में छुपा हूँ, किसी नज़र में सही,

    मैं अब किताबों की तरह खुलता हूँ धीरे-धीरे कभी।


    भीड़ में भी अक्सर ख़ुद से दूर रहा हूँ सही,

    शेरों ने ही पास बुलाया, जब कोई न था कभी।


    हर शेर में दिखा कोई अक्स-सा चेहरा सही,

    लोग समझे शायरी है, मैं समझा ज़िंदगी कभी।

    4 min
  • Jo Sindoor Tha Ab Sitara Bana - Aks

    Listen in to a recitation of the poem "Jo Sindoor Tha Ab Sitara Bana" written by Aks.


    Lyrics in Hindi:


    जो सिंदूर था, अब सितारा बना,
    जो बिखरा था कल, वो सहारा बना।


    वो माँ की दुआ थी कि बेटे का फ़र्ज़,
    जो चुप था कभी, अब इशारा बना।


    जो कांपते लफ़्ज़ों में छुपती थी आग,
    वही जख़्म अब इक शरारा बना।


    जिसे ख़त में बस "मैं ठीक हूँ" लिखा,
    वो जुमला ही जैसे दोबारा बना।


    कभी जूते, कभी रेत में मिले नाम,
    हर गुमशुदा अब नज़ारा बना।


    वो बच्चा जो सीमा पे लहरा गया,
    उसी का जुनूँ अब किनारा बना।


    "अक्स" ने जो ख़ामोशी में कह दिया,
    वो लफ़्ज़ हर दिल का नारा बना।

    3 min

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