Kavita Path

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Kavita Path episodes

  • Adhikaar - Mahadevi Verma

    Listen in to a recitation of the famous poem “Adhikaar” by Mahadevi Verma.

    Lyrics in Hindi:


    वे मुस्काते फूल, नहीं
    जिनको आता है मुर्झाना,
    वे तारों के दीप, नहीं
    जिनको भाता है बुझ जाना;

    वे नीलम के मेघ, नहीं
    जिनको है घुल जाने की चाह
    वह अनन्त रितुराज,नहीं
    जिसने देखी जाने की राह|

    वे सूने से नयन,नहीं
    जिनमें बनते आँसू मोती,
    वह प्राणों की सेज,नही
    जिसमें बेसुध पीड़ा सोती;

    ऐसा तेरा लोक, वेदना
    नहीं,नहीं जिसमें अवसाद,
    जलना जाना नहीं, नहीं
    जिसने जाना मिटने का स्वाद!

    क्या अमरों का लोक मिलेगा
    तेरी करुणा का उपहार?
    रहने दो हे देव! अरे
    यह मेरा मिटने का अधिकार!


    3 min
  • Agneepath - Harivansh Rai Bachchan

    Listen in to a recitation of the famous poem “Agneepath” by Harivansh Rai Bachchan.

    Lyrics in Hindi:


    वृक्ष हों भले खड़े,

    हों घने हों बड़े,

    एक पत्र छाँह भी,

    माँग मत, माँग मत, माँग मत,

    अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।

    तू न थकेगा कभी,

    तू न रुकेगा कभी,

    तू न मुड़ेगा कभी,

    कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,

    अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।

    यह महान दृश्य है,

    चल रहा मनुष्य है,

    अश्रु श्वेद रक्त से,

    लथपथ लथपथ लथपथ,

    अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।


    3 min
  • Teri Yaad Aati Hai - Kumar Vishwas

    Listen in to a recitation of the famous poem “Teri Yaad Aati Hai” by Kumar Vishwas.

    Lyrics in Hindi:


    हर एक खोने हर एक पाने में तेरी याद आती है
    नमक आँखों में घुल जाने में तेरी याद आती है
    तेरी अमृत भरी लहरों को क्या मालूम गंगा माँ
    समंदर पार वीराने में तेरी याद आती है

    हर एक खाली पड़े आलिन्द तेरी याद आती है
    सुबह के ख्वाब के मानिंद तेरी याद आती है
    हेलो, हे, हाय! सुन के तो नहीं आती मगर हमसे
    कोई कहता है जब “जय हिंद” तेरी याद आती है

    कोई देखे जनम पत्री तो तेरी याद आती है
    कोई व्रत रख ले सावित्री तो तेरी याद आती है
    अचानक मुश्किलों में हाथ जोड़े आँख मूंदे जब
    कोई गाता हो गायत्री तो तेरी याद आती है

    सुझाये माँ जो मुहूर्त तो तेरी याद आती है
    हँसे जब बुद्ध की मूरत तो तेरी याद आती है
    कहीं डॉलर के पीछे छिप गए भारत के नोटों पर
    दिखे गाँधी की जो सूरत तो तेरी याद आती है

    अगर मौसम हो मनभावन तो तेरी याद आती है
    झरे मेघों से गर सावन तो तेरी याद आती है
    कहीं रहमान की जय हो को सुन कर गर्व के आंसू
    करें आँखों को जब पावन तो तेरी याद आती है



    4 min
  • Chand Ka Kurta - Ramdhari Singh Dinkar

    Listen in to a recitation of the famous poem “Chand Ka Kurta” by Ramdhari Singh Dinkar.

    Lyrics in Hindi:


    हठ कर बैठा चांद एक दिन माता से यह बोला
    सिलवा दो मां मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला

    सन सन चलती हवा रात भर जाड़े में मरता हूं

    ठिठुर ठिठुर कर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूं

    आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का

    न हो अगर तो ला दो मुझको कुर्ता ही भाड़े का

    बच्चे की सुन बात कहा माता ने अरे सलोने

    कुशल करे भगवान लगे मत तुझको जादू टोने

    जाड़े की तो बात ठीक है पर मैं तो डरती हूं

    एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूं

    कभी एक अंगुल भर चौड़ा कभी एक फुट मोटा

    बड़ा किसी दिन हो जाता है और किसी दिन छोटा

    घटता बढ़ता रोज किसी दिन ऐसा भी करता है

    नहीं किसी की भी आंखों को दिखलाई पड़ता है

    अब तू ही यह बता नाप तेरा किस रोज लिवायें?

    सी दें एक झिंगोला जो हर रोज बदन में आये?


    3 min
  • Main Bhav Suchi Un Bhavo Ki - Kumar Vishwas

    Listen in to a recitation of the famous poem “Main Bhav Suchi Un Bhavo Ki” by Kumar Vishwas.

    Lyrics in Hindi:

    में भाव सूची उन भावों की, जो बिके सदा ही बिन तोले

    तन्‍हाई हूं हर उस खत की, जो पढा गया है बिन खोले
    हर आंसू को हर पत्‍थर तक पहुंचाने की लाचार हूक,
    में सहज अर्थ उन शब्‍दों का जो सुने गये हैं बिन बोले
    जो कभी नहीं बरसा खुलकर हर उस बादल का पानी हूं
    लव कुश की पीर बिना गाई सीता की रामकहानी हूं

    जिनके सपनों के ताजमहल, बनने से पहले टूट गये
    जिन हाथों में दो हाथ कभी आने से पहले छूट गये
    धरती पर जिनके खोने और पाने की अजब कहानी है
    किस्‍मत की देवी मान गयी पर प्रणय देवता रूठ गये
    में मैली चादर वाले उस कबिरा की अम़तवाणी हूं
    लव कुश की पीर बिना गाई सीता की रामकहानी हूं

    कुछ कहते हैं में सीखा हूं अपने जख्‍मों को खुद सींकर
    कुछ जान गये में हंसता हूं भीतर भीतर आंसू पीकर
    कुछ कहते हैं में हूं बिरोध से उपजी एक खुददार विजय
    कुछ कहते में रचता हूं खुद में मरकर खुद में जीकर
    लेकिन हर चतुराई की सोची समझी नादानी हूं
    लव कुश की पीर बिना गाई सीता की रामकहानी हूं


    4 min
  • Shakti Aur Kshama - Ramdhari Singh Dinkar

    Listen in to a recitation of the famous poem “Shakti Aur Kshama” by Ramdhari Singh Dinkar.

    Lyrics in Hindi:

    क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल

    सबका लिया सहारा
    पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे
    कहो, कहाँ, कब हारा?

    क्षमाशील हो रिपु-समक्ष
    तुम हुये विनत जितना ही
    दुष्ट कौरवों ने तुमको
    कायर समझा उतना ही।

    अत्याचार सहन करने का
    कुफल यही होता है
    पौरुष का आतंक मनुज
    कोमल होकर खोता है।

    क्षमा शोभती उस भुजंग को
    जिसके पास गरल हो
    उसको क्या जो दंतहीन
    विषरहित, विनीत, सरल हो।

    तीन दिवस तक पंथ मांगते
    रघुपति सिन्धु किनारे,
    बैठे पढ़ते रहे छन्द
    अनुनय के प्यारे-प्यारे।

    उत्तर में जब एक नाद भी
    उठा नहीं सागर से
    उठी अधीर धधक पौरुष की
    आग राम के शर से।

    सिन्धु देह धर त्राहि-त्राहि
    करता आ गिरा शरण में
    चरण पूज दासता ग्रहण की
    बँधा मूढ़ बन्धन में।

    सच पूछो, तो शर में ही
    बसती है दीप्ति विनय की
    सन्धि-वचन संपूज्य उसी का
    जिसमें शक्ति विजय की।

    सहनशीलता, क्षमा, दया को
    तभी पूजता जग है
    बल का दर्प चमकता उसके
    पीछे जब जगमग है।


    3 min
  • Main Tumhe Dhundhne - Kumar Vishwas

    Listen in to a recitation of the famous poem “Main Tumhe Dhundhne” by Kumar Vishwas.

    Lyrics in Hindi:

    मैं तुम्हें ढूँढने स्वर्ग के द्वार तक

    रोज आता रहा, रोज जाता रहा
    तुम ग़ज़ल बन गई, गीत में ढल गई
    मंच से में तुम्हें गुनगुनाता रहा

    जिन्दगी के सभी रास्ते एक थे
    सबकी मंजिल तुम्हारे चयन तक गई
    अप्रकाशित रहे पीर के उपनिषद्
    मन की गोपन कथाएँ नयन तक रहीं
    प्राण के पृष्ठ पर गीत की अल्पना
    तुम मिटाती रही मैं बनाता रहा
    तुम ग़ज़ल बन गई, गीत में ढल गई
    मंच से में तुम्हें गुनगुनाता रहा

    एक खामोश हलचल बनी जिन्दगी
    गहरा ठहरा जल बनी जिन्दगी
    तुम बिना जैसे महलों में बीता हुआ
    उर्मिला का कोई पल बनी जिन्दगी
    दृष्टि आकाश में आस का एक दिया
    तुम बुझती रही, मैं जलाता रहा
    तुम ग़ज़ल बन गई, गीत में ढल गई
    मंच से में तुम्हें गुनगुनाता रहा

    तुम चली गई तो मन अकेला हुआ
    सारी यादों का पुरजोर मेला हुआ
    कब भी लौटी नई खुशबुओं में सजी
    मन भी बेला हुआ तन भी बेला हुआ
    खुद के आघात पर व्यर्थ की बात पर
    रूठती तुम रही मैं मानता रहा
    तुम ग़ज़ल बन गई, गीत में ढल गई
    मंच से में तुम्हें गुनगुनाता रहा
    मैं तुम्हें ढूँढने स्वर्ग के द्वार तक
    रोज आता रहा, रोज जाता रहा

    4 min
  • Jo Tum Aa Jaate Ek Baar - Mahadevi Verma

    Listen in to a recitation of the famous poem “Jo Tum Aa Jaate Ek Baar” by Mahadevi Verma.

    Lyrics in Hindi:


    जो तुम आ जाते एक बार
    कितनी करुणा कितने सँदेश,
    पथ में बिछ जाते बन पराग,
    गाता प्राणों का तार-तार
    अनुराग-भरा उन्माद-राग;
    आँसू लेते वे पद पखार !
    जो तुम आ जाते एक बार !

    हँस उठते पल में आर्द्र नयन
    घुल जाता ओठों से विषाद,
    छा जाता जीवन में वसंत
    लुट जाता चिर-संचित विराग;
    आँखें देतीं सर्वस्व वार |
    जो तुम आ जाते एक बार !

    3 min
  • Veer Tum Badhe Chalo - Dwarika Prasad Maheshwari

    Listen in to a recitation of the famous poem “Veer Tum Badhe Chalo” by Dwarika Prasad Maheshwari.

    Lyrics in Hindi:

    वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !


    हाथ में ध्वजा रहे बाल दल सजा रहे
    ध्वज कभी झुके नहीं दल कभी रुके नहीं
    वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !

    सामने पहाड़ हो सिंह की दहाड़ हो
    तुम निडर डरो नहीं तुम निडर डटो वहीं
    वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !

    प्रात हो कि रात हो संग हो न साथ हो
    सूर्य से बढ़े चलो चन्द्र से बढ़े चलो
    वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !

    एक ध्वज लिये हुए एक प्रण किये हुए
    मातृ भूमि के लिये पितृ भूमि के लिये
    वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !

    अन्न भूमि में भरा वारि भूमि में भरा
    यत्न कर निकाल लो रत्न भर निकाल लो
    वीर तुम बढ़े चलो ! धीर तुम बढ़े चलो !

    3 min
  • Aaj Sadko Par Likhe Hain Saikdo Naare Na Dekh - Dushyant Kumar

    Listen in to a recitation of the famous poem “Aaj Sadko Par Likhe Hain Saikdo Naare Na Dekh” by Dushyant Kumar.

    Lyrics in Hindi:

    आज सड़कों पर लिखे हैं सैकड़ों नारे न देख,

    पर अन्धेरा देख तू आकाश के तारे न देख।

    एक दरिया है यहां पर दूर तक फैला हुआ,
    आज अपने बाज़ुओं को देख पतवारें न देख।

    अब यकीनन ठोस है धरती हक़ीक़त की तरह,
    यह हक़ीक़त देख लेकिन ख़ौफ़ के मारे न देख।

    वे सहारे भी नहीं अब जंग लड़नी है तुझे,
    कट चुके जो हाथ उन हाथों में तलवारें न देख।

    ये धुन्धलका है नज़र का तू महज़ मायूस है,
    रोजनों को देख दीवारों में दीवारें न देख।

    राख़ कितनी राख़ है, चारों तरफ बिख़री हुई,
    राख़ में चिनगारियां ही देख अंगारे न देख।

    3 min

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