Kavita Path

Kavita Path

Download on the App Store

Kavita Path episodes

  • Itni Rang Birangi Duniya - Kumar Vishwas

    Listen in to a recitation of the famous poem “Itni Rang Birangi Duniya” by Kumar Vishwas.

    Lyrics in Hindi:


    इतनी रंग बिरंगी दुनिया, दो आँखों में कैसे आये,
    हमसे पूछो इतने अनुभव, एक कंठ से कैसे गाये.
    ऐसे उजले लोग मिले जो, अंदर से बेहद काले थे,
    ऐसे चतुर मिले जो मन से सहज सरल भोले-भाले थे.

    ऐसे धनी मिले जो, कंगालो से भी ज्यादा रीते थे,

    ऐसे मिले फकीर, जो, सोने के घट में पानी पीते थे.
    मिले परायेपन से अपने, अपनेपन से मिले पराये,
    हमसे पूछो इतने अनुभव, एक कंठ से कैसे गाये.
    इतनी रंग बिरंगी दुनिया, दो आँखों में कैसे आये.

    जिनको जगत-विजेता समझा, मन के द्वारे हारे निकले,

    जो हारे-हारे लगते थे, अंदर से ध्रुव- तारे निकले.
    जिनको पतवारे सौंपी थी, वे भँवरो के सूदखोर थे,
    जिनको भँवर समझ डरता था, आखिर वही किनारे निकले.
    वो मंजिल तक क्या पहँुचे, जिनको रास्ता खुद भटकाए

    हमसे पूछो इतने अनुभव, एक कंठ से कैसे गाये,

    इतनी रंग बिरंगी दुनिया, दो आँखों में कैसे आये.

    4 min
  • Kaun? - Balswaroop Raahi

    Listen in to a recitation of the famous poem “Kaun?” by Balswaroop Raahi.

    Lyrics in Hindi:


    अगर ना होता चाँद रात में,
    हमको दिशा दिखलाता कौन?

    अगर ना होता सूरज दिन को,

    सोने सा चमकाता कौन?

    अगर ना होती निर्मल नदियाँ,

    जग की प्यास बुझाता कौन?

    अगर ना होते पर्वत मीठे,

    झरने भला बहाता कौन?

    अगर ना होते पेड़ भला फिर,

    हरियाली फैलता कौन?

    अगर ना होते फूल बताओ,

    खिल खिल कर मुस्काता कौन?

    अगर ना होते बादल नभ में,

    इंद्रधनुष रच पाता कौन?

    अगर ना होते हम तो बोलो,

    ये सब प्रश्न उठाता कौन?

    3 min
  • Geet Naya Gata Hun - Atal Bihari Vajpayee

    Listen in to a recitation of the famous poem “Jo Beet Gayi So Baat Gayi” by Atal Bihari Vajpayee.

    Lyrics in Hindi:


    दो अनुभूतियां

    -पहली अनुभूति

    बेनकाब चेहरे हैं, दाग बड़े गहरे हैं 

    टूटता तिलिस्म आज सच से भय खाता हूं
    गीत नहीं गाता हूं

    लगी कुछ ऐसी नज़र बिखरा शीशे सा शहर

    अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूं
    गीत नहीं गाता हूं

    पीठ मे छुरी सा चांद, राहू गया रेखा फांद

    मुक्ति के क्षणों में बार बार बंध जाता हूं
    गीत नहीं गाता हूं

    -दूसरी अनुभूति

    गीत नया गाता हूं

    टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर

    पत्थर की छाती मे उग आया नव अंकुर
    झरे सब पीले पात कोयल की कुहुक रात

    प्राची मे अरुणिम की रेख देख पता हूं

    गीत नया गाता हूं

    टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी

    अन्तर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी
    हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा,

    काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं

    गीत नया गाता हूं

    4 min
  • Jo Beet Gayi So Baat Gayi - Harivansh Rai Bachchan

    Listen in to a recitation of the famous poem “Jo Beet Gayi So Baat Gayi” by Harivansh Rai Bachchan.

    Lyrics in Hindi:


    जो बीत गई सो बात गई

    जीवन में एक सितारा था
    माना वह बेहद प्यारा था
    वह डूब गया तो डूब गया
    अम्बर के आनन को देखो
    कितने इसके तारे टूटे
    कितने इसके प्यारे छूटे
    जो छूट गए फिर कहाँ मिले
    पर बोलो टूटे तारों पर
    कब अम्बर शोक मनाता है
    जो बीत गई सो बात गई

    जीवन में वह था एक कुसुम
    थे उसपर नित्य निछावर तुम
    वह सूख गया तो सूख गया
    मधुवन की छाती को देखो
    सूखी कितनी इसकी कलियाँ
    मुर्झाई कितनी वल्लरियाँ
    जो मुर्झाई फिर कहाँ खिली
    पर बोलो सूखे फूलों पर
    कब मधुवन शोर मचाता है
    जो बीत गई सो बात गई

    जीवन में मधु का प्याला था

    तुमने तन मन दे डाला था
    वह टूट गया तो टूट गया
    मदिरालय का आँगन देखो
    कितने प्याले हिल जाते हैं
    गिर मिट्टी में मिल जाते हैं
    जो गिरते हैं कब उठतें हैं
    पर बोलो टूटे प्यालों पर
    कब मदिरालय पछताता है
    जो बीत गई सो बात गई

    मृदु मिटटी के हैं बने हुए

    मधु घट फूटा ही करते हैं
    लघु जीवन लेकर आए हैं
    प्याले टूटा ही करते हैं
    फिर भी मदिरालय के अन्दर
    मधु के घट हैं मधु प्याले हैं
    जो मादकता के मारे हैं
    वे मधु लूटा ही करते हैं
    वह कच्चा पीने वाला है
    जिसकी ममता घट प्यालों पर
    जो सच्चे मधु से जला हुआ
    कब रोता है चिल्लाता है
    जो बीत गई सो बात गई।।

    4 min
  • Ho Gayi Hai Peer Parvat Si - Dushyant Kumar

    Listen in to a recitation of the famous poem “Ho Gayi Hai Peer Parvat Si” by Dushyant Kumar.

    Lyrics in Hindi:

    हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,

    इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

    आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
    शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।

    हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
    हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।

    सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
    सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

    मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
    हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।

    3 min
  • Koi Deewana Kehta Hai - Kumar Vishwas
    Listen in to a recitation of the famous poem “Koi Deewana Kehta Hai” by Kumar Vishwas.
    Lyrics in Hindi:
    कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !
    मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!
    मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !
    ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!
    मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है !
    कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!
    यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !
    जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!
    समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नही सकता !
    यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता !!
    मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले !
    जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता !!
    भ्रमर कोई कुमुदुनी पर मचल बैठा तो हंगामा!
    हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा!!
    अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का!
    मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा!!
    4 min

About Kavita Path

From the publisher's feed

Poems from well known Hindi poets recited for your listening pleasure.