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Itni Rang Birangi Duniya - Kumar Vishwas


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Listen in to a recitation of the famous poem “Itni Rang Birangi Duniya” by Kumar Vishwas.

Lyrics in Hindi:


इतनी रंग बिरंगी दुनिया, दो आँखों में कैसे आये,
हमसे पूछो इतने अनुभव, एक कंठ से कैसे गाये.
ऐसे उजले लोग मिले जो, अंदर से बेहद काले थे,
ऐसे चतुर मिले जो मन से सहज सरल भोले-भाले थे.

ऐसे धनी मिले जो, कंगालो से भी ज्यादा रीते थे,

ऐसे मिले फकीर, जो, सोने के घट में पानी पीते थे.
मिले परायेपन से अपने, अपनेपन से मिले पराये,
हमसे पूछो इतने अनुभव, एक कंठ से कैसे गाये.
इतनी रंग बिरंगी दुनिया, दो आँखों में कैसे आये.

जिनको जगत-विजेता समझा, मन के द्वारे हारे निकले,

जो हारे-हारे लगते थे, अंदर से ध्रुव- तारे निकले.
जिनको पतवारे सौंपी थी, वे भँवरो के सूदखोर थे,
जिनको भँवर समझ डरता था, आखिर वही किनारे निकले.
वो मंजिल तक क्या पहँुचे, जिनको रास्ता खुद भटकाए

हमसे पूछो इतने अनुभव, एक कंठ से कैसे गाये,

इतनी रंग बिरंगी दुनिया, दो आँखों में कैसे आये.

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Kavita PathBy aks