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  • Kagazon Mein Hai Salamat Ab Bhi Naksha Gaon Ka - Devmani Pandey

    Listen in to a recitation of "Kagazon Mein Hai Salamat Ab Bhi Naksha Gaon Ka" written by Devmani Pandey.

    Lyrics in Hindi:


    काग़ज़ों में है सलामत अब भी नक़्शा गाँव का।
    पर नज़र आता नहीं पीपल पुराना गाँव का।

    बूढ़ीं आँखें मुंतज़िर हैं पर वो आख़िर क्या करें
    नौजवाँ तो भूल ही बैठे हैं रस्ता गाँव का।

    पहले कितने ही परिन्दे आते थे परदेस से
    अब नहीं भाता किसी को आशियाना गाँव का।

    छोड़ आए थे जो बचपन फिर नज़र आया नहीं
    हमने यारो छान मारा चप्पा-चप्पा गाँव का।

    हो गईं वीरान गलियाँ, खो गई सब रौनक़ें
    तीरगी में खो गया सारा उजाला गाँव का।

    वक़्त ने क्या दिन दिखाए चन्द पैसों के लिए
    बन गया मज़दूर इक छोटा-सा बच्चा गाँव का।

    सुख में, दुख में, धूप में जो सर पे आता था नज़र
    गुम हुआ जाने कहाँ वो लाल गमछा गाँव का।

    हर तरफ़ फैली हुई है बेकसी की तेज़ धूप
    सब के सर से उठ गया है जैसे साया गाँव का।

    जो गए परदेस उसको छोड़कर दालान में
    राह उनकी देखता है अब बिछौना गाँव का।

    शाम को चौपाल में क्या गूँजते थे क़हक़हे
    सिर्फ़ यादों में बचा है वो फ़साना गाँव का।

    हाल इक-दूजे का कोई पूछने वाला नहीं
    क्या पता अगले बरस क्या हाल होगा गाँव का।

    सोच में डूबे हुए हैं गाँव के बूढ़े दरख़्त
    वाक़ई क्या लुट गया है कुल असासा गाँव का।

    4 min
  • Covid - Harjeet Singh Tuktuk

    Listen in to a recitation of "Covid" written by Harjeet Singh Tuktuk.

    Lyrics in Hindi:

    हमारा तो निकल गया रोना।

    जब पता चला कि पड़ोसी को हो गया है कोरोना।
    रात के अंधेरे में, सुबह और सवेरे में।
    हम भी आ गए, शक के घेरे में।

    हमने सबको यक़ीन दिलाया।
    कि हम हैं सोबर और सुशील।
    फिर भी करम जलों ने।
    कर दिया हमारा घर सील।

    हम इस बात से थे दुखी।
    तभी पत्नी पास आके रुकी।
    बोली घर में खतम हो गया हैं राशन।
    हमने कहा देवी बंद करो यह भाषण।

    पत्नी को नहीं पसंद आया हमारा टोन।
    उठा के तोड़ दिया हमारा मोबाइल फ़ोन।
    ग़ुस्से में उसका चेहरा हो गया लाल पीला।
    पता नहीं, ग़रीबी में ही क्यों होता है आटा गीला।

    अब हमें पत्नी के हुक्म का पालन करना था।
    घर के लिए राशन का इंतज़ाम करना था।
    हमने अपनी इज्जत खूँटी पे टांगी।
    खिड़की से चिल्ला चिल्ला के सबसे मदद माँगी।
    कोई नहीं आया।

    जो भी कहते थे कि हम भगवान के दूत हैं।
    बिना देखे ऐसे निकल गए जैसे हम कोई भूत हैं।
    आख़िर एक बूढ़ा चौक़ीदार आया।
    उसने घर के बाहर एक बोर्ड लगाया।

    बोर्ड पे लिखा था,
    साहब वैसे तो जेंटल हैं।
    लॉकडाउन में हो गए मेंटल हैं।
    इफ़ यू हीयर शोर,प्लीज़ इग्नोर।

    हमने कहा,
    भैया, आ रहा है मज़ा।
    दूसरे के कर्मों की हमको दे के सजा।

    वो बोला बाबूजी,
    लाखों रोज़गार छोड़ कर चले गए घर।
    हज़ारों बिना इलाज के कर रहे हैं suffer।
    सैकड़ों रोज़ करते हैं भूख से लड़ाई।

    वो सब भी इसी बात की दे रहे हैं दुहाई।
    आख़िर किसकी गलती की सजा हमने है पाई।

    बुरा मत मानिएगा,
    बात सच्ची है, कड़वी लग सकती है।
    पर किसी की गलती की सजा
    किसी को भी मिल सकती है।

    वैसे आपकी बताने आया था विद स्माइल।
    आपके पड़ोसी की बदल गयी थी फ़ाइल।
    हमने भगवान को लाख लाख धन्यवाद दिया।
    और कविता का अंत कुछ इस तरह से किया।

    पड़ोसी तो लग के आ गया
    हॉस्पिटल की लाइन में।
    हम अभी भी चल रहे हैं
    क्वॉरंटाइन में।

    5 min
  • Moko Kahan Dhunde Tu Bande - Kabir Das

    Listen in to a recitation of "Moko Kahan Dhunde Tu Bande" written by Kabir Das.

    Lyrics in Hindi:


    मोको कहां ढूढें तू बंदे मैं तो तेरे पास मे ।

    ना मैं बकरी ना मैं भेडी ना मैं छुरी गंडास मे ।
    नही खाल में नही पूंछ में ना हड्डी ना मांस मे ॥

    ना मै देवल ना मै मसजिद ना काबे कैलाश मे ।
    ना तो कोनी क्रिया-कर्म मे नही जोग-बैराग मे ॥

    खोजी होय तुरंतै मिलिहौं पल भर की तलास मे
    मै तो रहौं सहर के बाहर मेरी पुरी मवास मे

    कहै कबीर सुनो भाई साधो सब सांसो की सांस मे ॥

    3 min
  • Muktak - Kumar Vishwas

    Listen in to a recitation of a "muktak" written by Kumar Vishwas.

    Lyrics in Hindi:


    बस्ती बस्ती घोर उदासी पर्वत पर्वत खालीपन
    मन हीरा बेमोल बिक गया घिस घिस रीता तन चंदन
    इस धरती से उस अम्बर तक दो ही चीज़ गज़ब की है
    एक तो तेरा भोलापन है एक मेरा दीवानापन||1||

    जिसकी धुन पर दुनिया नाचे, दिल एक ऐसा इकतारा है,
    जो हमको भी प्यारा है और, जो तुमको भी प्यारा है.
    झूम रही है सारी दुनिया, जबकि हमारे गीतों पर,
    तब कहती हो प्यार हुआ है, क्या अहसान तुम्हारा है||2||

    जो धरती से अम्बर जोड़े, उसका नाम मोहब्बत है ,
    जो शीशे से पत्थर तोड़े, उसका नाम मोहब्बत है ,
    कतरा कतरा सागर तक तो,जाती है हर उमर मगर ,
    बहता दरिया वापस मोड़े, उसका नाम मोहब्बत है||3||

    बहुत टूटा बहुत बिखरा थपेड़े सह नहीं पाया
    हवाओं के इशारों पर मगर मैं बह नहीं पाया
    रहा है अनसुना और अनकहा ही प्यार का किस्सा
    कभी तुम सुन नहीं पायी कभी मैं कह नहीं पाया||4||

    तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है समझता हूँ
    तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है समझता हूँ
    तुम्हे मैं भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नहीं लेकिन
    तुम्ही को भूलना सबसे ज़रूरी है समझता हूँ||5||

    पनाहों में जो आया हो तो उस पर वार करना क्या
    जो दिल हारा हुआ हो उस पर फिर अधिकार करना क्या
    मुहब्बत का मज़ा तो डूबने की कश्मकश में है
    हो गर मालूम गहराई तो दरिया पार करना क्या||6||

    समन्दर पीर का अन्दर है लेकिन रो नहीं सकता
    ये आँसू प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता
    मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
    जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता||7||

    पुकारे आँख में चढ़कर तो खू को खू समझता है,
    अँधेरा किसको को कहते हैं ये बस जुगनू समझता है,
    हमें तो चाँद तारों में भी तेरा रूप दिखता है,
    मोहब्बत में नुमाइश को अदाएं तू समझता है||8||

    गिरेबां चाक करना क्या है, सीना और मुश्किल है,
    हर एक पल मुस्काराकर अश्क पीना और मुश्किल है
    हमारी बदनसीबी ने हमें इतना सिखाया है,
    किसी के इश्क में मरने से जीना और मुश्किल है||9||

    मेरा अपना तजुर्बा है तुम्हें बतला रहा हूँ मैं
    कोई लब छू गया था तब अभी तक गा रहा हूँ मैं
    फिराके यार में कैसे जिया जाये बिना तड़पे
    जो मैं खुद ही नहीं समझा वही समझा रहा हूँ मैं||10||

    किसी पत्थर में मूरत है कोई पत्थर की मूरत है
    लो हमने देख ली दुनिया जो इतनी ख़ूबसूरत है
    ज़माना अपनी समझे पर मुझे अपनी खबर ये है
    तुम्हें मेरी जरूरत है मुझे तेरी जरूरत है||11||


    6 min
  • Waqt - Vikram Singh Rawat

    Listen in to a recitation of the famous poem “Waqt” by Vikram Singh Rawat.

    Lyrics in Hindi:


    ज़िन्दगी में कुछ भी कभी हरपल नहीं रहता

    जो आज साथ होता है तुम्हारे वो कल नहीं रहता।

    मैं फ़िज़ूल रोया करता था लम्हों पे दशको पे

    समझ आया अब की वक़्त खुद भी सदा प्रबल नहीं रहता।

    मरते हैं इसके भी पल जो बहते हैं इसकी धाराओ में

    सदा को ठहरा हुआ कोई भी इसका पल नहीं रहता।

    जीवनचक्र निरंतर है, मत कोस तू अपनी किस्मत को

    इस दौर में ये दरिया किसी के लिये कल-कल नहीं बहता।

    तुम्हे पता ही नहीं वक्त का दूसरा नाम ही जिंदगी है

    यूँहीं तुम कहतें हो तुम्हारे पास ये किसीपल नहीं रहता।

    इस दूध की धारा को मैंने पूजा भी दिए भी सिराये

    पर जब से सागर में मिला फिर वो गंगाजल नहीं रहता।

    कितना लालची हूँ की जिसके सजदे किये नवाज़ा भी

    वो जिस दिन खारा हुआ ठोकरों के भी काबिल नहीं रहता।

    ज़िन्दगी केवल मौत से मौत के सफ़र का नाम है

    और बंजारों का कोर्इ् ठौर—ठिकाना ऊम्रभर नहीं रहता।

    तू हाथों की लकीरों पे चला तो नदी जैसा भटकता रहा

    तूने खुद को कभी नहीं खोजा तभी तू सफल नहीं रहता।

    और तू मुझे मसीहा मत समझ मैं खुद विफल हूँ हालातों से

    हाँ मगर हौंसला अब तक नहीं हरा वर्ना ये ग़ज़ल नहीं कहता।

    ॥ज़िन्दगी में कुछ भी कभी हरपल नहीं रहता॥

    ॥जो आज साथ होता है तुम्हारे वो कल नहीं रहता॥


    4 min
  • Aaj Phir Se - Harivansh Rai Bachchan

    Listen in to a recitation of the famous poem “Aaj Phir Se” by Harivansh Rai Bachchan.

    Lyrics in Hindi:

    आज फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ ।

    है कंहा वह आग जो मुझको जलाए,

    है कंहा वह ज्वाल पास मेरे आए,

    रागिनी, तुम आज दीपक राग गाओ;

    आज फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ ।

    तुम नई आभा नहीं मुझमें भरोगी,

    नव विभा में स्नान तुम भी तो करोगी,

    आज तुम मुझको जगाकर जगमगाओ;

    आज फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ ।

    मैं तपोमय ज्योती की, पर, प्यास मुझको,

    है प्रणय की शक्ति पर विश्वास मुझको,

    स्नेह की दो बूंदे भी तो तुम गिराओ;

    आज फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ ।

    कल तिमिर को भेद मैं आगे बढूंगा,

    कल प्रलय की आंधियों से मैं लडूंगा,

    किन्तु आज मुझको आंचल से बचाओ;

    आज फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ ।


    3 min
  • Aao Phir Se Diya Jalaye - Atal Bihari Vajpayee

    Listen in to a recitation of the famous poem “Aao Phir Se Diya Jalaye” by Atal Bihari Vajpayee.

    Lyrics in Hindi:


    आओ फिर से दिया जलाएँ
    भरी दुपहरी में अँधियारा
    सूरज परछाई से हारा
    अंतरतम का नेह निचोड़ें-
    बुझी हुई बाती सुलगाएँ।
    आओ फिर से दिया जलाएँ

    हम पड़ाव को समझे मंज़िल
    लक्ष्य हुआ आँखों से ओझल
    वर्त्तमान के मोहजाल में-
    आने वाला कल न भुलाएँ।
    आओ फिर से दिया जलाएँ।

    आहुति बाकी यज्ञ अधूरा
    अपनों के विघ्नों ने घेरा
    अंतिम जय का वज़्र बनाने-
    नव दधीचि हड्डियाँ गलाएँ।
    आओ फिर से दिया जलाएँ


    3 min
  • Jagmag Jagmag - Sohan Lal Dwivedi

    Listen in to a recitation of the famous poem “Jagmag Jagmag” by Sohan Lal Dwivedi.

    Lyrics in Hindi:


    हर घर, हर दर, बाहर, भीतर,
    नीचे ऊपर, हर जगह सुघर,
    कैसी उजियाली है पग-पग?
    जगमग जगमग जगमग जगमग!

    छज्जों में, छत में, आले में,
    तुलसी के नन्हें थाले में,
    यह कौन रहा है दृग को ठग?
    जगमग जगमग जगमग जगमग!

    पर्वत में, नदियों, नहरों में,
    प्यारी प्यारी सी लहरों में,
    तैरते दीप कैसे भग-भग!
    जगमग जगमग जगमग जगमग!

    राजा के घर, कंगले के घर,
    हैं वही दीप सुंदर सुंदर!
    दीवाली की श्री है पग-पग,
    जगमग जगमग जगमग जगमग!

    3 min
  • Bansuri Chali Aao - Kumar Vishwas

    Listen in to a recitation of the famous poem “Bansuri Chali Aao” by Kumar Vishwas.

    Lyrics in Hindi:


    तुम अगर नहीं आई गीत गा न पाऊँगा
    साँस साथ छोडेगी, सुर सजा न पाऊँगा
    तान भावना की है शब्द-शब्द दर्पण है
    बाँसुरी चली आओ, होंठ का निमंत्रण है

    तुम बिना हथेली की हर लकीर प्यासी है
    तीर पार कान्हा से दूर राधिका-सी है
    रात की उदासी को याद संग खेला है
    कुछ गलत ना कर बैठें मन बहुत अकेला है
    औषधि चली आओ चोट का निमंत्रण है
    बाँसुरी चली आओ, होंठ का निमंत्रण है

    तुम अलग हुई मुझसे साँस की ख़ताओं से
    भूख की दलीलों से वक्त की सज़ाओं से
    दूरियों को मालूम है दर्द कैसे सहना है
    आँख लाख चाहे पर होंठ से न कहना है
    कंचना कसौटी को खोट का निमंत्रण है
    बाँसुरी चली आओ, होंठ का निमंत्रण है


    3 min
  • Yun Hi Kuch Muskakar Tumne - Trilochan

    Listen in to a recitation of the famous poem “Yun Hi Kuch Muskakar Tumne” by Trilochan.

    Lyrics in Hindi:


    यूँ ही कुछ मुस्काकर तुमने
    परिचय की वो गाँठ लगा दी !

    था पथ पर मैं भूला-भूला
    फूल उपेक्षित कोई फूला
    जाने कौन लहर थी उस दिन
    तुमने अपनी याद जगा दी ।

    कभी कभी यूँ हो जाता है
    गीत कहीं कोई गाता है
    गूँज किसी उर में उठती है
    तुमने वही धार उमगा दी ।

    जड़ता है जीवन की पीड़ा
    निस्-तरँग पाषाणी क्रीड़ा
    तुमने अन्जाने वह पीड़ा
    छवि के शर से दूर भगा दी ।


    3 min

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