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November 03, 2021Yun Hi Kuch Muskakar Tumne - Trilochan2 minutesPlayListen in to a recitation of the famous poem “Yun Hi Kuch Muskakar Tumne” by Trilochan.Lyrics in Hindi:यूँ ही कुछ मुस्काकर तुमनेपरिचय की वो गाँठ लगा दी !था पथ पर मैं भूला-भूलाफूल उपेक्षित कोई फूलाजाने कौन लहर थी उस दिनतुमने अपनी याद जगा दी ।कभी कभी यूँ हो जाता हैगीत कहीं कोई गाता हैगूँज किसी उर में उठती हैतुमने वही धार उमगा दी ।जड़ता है जीवन की पीड़ानिस्-तरँग पाषाणी क्रीड़ातुमने अन्जाने वह पीड़ाछवि के शर से दूर भगा दी ।...moreShareView all episodesBy aksNovember 03, 2021Yun Hi Kuch Muskakar Tumne - Trilochan2 minutesPlayListen in to a recitation of the famous poem “Yun Hi Kuch Muskakar Tumne” by Trilochan.Lyrics in Hindi:यूँ ही कुछ मुस्काकर तुमनेपरिचय की वो गाँठ लगा दी !था पथ पर मैं भूला-भूलाफूल उपेक्षित कोई फूलाजाने कौन लहर थी उस दिनतुमने अपनी याद जगा दी ।कभी कभी यूँ हो जाता हैगीत कहीं कोई गाता हैगूँज किसी उर में उठती हैतुमने वही धार उमगा दी ।जड़ता है जीवन की पीड़ानिस्-तरँग पाषाणी क्रीड़ातुमने अन्जाने वह पीड़ाछवि के शर से दूर भगा दी ।...more
Listen in to a recitation of the famous poem “Yun Hi Kuch Muskakar Tumne” by Trilochan.Lyrics in Hindi:यूँ ही कुछ मुस्काकर तुमनेपरिचय की वो गाँठ लगा दी !था पथ पर मैं भूला-भूलाफूल उपेक्षित कोई फूलाजाने कौन लहर थी उस दिनतुमने अपनी याद जगा दी ।कभी कभी यूँ हो जाता हैगीत कहीं कोई गाता हैगूँज किसी उर में उठती हैतुमने वही धार उमगा दी ।जड़ता है जीवन की पीड़ानिस्-तरँग पाषाणी क्रीड़ातुमने अन्जाने वह पीड़ाछवि के शर से दूर भगा दी ।
November 03, 2021Yun Hi Kuch Muskakar Tumne - Trilochan2 minutesPlayListen in to a recitation of the famous poem “Yun Hi Kuch Muskakar Tumne” by Trilochan.Lyrics in Hindi:यूँ ही कुछ मुस्काकर तुमनेपरिचय की वो गाँठ लगा दी !था पथ पर मैं भूला-भूलाफूल उपेक्षित कोई फूलाजाने कौन लहर थी उस दिनतुमने अपनी याद जगा दी ।कभी कभी यूँ हो जाता हैगीत कहीं कोई गाता हैगूँज किसी उर में उठती हैतुमने वही धार उमगा दी ।जड़ता है जीवन की पीड़ानिस्-तरँग पाषाणी क्रीड़ातुमने अन्जाने वह पीड़ाछवि के शर से दूर भगा दी ।...more
Listen in to a recitation of the famous poem “Yun Hi Kuch Muskakar Tumne” by Trilochan.Lyrics in Hindi:यूँ ही कुछ मुस्काकर तुमनेपरिचय की वो गाँठ लगा दी !था पथ पर मैं भूला-भूलाफूल उपेक्षित कोई फूलाजाने कौन लहर थी उस दिनतुमने अपनी याद जगा दी ।कभी कभी यूँ हो जाता हैगीत कहीं कोई गाता हैगूँज किसी उर में उठती हैतुमने वही धार उमगा दी ।जड़ता है जीवन की पीड़ानिस्-तरँग पाषाणी क्रीड़ातुमने अन्जाने वह पीड़ाछवि के शर से दूर भगा दी ।