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Listen in to a recitation of the famous poem “Waqt” by Vikram Singh Rawat.
Lyrics in Hindi:
जो आज साथ होता है तुम्हारे वो कल नहीं रहता।
मैं फ़िज़ूल रोया करता था लम्हों पे दशको पे
समझ आया अब की वक़्त खुद भी सदा प्रबल नहीं रहता।
मरते हैं इसके भी पल जो बहते हैं इसकी धाराओ में
सदा को ठहरा हुआ कोई भी इसका पल नहीं रहता।
जीवनचक्र निरंतर है, मत कोस तू अपनी किस्मत को
इस दौर में ये दरिया किसी के लिये कल-कल नहीं बहता।
तुम्हे पता ही नहीं वक्त का दूसरा नाम ही जिंदगी है
यूँहीं तुम कहतें हो तुम्हारे पास ये किसीपल नहीं रहता।
इस दूध की धारा को मैंने पूजा भी दिए भी सिराये
पर जब से सागर में मिला फिर वो गंगाजल नहीं रहता।
कितना लालची हूँ की जिसके सजदे किये नवाज़ा भी
वो जिस दिन खारा हुआ ठोकरों के भी काबिल नहीं रहता।
ज़िन्दगी केवल मौत से मौत के सफ़र का नाम है
और बंजारों का कोर्इ् ठौर—ठिकाना ऊम्रभर नहीं रहता।
तू हाथों की लकीरों पे चला तो नदी जैसा भटकता रहा
तूने खुद को कभी नहीं खोजा तभी तू सफल नहीं रहता।
और तू मुझे मसीहा मत समझ मैं खुद विफल हूँ हालातों से
हाँ मगर हौंसला अब तक नहीं हरा वर्ना ये ग़ज़ल नहीं कहता।
॥ज़िन्दगी में कुछ भी कभी हरपल नहीं रहता॥
॥जो आज साथ होता है तुम्हारे वो कल नहीं रहता॥
By aksListen in to a recitation of the famous poem “Waqt” by Vikram Singh Rawat.
Lyrics in Hindi:
जो आज साथ होता है तुम्हारे वो कल नहीं रहता।
मैं फ़िज़ूल रोया करता था लम्हों पे दशको पे
समझ आया अब की वक़्त खुद भी सदा प्रबल नहीं रहता।
मरते हैं इसके भी पल जो बहते हैं इसकी धाराओ में
सदा को ठहरा हुआ कोई भी इसका पल नहीं रहता।
जीवनचक्र निरंतर है, मत कोस तू अपनी किस्मत को
इस दौर में ये दरिया किसी के लिये कल-कल नहीं बहता।
तुम्हे पता ही नहीं वक्त का दूसरा नाम ही जिंदगी है
यूँहीं तुम कहतें हो तुम्हारे पास ये किसीपल नहीं रहता।
इस दूध की धारा को मैंने पूजा भी दिए भी सिराये
पर जब से सागर में मिला फिर वो गंगाजल नहीं रहता।
कितना लालची हूँ की जिसके सजदे किये नवाज़ा भी
वो जिस दिन खारा हुआ ठोकरों के भी काबिल नहीं रहता।
ज़िन्दगी केवल मौत से मौत के सफ़र का नाम है
और बंजारों का कोर्इ् ठौर—ठिकाना ऊम्रभर नहीं रहता।
तू हाथों की लकीरों पे चला तो नदी जैसा भटकता रहा
तूने खुद को कभी नहीं खोजा तभी तू सफल नहीं रहता।
और तू मुझे मसीहा मत समझ मैं खुद विफल हूँ हालातों से
हाँ मगर हौंसला अब तक नहीं हरा वर्ना ये ग़ज़ल नहीं कहता।
॥ज़िन्दगी में कुछ भी कभी हरपल नहीं रहता॥
॥जो आज साथ होता है तुम्हारे वो कल नहीं रहता॥