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  • Zindagi Aur Maut Ka Fasana - Aks

    Listen in to a recitation of the poem "Zindagi Aur Maut Ka Fasana" written by Aks.


    Lyrics in Hindi:


    हयात क्या है, हर सांस में मौत का साया है
    सपने अधूरे क्यों, ये राज़ समझ न आया है

    रोज़ जीते हैं मगर ज़िंदगी क्या हासिल है
    सिर्फ़ मौत ने ही हकीकत का आईना दिखाया है

    ज़िंदगी रंगों की महफ़िल है, पर फीके रंग सभी
    बस मौत के रंग ने सच्चा रंग दिखाया है

    उम्मीद जन्म लेती है तो सांसें लेती हैं
    पर मौत ने उम्मीदों को हरदम मिटाया है

    क्या यही जीवन है, दर्द-ओ-ग़म की दास्तां
    गर मौत राहत है तो क्यों जीना सिखाया है

    कर्म के बंधन में कब तक गुनाह का बोझ उठा
    धर्म के बिना क्या मौत ने चैन दिलाया है

    जुस्तजू में उम्र गुज़री, मंज़िल मिली नहीं
    आखिर सफ़र का अंत मौत ने दिखाया है

    पछतावे से भरी जब मौत की गहराई में उतरे
    पूछा उसी ने, क्या खुद को अब तक भुलाया है

    ज़िंदगी की जंग में चैन आखिरी रस्म में
    मौत के बाद क्या जंग को नया मोड़ आया है

    उम्र भर रहे जुदा, दिलों में थी दूरियां
    आख़िर मौत ने ही सबको मिलाया है

    मेरी बेजान आंखों को देख कर बताओ ये
    क्या जीवन का एहसास कहीं लौट आया है

    रूह जब घर छोड़ के चल पड़ी सफ़र पर
    क्या अकेला है सफ़र, या कोई संग आया है

    ज़िंदगी बांटती रही रिश्तों को हमेशा
    सिर्फ़ मौत ने ही सबको फिर एक बनाया है

    ए मौत ज़रा ठहर, अभी थोड़ी मोहलत दे
    तुझसे बचें कब तक, ये सवाल भी आया है

    ज़िंदगी-मौत की सच्चाई का बस इतना फसाना है
    जो आज तक आया, उसे वापस भी जाना है

    6 min
  • Humko Bihari Mat Kehna

    Listen in to a recitation of the poem “Humko Bihari Mat Kehna” by Sahil Kumar.


    Follow him on YouTube - https://www.youtube.com/@sahilkumarpoet

    4 min
  • Ayodhaya Dharm Aur Sanskriti Ki Gatha - Aks

    Listen in to a recitation of the poem "Ayodhaya Dharm Aur Sanskriti Ki Gatha" written by Aks.


    Lyrics in Hindi:


    सुना नहीं शायद तुमने फैसला न्यायालय का,
    राम लला हैं विराजमान, देव भूमि है जन्मस्थान।

    अयोध्या की इस पावन धरा पर,
    इतिहास के पन्नों में मिलता संस्कृति का सार।

    जहां राम की पदचाप से, मिटते सभी अंधकार,
    वहीं उजाला फैला हर घर, हर द्वार।

    न्याय की इस जीत ने जोड़ा हर दिल,
    अयोध्या अब बन गयी है आस्था का गिल।


    धरा पर जहाँ धर्म और आदर्श की ज्योत जली,
    वहां राम की महिमा से बदली हर गली।

    सदियों से जो गूँज रहा था हर हृदय में,
    अब लय मिली, अनुराग मिला, इस अद्भुत छवि में।

    राम के चरणों में जहाँ बसती है संस्कृति,
    उस अयोध्या में है हर रंग, हर ऋतु की सुगंधित वृत्ति।

    समय की धारा में भी, यहाँ अटल है आस्था,
    जहां एकता और प्रेम का, बहता निर्मल वास्ता।


    अयोध्या की इस धरा पर, जहाँ हर दिन है दिवाली,
    राम राज्य की इस भूमि पर, जहाँ प्रेम है अति विशाली।

    इस पावन भूमि की महिमा, अनंत काल तक गूँजे,
    जहां हर भाव, हर कर्म, राम के नाम को दूँजे।

    वहां प्रकृति भी गाती है, रामायण के गीत सुनहरे,
    अयोध्या की इस पावन भूमि पर, जहाँ सदा सत्य के दीप जले।

    अयोध्या, जहां धर्म और इतिहास का, मिलता है संगम,
    जहां हर रंग है राम का, जहां हर ध्वनि में है राम का दम।


    यह अयोध्या की गाथा, जो हृदय में बस जाती है,

    जीवन के हर पथ पर, जो सत्य और धर्म की राह दिखाती है।

    इस गाथा में समाया सभी का प्यार, यहाँ की मिट्टी में है संस्कार,

    सद्भावना और प्रेम का संचार, यही अयोध्या का है आधार।

    4 min
  • Kab Tak Geet Sunau Radha - Kumar Vishwas

    Listen in to a recitation of the poem "Kab Tak Geet Sunau Radha" written by Kumar Vishwas.

    Lyrics in Hindi:

    कब तक गीत सुनाऊं राधा कब तक गीत सुनाऊं

    मथुरा छूटी, छूटी द्वारिका, इंद्रप्रस्थ ठुकराऊं
    बंसी छूटी, गोकुल छूटा, कब तक चक्र उठाऊं
    पिछले जन्म जानकी तुझ बिन जैसे तैसे बीता
    महासमर में रीता रीता, कब तक गाउ गीता
    और अभी कितने जन्मों तक तुझे दूर बिताऊं.... कब तक गीत सुनाऊं राधा कब तक गीत सुनाऊं

    बचपन से प्रभुता का बोजा ढोते कटी जवानी

    हरपल षडयंत्रो में उलझी सांसे आनी जानी
    युगकी आंखे अमृत पीती रही मुझे तक तक कर
    अधर मधुर देखे सबने पर पीड़ा न पहचानी
    इस पीडाको यार सुदामा कबतक महल दिखाऊ' कब तक गीत सुनाऊं राधा कब तक गीत सुनाऊं

    दो माँ ओने लाड लड़ाया, दो चहेरोने चाहा

    फिरभी भरी द्वरिकामे में खुदको लगा पराया
    मेरा क्या अपराध के मेरा गाँव गली घर छूटा
    आँचलसे बिछडेको जग ने पीताम्बर पहनाया
    चाहे जाते जाते भी बंसी मधुर बजाऊ, कब तक गीत सुनाऊं राधा कब तक गीत सुनाऊं

    जग भरके अपराध सदा हीं, अपने शीश उठाये

    रस का माखन समने चाखा, चोर हमी कहलाये
    युगके दुर्योधनके जब जब अहंकार को कुचला
    दुनिया जीती, गांधारी के शाप हमीने खाये
    मुझको गले लगाओ या में ही गले लगाऊ, कब तक गीत सुनाऊं राधा कब तक गीत सुनाऊं

    In this poem, god Krishna is talking to his beloved Radha. He is lamenting the fact that he has to be away from her for so long, and he is asking her how long he has to keep singing songs to her before she will come back to him.

    4 min
  • Kuch Chote Sapno Ke Badle - Kumar Vishwas

    Listen in to a recitation of a "Kuch Chote Sapno Ke Badle" written by Kumar Vishwas.

    Lyrics in Hindi:

    कुछ छोटे सपनो के बदले,
    बड़ी नींद का सौदा करने,
    निकल पडे हैं पांव अभागे,जाने कौन डगर ठहरेंगे !
    वही प्यास के अनगढ़ मोती,
    वही धूप की सुर्ख कहानी,
    वही आंख में घुटकर मरती,
    आंसू की खुद्दार जवानी,
    हर मोहरे की मूक विवशता,चौसर के खाने क्या जाने
    हार जीत तय करती है वे, आज कौन से घर ठहरेंगे
    निकल पडे हैं पांव अभागे,जाने कौन डगर ठहरेंगे !
    कुछ पलकों में बंद चांदनी,
    कुछ होठों में कैद तराने,
    मंजिल के गुमनाम भरोसे,
    सपनो के लाचार बहाने,
    जिनकी जिद के आगे सूरज, मोरपंख से छाया मांगे,
    उन के भी दुर्दम्य इरादे, वीणा के स्वर पर ठहरेंगे
    निकल पडे हैं पांव अभागे,जाने कौन डगर ठहरेंगे

    3 min
  • Woh Aane Wali Hai Ya Aane Wala Hai

    Listen in to a recitation of a poem written for the occasion of baby shower “Woh Aane Wali Hai Ya Aane Wala Hai” by an unknown poet.

    Lyrics in Hindi:


    वो आने वाली है, या आने वाला है।

    ये जल्दी ही पता चल जाने वाला है।

    कोई छोटे छोटे हाथों से,

    हमारा संसार सजाने वाला है।

    बचपन जीने का एक मौका फिर से लाने वाला है।

    उनगली पकड़ कर किसी नए रास्ते ले जाने वाला है।

    बेटा तेरी हर ज़िद का मतलब पूछूंगा,

    तू बाप बनेगा जिस दिन, तुझसे तब पूछूंगा।

    दादाजी का ये कहना अब सच होने वाला है।

    कोई नटखट, नानी का आराम चुराने वाला है।

    और वो जिस ने अपना सब कुछ बंटा आधा आधा है।

    प्यार जिस्का बाकी सबसे, नो महिने ज्यादा है।

    कभी हसने कभी रुलाने, रात जगाने वाला है।

    अभी तो बस शुरवात है, वो खूब नचाने वाला है।

    प्यार उससे रोज रोज बार बार होगा,

    अभी बहुत कुछ बाकी है जो पहली बार होगा।

    उसे अपने पेरों पे चलते देखना,

    उसका मा कहते खुद को पिघलते देखना।

    धेर सारे नए नए एहसास करने वाला है,

    कोई कमरे की छत पर अब तारे लगाने वाला है।

    वो आने वाली है, या आने वाला है।

    ये जल्दी ही पता चल जाने वाला है।

    कोई छोटे छोटे हाथों से,

    हमारा संसार सजाने वाला है।

    3 min
  • Audience Message - Krishna Upadhyay [Bonus Episode]

    Listen in to a recitation of a few lines of the famous poem “Teri Yaad Aati Hai” by Kumar Vishwas.


    This is a voice message contributed by our listener Krishna Upadhyay.

    For the complete recitation of the poem you can listen to our previous episode - Teri Yaad Aati Hai - Kumar Vishwas

    3 min
  • Yeh Kadamb Ka Ped - Subhadra Kumari Chauhan

    Listen in to a recitation of the famous poem “Yeh Kadamb Ka Ped” by Subhadra Kumari Chauhan.

    Lyrics in Hindi:

    यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे।

    मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे॥

    ले देतीं यदि मुझे बांसुरी तुम दो पैसे वाली।
    किसी तरह नीची हो जाती यह कदंब की डाली॥

    तुम्हें नहीं कुछ कहता पर मैं चुपके-चुपके आता।
    उस नीची डाली से अम्मा ऊँचे पर चढ़ जाता॥

    वहीं बैठ फिर बड़े मजे से मैं बांसुरी बजाता।
    अम्मा-अम्मा कह वंशी के स्वर में तुम्हे बुलाता॥

     सुन मेरी बंसी को माँ तुम इतनी खुश हो जाती।
    मुझे देखने काम छोड़ कर तुम बाहर तक आती॥

    तुमको आता देख बांसुरी रख मैं चुप हो जाता।
    पत्तों में छिपकर धीरे से फिर बांसुरी बजाता॥

    गुस्सा होकर मुझे डांटती, कहती "नीचे आजा"।
    पर जब मैं ना उतरता, हंसकर कहती "मुन्ना राजा"॥

    "नीचे उतरो मेरे भैया तुम्हें मिठाई दूंगी।
    नए खिलौने, माखन-मिसरी, दूध मलाई दूंगी"॥

    बहुत बुलाने पर भी माँ जब नहीं उतर कर आता।
    माँ, तब माँ का हृदय तुम्हारा बहुत विकल हो जाता॥

    तुम आँचल फैला कर अम्मां वहीं पेड़ के नीचे।
    ईश्वर से कुछ विनती करतीं बैठी आँखें मीचे॥

    तुम्हें ध्यान में लगी देख मैं धीरे-धीरे आता।
    और तुम्हारे फैले आँचल के नीचे छिप जाता॥

    तुम घबरा कर आँख खोलतीं, पर माँ खुश हो जाती।
    जब अपने मुन्ना राजा को गोदी में ही पातीं॥

    इसी तरह कुछ खेला करते हम-तुम धीरे-धीरे।
    यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे॥

    4 min
  • Kuch Dost Bahut Yaad Aate Hain - Harivansh Rai Bachchan

    Listen in to a recitation of the famous poem “Kuch Dost Bahut Yaad Aate Hain” by Harivansh Rai Bachchan.

    Lyrics in Hindi:

    मै यादों का किस्सा खोलूँ तो,

    कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं

    मै गुजरे पल को सोचूँ  तो,

    कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं

    अब जाने कौन सी नगरी में,

    आबाद हैं जाकर मुद्दत से

    मै देर रात तक जागूँ तो ,

    कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं

    कुछ बातें थीं फूलों जैसी,

    कुछ लहजे खुशबू जैसे थे,

    मै शहर-ए-चमन में टहलूँ तो,

    कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.

    सबकी जिंदगी बदल गयी,

    एक नए सिरे में ढल गयी,

    किसी को नौकरी से फुरसत नही

    किसी को दोस्तों की जरुरत नही

    सारे यार गुम हो गये हैं...

    "तू" से "तुम" और "आप" हो गये है

    मै गुजरे पल को सोचूँ

    तो, कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं

    धीरे धीरे उम्र कट जाती है...

    जीवन यादों की पुस्तक बन जाती है,

    कभी किसी की याद बहुत तड़पाती है

    और कभी यादों के सहारे ज़िन्दगी कट जाती है

    किनारो पे सागर के खजाने नहीं आते,

    फिर जीवन में दोस्त पुराने नहीं आते

    जी लो इन पलों को हस के दोस्त,

    फिर लौट के दोस्ती के जमाने नहीं आते

    3 min
  • Ye Nav Varsh Hame Swikar Nahi - Ramdhari Singh Dinkar

    Listen in to a recitation of the famous poem “Ye Nav Varsh Hame Swikar Nahi” by Ramdhari Singh Dinkar.

    Lyrics in Hindi:

    ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं

    है अपना ये त्यौहार नहीं
    है अपनी ये तो रीत नहीं
    है अपना ये व्यवहार नहीं
    धरा ठिठुरती है सर्दी से
    आकाश में कोहरा गहरा है
    बाग़ बाज़ारों की सरहद पर
    सर्द हवा का पहरा है
    सूना है प्रकृति का आँगन
    कुछ रंग नहीं , उमंग नहीं
    हर कोई है घर में दुबका हुआ
    नव वर्ष का ये कोई ढंग नहीं
    चंद मास अभी इंतज़ार करो
    निज मन में तनिक विचार करो
    नये साल नया कुछ हो तो सही
    क्यों नक़ल में सारी अक्ल बही
    उल्लास मंद है जन -मन का
    आयी है अभी बहार नहीं
    ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं
    है अपना ये त्यौहार नहीं
    ये धुंध कुहासा छंटने दो
    रातों का राज्य सिमटने दो
    प्रकृति का रूप निखरने दो
    फागुन का रंग बिखरने दो
    प्रकृति दुल्हन का रूप धार
    जब स्नेह – सुधा बरसायेगी
    शस्य – श्यामला धरती माता
    घर -घर खुशहाली लायेगी
    तब चैत्र शुक्ल की प्रथम तिथि
    नव वर्ष मनाया जायेगा
    आर्यावर्त की पुण्य भूमि पर
    जय गान सुनाया जायेगा
    युक्ति – प्रमाण से स्वयंसिद्ध
    नव वर्ष हमारा हो प्रसिद्ध
    आर्यों की कीर्ति सदा -सदा
    नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
    अनमोल विरासत के धनिकों को
    चाहिये कोई उधार नहीं
    ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं
    है अपना ये त्यौहार नहीं
    है अपनी ये तो रीत नहीं
    है अपना ये त्यौहार नहीं


    4 min

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