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Chapter FIVE of Think and Grow Rich
अध्याय 5 विशिष्ट ज्ञान "निजी अनुभव व अवलोकन"
ज्ञान दो प्रकार के होते हैं। पहला सामान्य ज्ञान और दूसरा विशिष्ट ज्ञान। सामान्य ज्ञान चाहे जितना भी अधिक हो, सम्पत्ति के संग्रह के मामले में बहुत अधिक उपयोगी नहीं होता है। इन्सान के पास सामान्य ज्ञान के जितने भी रूप हो सकते हैं, सभी बड़े विश्वविद्यालयों में ये सभी रूप पाए जाते हैं। अधिकतर प्रोफेसरों के पास बहुत कम धन होता है। ज्ञान देना उनकी विशिष्टता होती है, लेकन वे इस ज्ञान के संगठन और इसके उपयोग के विशेषज्ञ नही होते। शिक्षा के सभी तंत्रों में मिसिंग लिंक यही है कि शैक्षणिक संस्थाए अपने विद्यार्थियों को यह सिखाने में असफल रहती है कि ज्ञान के हासिल हो जाने के बाद वे अपने ज्ञान को संगठित कैसे करे तथा उसका उपयोग कैसे करें।
Buy Book At- https://amzn.to/3hMHsjQ
www.booksociety.in
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By Anoop KumarChapter FIVE of Think and Grow Rich
अध्याय 5 विशिष्ट ज्ञान "निजी अनुभव व अवलोकन"
ज्ञान दो प्रकार के होते हैं। पहला सामान्य ज्ञान और दूसरा विशिष्ट ज्ञान। सामान्य ज्ञान चाहे जितना भी अधिक हो, सम्पत्ति के संग्रह के मामले में बहुत अधिक उपयोगी नहीं होता है। इन्सान के पास सामान्य ज्ञान के जितने भी रूप हो सकते हैं, सभी बड़े विश्वविद्यालयों में ये सभी रूप पाए जाते हैं। अधिकतर प्रोफेसरों के पास बहुत कम धन होता है। ज्ञान देना उनकी विशिष्टता होती है, लेकन वे इस ज्ञान के संगठन और इसके उपयोग के विशेषज्ञ नही होते। शिक्षा के सभी तंत्रों में मिसिंग लिंक यही है कि शैक्षणिक संस्थाए अपने विद्यार्थियों को यह सिखाने में असफल रहती है कि ज्ञान के हासिल हो जाने के बाद वे अपने ज्ञान को संगठित कैसे करे तथा उसका उपयोग कैसे करें।
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