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Chapter FOUR of Think and Grow Rich
अध्याय-4 आत्मसुझाव "अंतर्मन को प्रभावित करने का एक माध्यम"
हमारी पाँचो ज्ञानेंन्द्रियों के द्वारा मन में जो उत्तेजनाएँ पहुँचती है, जिसके द्वारा हम खुद को प्रशासित करते हैं, वह आत्मसुझाव कहलाता है। दूसरे शब्दों में यह भी कह सकते हैं कि आत्मसुझाव खुद को सुझाव देना होता है। यह अंतर्गमन और तार्किक मन के बीच संचार एजेंसी का काम करता है। आत्मसुझाव सिद्धान्त के द्वारा हम जिन प्रबल विचारों को तार्किक मन में ठहरने की अनुमिति देते हैं (भले ही वे विचार नकारात्मक हो या फिर सकारात्मक), वे विचार अंतर्मन में पहुँच जाते हैं।
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By Anoop KumarChapter FOUR of Think and Grow Rich
अध्याय-4 आत्मसुझाव "अंतर्मन को प्रभावित करने का एक माध्यम"
हमारी पाँचो ज्ञानेंन्द्रियों के द्वारा मन में जो उत्तेजनाएँ पहुँचती है, जिसके द्वारा हम खुद को प्रशासित करते हैं, वह आत्मसुझाव कहलाता है। दूसरे शब्दों में यह भी कह सकते हैं कि आत्मसुझाव खुद को सुझाव देना होता है। यह अंतर्गमन और तार्किक मन के बीच संचार एजेंसी का काम करता है। आत्मसुझाव सिद्धान्त के द्वारा हम जिन प्रबल विचारों को तार्किक मन में ठहरने की अनुमिति देते हैं (भले ही वे विचार नकारात्मक हो या फिर सकारात्मक), वे विचार अंतर्मन में पहुँच जाते हैं।
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