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Chapter SEVEN of Think and Grow Rich
अध्याय-7 सुव्यवस्थिति योजना " इच्छा को कर्म में साकार करना"
इन्सान, जो भी सृजन करता है या हासिल करता है, वह इच्छा के रूप में शुरू होता है। इच्छा ही हमें यात्रा के पहले दौर में ले जाती है, अमूर्त से मूर्त यथार्थ की ओर ले जाती है, कल्पना की वर्कशाप में ले जाती है, जहाँ इस रूपांतरण की योजनाए बनाई जाती हैं और व्यवस्थिति की जाती है।
अध्याय दो में आपको छः निश्चित, व्यवहारिक कदम उठाने के निर्देश दिए गए है ताकि आप धन की इच्छा को इसके भौतिक रूप में रूपानंतरित करने की दिशा में आगे बढ़ सके। इनमें से एक कदम है निश्चित और व्यवहारिक योजनाए बनाना जिनके द्वारा रूपान्तरण किया जा सकता है।
Buy Book At- https://amzn.to/3hMHsjQ
www.booksociety.in
Hindi Audiobooks
By Anoop KumarChapter SEVEN of Think and Grow Rich
अध्याय-7 सुव्यवस्थिति योजना " इच्छा को कर्म में साकार करना"
इन्सान, जो भी सृजन करता है या हासिल करता है, वह इच्छा के रूप में शुरू होता है। इच्छा ही हमें यात्रा के पहले दौर में ले जाती है, अमूर्त से मूर्त यथार्थ की ओर ले जाती है, कल्पना की वर्कशाप में ले जाती है, जहाँ इस रूपांतरण की योजनाए बनाई जाती हैं और व्यवस्थिति की जाती है।
अध्याय दो में आपको छः निश्चित, व्यवहारिक कदम उठाने के निर्देश दिए गए है ताकि आप धन की इच्छा को इसके भौतिक रूप में रूपानंतरित करने की दिशा में आगे बढ़ सके। इनमें से एक कदम है निश्चित और व्यवहारिक योजनाए बनाना जिनके द्वारा रूपान्तरण किया जा सकता है।
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