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Chapter SIX of Think and Grow Rich


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Chapter SIX of Think and Grow Rich

अध्याय-6 कल्पना "मन की कार्यशाला"

कल्पना वास्तविकता में वह कार्यशाला है, जहाँ इन्सान द्वारा बानाए गए सभी प्लान सही आकार में ढलते हैं। यहाँ मन की कल्पना शक्ति द्वारा संवेग या चाहत को आकार, रूप और कार्यरूप दिया जाता है। यह कहा गया है कि इन्सान जिस चीज की कल्पना कर सकता है, उसको वास्तविक रूप भी दे सकता है। अपनी कल्पनाशक्ति की मदद से इन्सान ने पिछले पचास वर्षों के दौरान प्रकृति की शक्तियों को जितना खोजा है और उनका दोहन किया है उतना इससे पहले मानव जाति के पूरे इतिहास में नहीं हुआ।

तर्क की दृष्टि से इन्सान की इकलौती सीमा उसकी कल्पनाशीलता के विकास और प्रयोग को लेकर है। वह अपनी कल्पनाशीलता के प्रयोग के विकास के शिखर पर अब भई नहीं पहुँचा है। उसे तो सिर्फ यह खोजा है कि उसके पास कल्पनाशीलता है और उसने बहुत ही प्रारंभिक तरीके से इसका प्रयोग करना शुरू कर दिया है।

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Hindi AudiobooksBy Anoop Kumar