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Chapter TEN of Think and Grow Rich
अध्याय-10 मास्टर माइंड की शक्ति प्रेरक बल
योजनाएँ तब तक निष्क्रिय और व्यर्थ हैं, जब तक कि उन्हें कार्यरूप में रूपान्तरित करने की पर्याप्त शक्ति न हो। यह अभ्यास वह तरीका बताएगा। जिसके द्वारा कोई व्यक्ति शक्ति हासिल कर सकता है।
शक्ति को संगठित और बुद्धिमानी से निर्देशित ज्ञान के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। शक्ति से हमारा आशय है, वह संगठित प्रयास जो किसी व्यक्ति की इच्छा को इसके आर्थिक रूप से रूपान्तरित करने के लिए पर्याप्त है। संगठित प्रयास दो या इससे अधिक लोगो के संयोजित प्रयास का फल होता है। जो एक निश्चित लक्ष्य की ओर सद्भाव की भावना के साथ काम करते हैं।
Buy Book At- https://amzn.to/3hMHsjQ
www.booksociety.in
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By Anoop KumarChapter TEN of Think and Grow Rich
अध्याय-10 मास्टर माइंड की शक्ति प्रेरक बल
योजनाएँ तब तक निष्क्रिय और व्यर्थ हैं, जब तक कि उन्हें कार्यरूप में रूपान्तरित करने की पर्याप्त शक्ति न हो। यह अभ्यास वह तरीका बताएगा। जिसके द्वारा कोई व्यक्ति शक्ति हासिल कर सकता है।
शक्ति को संगठित और बुद्धिमानी से निर्देशित ज्ञान के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। शक्ति से हमारा आशय है, वह संगठित प्रयास जो किसी व्यक्ति की इच्छा को इसके आर्थिक रूप से रूपान्तरित करने के लिए पर्याप्त है। संगठित प्रयास दो या इससे अधिक लोगो के संयोजित प्रयास का फल होता है। जो एक निश्चित लक्ष्य की ओर सद्भाव की भावना के साथ काम करते हैं।
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