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Chapter TWO of Think and Grow Rich
अध्याय-2 इच्छशक्ति "सफलता की ओर पहला कदम"
हर इंसान जिसे पैसो की जरूरत है, वह पैसों की इच्छा रखता है। सिर्फ इच्छा रखना आपको धनवान नहीं बना देता। लगातार अमीर बनने की चाहत जब तक जुनून न बन जाए और फिर उसके लिए निश्चित योजना बनाना एवं अमीर बनने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ रहना और असफल होने पर अपने योजना पर विश्वास रखना ही हमें अमीर बनने की और ले जाता है।
जो लोग धन के प्रति जागरुक रहते हैं वही अमीर बनते हैं। धन के प्रति जागरुक रहने से तात्पर्य यह है कि जो लोग लगातार धन के बारे में सोचते रहते है और धन की चाहत रखते है, वही लोग खुद को अमीर बनने की स्थिति में तब ही देख पाते है, जब असल में वे नहीं होते हैं। जिन लोगो को इंसानी दिमाग के बारे में अधिक जानकारी नहीं है, वे लोग इन सिद्धान्तों को अव्यवहारिक कह सकते हैं।
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By Anoop KumarChapter TWO of Think and Grow Rich
अध्याय-2 इच्छशक्ति "सफलता की ओर पहला कदम"
हर इंसान जिसे पैसो की जरूरत है, वह पैसों की इच्छा रखता है। सिर्फ इच्छा रखना आपको धनवान नहीं बना देता। लगातार अमीर बनने की चाहत जब तक जुनून न बन जाए और फिर उसके लिए निश्चित योजना बनाना एवं अमीर बनने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ रहना और असफल होने पर अपने योजना पर विश्वास रखना ही हमें अमीर बनने की और ले जाता है।
जो लोग धन के प्रति जागरुक रहते हैं वही अमीर बनते हैं। धन के प्रति जागरुक रहने से तात्पर्य यह है कि जो लोग लगातार धन के बारे में सोचते रहते है और धन की चाहत रखते है, वही लोग खुद को अमीर बनने की स्थिति में तब ही देख पाते है, जब असल में वे नहीं होते हैं। जिन लोगो को इंसानी दिमाग के बारे में अधिक जानकारी नहीं है, वे लोग इन सिद्धान्तों को अव्यवहारिक कह सकते हैं।
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