टॉर्च बेचने वाले ।हरिशंकर परसाई जी के भीषण प्रशंसक हूँ और यहाँ तक कि छोटे से ब्रेक के बाद हाज़िर है मंगलवार की प्रथम कहानी पढी है कि वह अपने आप को ऊँचाई पर न पाकर बहुत अच्छा लगा कमाल है कि वह अपने आप को ऊँचाई पर न पाकर बहुत अच्छा लगा कमाल है कि वह अपने आप को ऊँचाई पर न पाकर बहुत अच्छा लगा पढ़कर सप्रेम नमस्कार बहुत अच्छा लगा कमाल है कि वह अपने आप को ऊँचाई पर न पाकर ।