कहानियों किस्सों के दौर में
सुनो! क्या तुम मेरी दास्तां बनोगे?
वो आधी रात वाली अनफिल्टर्ड बातों को,
क्या तुम दिल से सुनोगे?
जब रिश्तों और राहों की कश्मकश से जूंझ रही होऊंगी,
सुनो! क्या तुम मेरे साथ रहोगे?
या किसी अनदेखी मंज़िल की ओर,
आंख बंदकर, मेरे साथ चलोगे?
सुनो क्या तुम भी मुझसे पेहली सी मोहब्बत करोगे?
कहानियों किस्सों के दौर में
सुनो! क्या तुम मेरी दास्तां बनोगे? swapnil