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• जीवन में उलझनों की मुख्य वजह हैं दिखावा और आडम्बर।
• मन-वचन-काय की सरलता का नाम आर्जव धर्म है।
• सरलता के मायने हैं- ईमानदारी, सरलता के मायने हैं - स्पष्टवादिता, सरलता के मायने हैं - उन्मुक्त हृदय होना, सरलता के मायने है - सादगी, सरलता के मायने है- भोलापन (Innocence), Warm-Hearted (संवेदनशील, सहृदय) और Straight Forward (निष्कपट/स्पष्ट)। विभिन्न अवसरों पर हम हमारे भीतर झाँककर देखें कि ये चीजें हमारे भीतर हैं।
• छल-कपट, दिखावा-प्रदर्शन, कुटिलता, भ्रम और धन-संपदा ये सब माया के अर्थ कहे गए हैं जो हमारी सरलता एवं स्वभाव को नष्ट करने वाले और दुख के कारण कहे गए हैं।
दूसरों के गुणों के सम्मान में अगर हम आल्हाद महसूस करते हैं तो मानियेगा हमारे भीतर मृदुता-कोमलता आने शुरू हो गए हैं।
अपने को गुणवान और श्रेष्ठ बना लो तो सम्मान अपने आप हो गया ।
परमपूज्य मुनिश्री क्षमासागर जी द्वारा उत्तम मार्दव धर्म पर दिए प्रवचन है।
• अपने भीतर कहीं बाहर से धर्म लाने की प्रक्रिया नहीं करनी बल्कि हमारे भीतर जो विकृतियाँ हैं उनको हटाना है। जैसे-जैसे हम उनको हटाते जायेंगे धर्म आपो-आप हमारे भीतर प्रकट होता जायगा।
• जो जितना सामर्थ्यवान होगा वह उतना क्षमावान भी होगा। जो जितना क्रोध करेगा वह उतना ही कमज़ोर होगा।
• क्रोध न आवे वास्तव में तो क्षमा ये ही है। क्रोध आ जाने के बाद कौन कितनी जल्दी उसे समाप्त कर देता है यह उसकी अपनी क्षमता है। जो जितना सामर्थ्यवान होगा वह उतना ही क्षमावान होता है।
• क्रोध के कारण, और क्रोध आने पर हम क्या करें परमपूज्य मुनिश्री क्षमासागर जी अपनी सुमधुर वाणी से हमें समाधान दे रहें हैं ।
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