Saahitya Ki Orr

धिक्कार - मुंशी प्रेमचंद की कहानी


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आधी रात हो गयी थी। विवाह का मुहूर्त निकट आ गया था। जनवासे से चढ़ावे की चीजें आयीं । सभी औरतें उत्सुक हो-होकर उन चीजों को देखने लगीं। ललिता को आभूषण पहिनाये जाने लगे। मानी के हृदय में बड़ी इच्छा हुई कि जाकर वधू को देखे। अभी कल जो बालिका थी, उसे आज वधू वेश में देखने की इच्छा न रोक सकी। वह मुस्कराती हुई कमरे में घुसी। सहसा उसकी चाची ने झिड़ककर कहा- तुझे यहाँ किसने बुलाया था, निकल जा यहाँ से। पूरी कहानी जानने के लिए सुनिए ये कहानी: धिक्कार!!!!! यदि आपको मेरे द्वारा पढ़ी गई कहानी पसंद आए तो मेरे चैनल को subscribe, share और like अवश्य करें।
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Saahitya Ki OrrBy Renu Arun