
Sign up to save your podcasts
Or


Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!
धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 105
बंगाल में एक स्त्री माँ दुर्गा की प्रतिमा के सामने खड़ी है, हाथ में एक छोटा सा दर्पण, और पीतल की कटोरी में जल। वह दर्पण ऐसे पकड़ती है, कि उसमें माँ का मुख दिखे। फिर देर तक उस प्रतिबिंब को देखती है। और फिर, धीरे से, दर्पण को जल की ओर झुकाती है, कि वह प्रतिबिंबित मुख जल में डूब जाए। माँ ऐसे ही विदा होती हैं। पहले दर्पण से। फिर मिट्टी से। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। एक सौ पाँचवाँ एपिसोड, दसवाँ दिन। छियानवेवें एपिसोड में हम कोलकाता के एक पंडाल में संधि पूजा के लिए खड़े थे, वर्ष के सबसे पवित्र अड़तालीस मिनट। अब पूजा समाप्त हो रही है। और अंतिम दिन, दशमी, विदाई का दिन है।
पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 96।
स्रोत। श्रेणी: परंपरा। बताई गई रीतियाँ जीवित परंपरा हैं, और प्रदेश, समाज और परिवार के अनुसार भिन्न हैं। दर्पण विसर्जन, सिंदूर खेला, विसर्जन की शोभायात्राएँ, आसछे बछर आबार होबे की पुकार, और बिजया की शुभकामनाएँ व्यापक रूप से वर्णित बंगाली प्रथाएँ हैं। विजयादशमी की दोपहर बाद अपराजिता पूजा, और यह मान्यता कि राम ने लंका जाने से पहले अपराजिता की पूजा की, द्रिकपंचांग डॉट कॉम के अनुसार हैं। सीमोल्लंघन और रामलीला के पुतले व्यापक रूप से वर्णित प्रथाएँ हैं। दो हज़ार छब्बीस में बंगाल की दशमी की तिथि प्रकाशित बंगाली पंजिकाओं के अनुसार है, जो भिन्न हैं। विचार मेरा मनन है।
सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।
Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!
धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 104
शमी शमयते पापं शमी शत्रुविनाशिनी। अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी॥ शमी पाप को शांत करती है, शमी शत्रुओं का नाश करती है। उसने अर्जुन का धनुष धारण किया, वह राम को प्रिय लगी। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। एक सौ चारवाँ एपिसोड, दसवाँ दिन। एक सौ तीनवें एपिसोड में हमने वाल्मीकि से राम और रावण का अंतिम युद्ध सुना, ब्रह्मा का बाण, और मरे हुए शत्रु पर राम के वचन, वैर मृत्यु के साथ समाप्त। आज, एक बिल्कुल दूसरा महाकाव्य, और बिल्कुल दूसरे प्रकार की विजय। पहले सीज़न के बासठवें एपिसोड में, हम महाभारत के महायुद्ध के बाद नदी किनारे युधिष्ठिर के साथ बैठे थे, कर्ण को जल देते हुए। आज उस युद्ध से कई वर्ष पहले चलते हैं। महाभारत के चौथे पर्व, विराट पर्व से, पांडवों के अज्ञातवास की कथा। शमी के पेड़ में छिपे शस्त्र।
पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 62।
स्रोत। श्रेणी: कथा के लिए शास्त्र, उत्सव के लिए परंपरा। श्मशान के पास शमी में पांडवों का शस्त्र छिपाना, पेड़ से बँधा शव, और एक सौ अस्सी वर्ष की माँ वाला उनका उत्तर, महाभारत, विराट पर्व के आरंभिक अध्यायों से है, प्रकाशित अनुवादों और सारांशों के अनुसार, जिनमें ऑनलाइन उपलब्ध गांगुली का अनुवाद और हिंदू-ब्लॉग डॉट कॉम हैं; कौरवों के गो-हरण के समय अर्जुन के कहने पर राजकुमार उत्तर द्वारा शस्त्र उतारना, उसी पर्व के आगे के अध्यायों से है। विवरण संक्षेप में हैं, कुछ छोड़े गए हैं। शमी पूजा, पत्तियों को सोने की तरह देना, महाराष्ट्र की आपटा पत्तियाँ, श्लोक, शमी शमयते पापम्, और राम द्वारा शमी पूजा की मान्यता, जीवित परंपरा हैं, जैसा हिंदूटोन डॉट कॉम और भारतडिस्कवरी डॉट ओआरजी पर वर्णित है, महाभारत या रामायण के कथन नहीं। विचार मेरा मनन है। श्लोक की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।
सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।
Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!
धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 103
मरणान्तानि वैराणि निर्वृत्तं नः प्रयोजनम्। क्रियतामस्य संस्कारो ममाप्येष यथा तव॥ वैर मृत्यु के साथ समाप्त हो जाता है। हमारा प्रयोजन पूरा हुआ। इसका संस्कार करो। अब यह मेरा भी उतना ही है, जितना तुम्हारा। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। एक सौ तीनवाँ एपिसोड, दसवाँ दिन। आज विजयादशमी है, दसवाँ दिन, विजय का दिन। कल रात, निन्यानवेवें एपिसोड में, हमने श्रीराम की अकाल पूजा की बांग्ला कथा सुनी, एक सौ आठ कमल, और वह आँख, जो वे माँ को देने को तैयार थे। वह कथा, जैसा कहा था, कृत्तिवास की बांग्ला रामायण से है, वाल्मीकि से नहीं। आज वह युद्ध, जिसे भारत का इतना बड़ा भाग इस दिन याद करता है। राम और रावण का युद्ध। और इस बार, वाल्मीकि से, सबसे प्राचीन संस्कृत रामायण से, उसके युद्धकांड के अंतिम सर्गों से।
पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 99।
स्रोत। श्रेणी: शास्त्र, श्लोकों सहित। युद्ध वाल्मीकि रामायण, युद्धकांड से है, संस्कृतडॉक्यूमेंट्स डॉट ओआरजी पर समीक्षित संस्करण के पाठ में पढ़ा गया, सर्ग पंचानवे से निन्यानवे: चित्र जैसी सेनाएँ; इंद्र का रथ और मातलि; राम और रावण का संकल्प, पंचानवेवें सर्ग के सातवें श्लोक से उद्धृत; रथों का युद्ध; छियानवेवें सर्ग में सौ सिर; सत्तानवेवें में मातलि का स्मरण, ब्रह्मा का बाण, रावण का हृदय फटना और वृत्र की तरह गिरना; और निन्यानवेवें सर्ग के उनतालीसवें श्लोक में विभीषण का शोक और राम के वचन। अनुवाद मेरे अपने शब्दों में। बहुत से प्रचलित संस्करण इस युद्ध से पहले अगस्त्य ऋषि द्वारा राम को सिखाया गया आदित्य हृदय भी रखते हैं; समीक्षित संस्करण उसे मुख्य पाठ में नहीं रखता। रावण-वध का विजयादशमी से संबंध परंपरा का है, वाल्मीकि का कथन नहीं। विचार मेरा मनन है। श्लोकों की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।
सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।
Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!
धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 102
सोऽपि वैश्यस्ततो ज्ञानं वव्रे निर्विण्णमानसः। ममेत्यहमिति प्राज्ञः सङ्गविच्युतिकारकम्॥ और उस वैश्य ने, जिसका मन संसार से विरक्त हो चुका था, उस बुद्धिमान ने, वह ज्ञान माँगा, जो मेरा और मैं की आसक्ति को काट देता है। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। एक सौ दोवाँ एपिसोड, नौवें दिन की अंतिम कथा। पहले सीज़न के पचपनवें एपिसोड में हम पहली बार इन दो लोगों से मिले थे। सुरथ, एक अच्छे राजा, जिनका राज्य शत्रुओं ने और उनके अपने मंत्रियों ने छीन लिया। और समाधि, एक वैश्य, जिन्हें उनकी अपनी पत्नी और बेटों ने धन के लिए घर से निकाल दिया। दोनों वन में मेधा ऋषि के आश्रम में मिले, और वह प्रश्न पूछा, जिससे पूरी सप्तशती शुरू हुई। जिन्होंने हमें धोखा दिया, उनकी चिंता हम अब भी क्यों करते हैं? छोड़ क्यों नहीं पाते? और ऋषि ने उत्तर में माँ की कथा सुनाई। उस ग्रंथ से हमने जो भी कथा सुनी, दोनों सीज़नों में, मधु-कैटभ, महिषासुर, शुंभ-निशुंभ, रक्तबीज, काली, मातृकाएँ, सब मेधा ऋषि थे, वन में इन दो लोगों से बात करते हुए।
पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 55।
स्रोत। श्रेणी: पुराण, श्लोकों सहित। कथा सप्तशती के तेरहवें अध्याय से है, देवीमाहात्म्यम डॉट औरोभारती डॉट इन पर अनुवाद सहित पढ़ी गई: ऋषि के अंतिम वचन; नदी तट पर राजा और वैश्य, देवी सूक्त का जप, मिट्टी की प्रतिमा की पूजा, उपवास, और अपने रक्त से सिंचित बलि; तीन वर्ष; माँ का प्रकट होना; दोनों की इच्छाएँ; और वरदान। उद्धृत श्लोक वहाँ तेरहवें अध्याय का सत्रहवाँ, और इक्कीसवाँ-बाईसवाँ हैं। उनके जपे सूक्त को ऋग्वेद का देवी सूक्त मानना ग्रंथ की प्रचलित समझ है। कथा का ढाँचा पचपनवें एपिसोड में सुनाया गया था। विचार मेरा मनन है। श्लोकों की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।
सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।
Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!
धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 101
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥ सिद्ध, गंधर्व, यक्ष आदि, असुर और देवता भी, जिनकी सदा सेवा करते हैं, वे सिद्धि देने वाली सिद्धिदात्री, सदा सिद्धि प्रदान करें। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। एक सौ एकवाँ एपिसोड, नौवाँ दिन। सत्तानवेवें एपिसोड में हम माँ महागौरी से मिले, उज्ज्वल आठवाँ रूप, लंबे तप के पूरे होने पर उजली हुई पार्वती। आज नौवाँ रूप। सीढ़ी की अंतिम पायदान।
पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 97।
स्रोत। श्रेणी: परंपरा, एक श्लोक सहित। नवदुर्गा में नौवें रूप के रूप में सिद्धिदात्री का नाम देवी कवच की सूची से है, जो उनहत्तरवें एपिसोड में आई। ध्यान श्लोक, सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैः, प्रचलित भक्ति-श्लोक है, जैसा हिंदूपैड डॉट कॉम और दूसरी जगहों पर दिया है। आठ सिद्धियाँ, ब्रह्मवैवर्त पुराण की अठारह, महादेव के सिद्धियाँ पाने और अर्धनारीश्वर बनने की कथा, उनकी चार भुजाएँ और कमल का आसन, और सब प्राणियों द्वारा उनकी पूजा, ब्रहत डॉट इन पर पढ़े गए। योग-केंद्र और दिन की प्रथाएँ बाद की और जीवित परंपरा हैं, और भिन्न हैं। सीढ़ी को फिर से नीचे तक देखना, और बाकी विचार, मेरा मनन है। श्लोक की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।
सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।
Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!
धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 100
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ सब मंगलों का मंगल, कल्याणी, हर कामना पूरी करने वाली, शरण देने वाली, त्रिनेत्री, गौरी, हे नारायणी, तुम्हें नमस्कार। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। सौवाँ एपिसोड, नौवाँ दिन। हमारा सौवाँ एपिसोड। पचानवेवें एपिसोड में निशुंभ गिरा, और अकेले रह गए शुंभ ने माँ को ताना मारा, कि वे दूसरों के सहारे लड़ती हैं, और माँ ने कहा, इस जगत में मैं अकेली हूँ, मेरे सिवा दूसरी कौन? और रणभूमि की हर देवी उनमें समा गई, और उन्होंने शुंभ को मारा, और जगत फिर व्यवस्थित हुआ। आज सप्तशती का ग्यारहवाँ अध्याय। देवताओं की महान कृतज्ञता-स्तुति, नारायणी स्तुति। और उसके उत्तर में माँ का एक वचन, जिसके कारण, मुझे लगता है, ये नौ रातें हैं।
पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 95।
स्रोत। श्रेणी: पुराण, श्लोकों सहित। कथा और स्तुति सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय से हैं, देवीमाहात्म्यम डॉट औरोभारती डॉट इन पर अनुवाद सहित पढ़े गए: अग्नि को आगे कर देवताओं की स्तुति; तीसरे श्लोक से शुरू होती स्तुति और उसकी टेक, नारायणि नमोऽस्तु ते; मातृकाएँ और शस्त्र; वरदान; और माँ के भावी रूप, नंद के घर यशोदा से जन्मी विंध्यवासिनी, रक्तदंतिका, शताक्षी, शाकंभरी, दुर्गा, भीमा और भ्रामरी, इकतालीसवें से चौवनवें श्लोक तक। उद्धृत श्लोक वहाँ ग्यारहवें अध्याय के तीसरे, दसवें, बारहवें और पचपनवें हैं। भगवद्गीता के चौथे अध्याय के सातवें श्लोक से तुलना प्रचलित है। विचार मेरा मनन है। श्लोकों की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।
सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।
Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!
धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 99
एक सौ सात। श्रीराम फिर से गिनते हैं। माँ के सामने रखे एक सौ सात नीले कमल। आज सुबह एक सौ आठ थे। उन्हें पता है। उन्होंने स्वयं गिने थे। एक सौ सात से पूजा पूरी नहीं हो सकती। और कल युद्ध है। तो अयोध्या के राजकुमार, जिनकी आँखें इतनी सुंदर हैं कि लोग उन्हें कमलनयन कहते हैं, एक बाण उठाते हैं। और उसकी नोक अपनी आँख की ओर ले जाते हैं। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। निन्यानवेवाँ एपिसोड, नौवाँ दिन। आज नवमी है, नौ रातों में नौवीं और अंतिम। पहले सीज़न के अंत में, छियासठवें एपिसोड में, जब इस सीज़न की झलक दी थी, तब सबसे पहले एक कथा का नाम लिया था। रावण से युद्ध से पहले, श्रीराम का असमय माँ की पूजा करना। और नब्बेवें एपिसोड में वचन दिया था, कि यह कथा नौवें दिन सुनाऊँगा। आज वही।
पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 66।
स्रोत। श्रेणी: कथा-रूप, बांग्ला परंपरा से। अकाल बोधन की कथा, बेल के नीचे ब्रह्मा पुरोहित, एक सौ आठ नीले कमल, खोया कमल, राम का अपनी कमल जैसी आँख की ओर बाण उठाना, और माँ का प्रकट होकर रोकना और आशीर्वाद देना, कृत्तिवास ओझा की बांग्ला रामायण, कृत्तिवासी रामायण, से है, जैसा प्रकाशित सारांशों में दिया है, जिनमें अकालबोधन पर विकिपीडिया का लेख भी है; हनुमान के कमल लाने, और एक कमल के कम होने के कारण पर कथाएँ भिन्न हैं। यह वाल्मीकि रामायण में नहीं है। मिलते-जुलते संस्कृत वर्णन कालिका पुराण जैसे देवी-ग्रंथों में हैं। दक्षिणायन में देवताओं का सोना, वसंत की बासंती पूजा, और उसका राजा सुरथ से संबंध जीवित परंपरा है। सप्तमी से दशमी तक युद्ध का समय बांग्ला परंपरा से है। विचार मेरा मनन है।
सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।
Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!
धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 98
कल सुबह, लाखों घरों में, दरवाज़े पर एक दस्तक होगी, और बाहर एक छोटी सी बच्ची खड़ी होगी। शायद छह साल की। शायद नौ की। शायद पड़ोस की, या भतीजी, या किसी सहेली की बेटी। अपने सबसे अच्छे कपड़ों में, थोड़ी शरमाई, थोड़ी उत्साहित। और जब वह भीतर आएगी, घर के बड़े उसके सामने घुटनों पर बैठेंगे, और उसके पैर धोएँगे। अगले एक घंटे, उस घर में, वह माँ है। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। अट्ठानवेवाँ एपिसोड, आठवें दिन की अंतिम कथा। आज हम माँ महागौरी से मिले, उज्ज्वल आठवाँ रूप, और संधि पूजा सुनी, बंगाल के वर्ष के सबसे पवित्र अड़तालीस मिनट। आज रात, एक अनुष्ठान, जो भारत के बड़े भाग में, किसी न किसी रूप में, अष्टमी या नवमी को होता है। कन्या पूजन, कुमारी पूजा। कन्या की पूजा।
पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 94।
स्रोत। श्रेणी: परंपरा। कन्या पूजन, या कुमारी पूजा, भारत के बड़े भाग में अष्टमी या नवमी को निभाई जाने वाली जीवित परंपरा है, और घर और प्रदेश के अनुसार भिन्न है। पैर धोना, कलावा और तिलक, आरती, पूरी, चने और हलवे का भोजन, उपहार, और भैरव या लांगुर के रूप में एक बालक, व्यापक रूप से वर्णित प्रथाएँ हैं। आयु के अनुसार कन्याओं के नाम, कुमारी से सुभद्रा तक, देवी भागवत पुराण के तीसरे स्कंध से हैं, जैसे वेट्टम मणि के पुराणिक एनसाइक्लोपीडिया में विज़डमलिब डॉट ओआरजी पर दिए हैं। उन्नीस सौ एक में बेलूर मठ की कुमारी पूजा रामकृष्ण मिशन के इतिहास से है, संक्षेप में। विचार मेरा मनन है।
सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।
Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!
धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 97
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥ श्वेत वृषभ पर आरूढ़, श्वेत वस्त्र धारण किए, पवित्र, महादेव को आनंद देने वाली माँ महागौरी शुभ करें। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। सत्तानवेवाँ एपिसोड, आठवाँ दिन। बानवेवें एपिसोड में हम माँ कालरात्रि से मिले, नौ रूपों में सबसे श्याम, जिन्हें शुभंकरी भी कहते हैं। आज नवदुर्गा का आठवाँ रूप। माँ महागौरी।
पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 92।
स्रोत। श्रेणी: परंपरा, एक श्लोक सहित। नवदुर्गा में आठवें रूप के रूप में महागौरी का नाम देवी कवच की सूची से है, जो उनहत्तरवें एपिसोड में आई। ध्यान श्लोक, श्वेते वृषे समारूढा, उनका रूप, और पार्वती के स्नान और श्याम कोश के कौशिकी बनने की कथा, ब्रहत डॉट इन पर पढ़े गए, जहाँ मानसरोवर का नाम है; दूसरी कथाएँ गंगा का नाम लेती हैं, या अलग ढंग से कहती हैं। कौशिकी और कालिका पर सप्तशती का अपना वर्णन पाँचवें अध्याय में है, जैसा पचहत्तरवें एपिसोड में। योग-केंद्र और नारियल का भोग बाद की और जीवित परंपरा है, और भिन्न है। सातवीं और आठवीं रात के क्रम पर विचार मेरा मनन है। श्लोक की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।
सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।
Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!
धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 96
कोलकाता का एक पंडाल। लोगों से खचाखच भरा। और अचानक पूरी भीड़ चुप हो जाती है। पुरोहित घड़ी देख रहे हैं। माँ के सामने, पंक्तियों में, मिट्टी के एक सौ आठ दीपक रखे हैं, जलने को तैयार। पास में एक सौ आठ कमल, गिने हुए, फिर से गिने हुए। ढाकी अपनी डंडियाँ ढाक के ऊपर उठाए रुके हैं। क्योंकि बस एक क्षण में एक तिथि समाप्त होगी, और दूसरी शुरू। और उस क्षण के दोनों ओर फैले अड़तालीस मिनट, बंगाल के बहुत से परिवारों के लिए, पूरे वर्ष के सबसे पवित्र मिनट हैं।
पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 93।
स्रोत। श्रेणी: परंपरा। संधि पूजा बंगाल की जीवित परंपरा है, और उसके अनुष्ठान घर और पंडाल के अनुसार भिन्न हैं। अष्टमी के अंतिम चौबीस और नवमी के पहले चौबीस मिनट, दो घड़ी, वाली परिभाषा, और यह मान्यता कि इसी समय चामुंडा ने चंड-मुंड को मारा, द्रिकपंचांग डॉट कॉम के अनुसार हैं। दो हज़ार छब्बीस का समय, सोमवार उन्नीस अक्टूबर, सुबह लगभग दस सत्ताईस से ग्यारह पंद्रह, द्रिकपंचांग का नई दिल्ली के लिए है; कोलकातादुर्गोत्सव डॉट कॉम पर छपी एक बंगाली पंजिका की सूची इससे पहले का समय देती है; श्रोता अपने पंचांग को मानें। एक सौ आठ दीप और कमल, ढाक, और पशु-बलि की जगह कुम्हड़ा, गन्ना या केला, व्यापक रूप से वर्णित प्रथाएँ हैं। विचार मेरा मनन है।
सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।
From the publisher's feed
पितृ पक्ष विशेष: पूर्वजों, भक्ति और धर्म की कथाएँ, रामायण, महाभारत, उपनिषद और पुराणों से। सीज़न 1 में पितरों का ऋण, आत्मा की यात्रा, नचिकेता और यम, सावित्री, गया, कर्ण और अनेक कथाएँ। हर एपिसोड अपना…