धर्म कथा

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धर्म कथा episodes

  • शुंभ-निशुंभ का स्वर्ग पर अधिकार

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    धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 75

    शरीरकोशाद्यत्तस्याः पार्वत्या निःसृताम्बिका। कौशिकीति समस्तेषु ततो लोकेषु गीयते॥ पार्वती के शरीर-कोश से अंबिका निकलीं, इसीलिए सारे लोकों में वे कौशिकी नाम से गाई जाती हैं। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। पचहत्तरवाँ एपिसोड, तीसरा दिन। पहले सीज़न के छप्पनवें एपिसोड में माँ ने महिषासुर का वध किया था, और युद्ध के अंत में देवताओं को एक वचन दिया था। जब भी संकट में मुझे याद करोगे, मैं आऊँगी। आज देवता देखेंगे, कि वह वचन सच्चा था या नहीं। आज तीसरा दिन है, माँ चंद्रघंटा का, जिनसे आज बाद में मिलेंगे। और आज से सप्तशती का तीसरा, सबसे लंबा, सबसे बड़ा चरित्र शुरू होता है। उत्तम चरित्र। माँ महासरस्वती। और दो असुर भाई। शुंभ और निशुंभ।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 56।

    स्रोत। श्रेणी: पुराण, श्लोकों सहित। शुंभ-निशुंभ का अधिकार और छीने गए पदों की सूची, देवताओं का माँ के वचन को याद करना, हिमालय पर स्तुति, पार्वती का गंगा स्नान, अंबिका का कौशिकी रूप में निकलना और पार्वती का कालिका होना, चंड-मुंड की सूचना और शुंभ के रत्नों की सूची, और सुग्रीव को भेजना, यह सब सप्तशती के पाँचवें अध्याय से है, देवीमाहात्म्यम डॉट औरोभारती डॉट इन पर पाठ और अनुवाद से, जहाँ स्तुति नौवें से इक्यासीवें श्लोक तक है। उद्धृत श्लोक पाँचवें अध्याय के नौवें, दसवें का उत्तरार्ध, सत्तासीवें और अट्ठासीवें हैं, वहीं पढ़े गए। कौशिकी के प्रकट होने की दूसरी कथाएँ बाद के पुराणों की हैं, केवल संक्षेप में दी गईं। देवताओं को पद मानने वाली बात, और स्तुति को बेघरों का गीत कहना, मेरा मनन है। श्लोकों की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    16 min
  • सात सौ श्लोक: सप्तशती का पाठ

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    धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 74

    शरत्काले महापूजा क्रियते या च वार्षिकी। तस्यां ममैतन्माहात्म्यं श्रुत्वा भक्तिसमन्वितः॥ शरद ऋतु में जो वार्षिक महापूजा होती है, उसमें जो भक्ति से मेरा यह माहात्म्य सुनता है... यह वचन किसका है? स्वयं माँ का। अपनी ही कथा के बारे में। अपने ही ग्रंथ के भीतर। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। चौहत्तरवाँ एपिसोड, दूसरे दिन की अंतिम कथा। सत्तरवें एपिसोड में हमने वे तीन स्तोत्र सुने, जो सप्तशती खोलने से पहले पढ़े जाते हैं। कवच, अर्गला, कीलक। कवच पहनना, अर्गला हटाना, कील निकालना। आज, ग्रंथ स्वयं। उसकी कथाएँ नहीं, वे तो इस पूरे सीज़न में सुनेंगे। आज यह, कि उसका पाठ होता कैसे है। इन दिनों घर-घर में सुबह-सुबह जो पोथी खुलती है, उसके साथ क्या होता है।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 70।

    स्रोत। श्रेणी: परंपरा, श्लोकों सहित। सप्तशती की बनावट, उसकी कथा का ढाँचा और तीन चरित्र ग्रंथ से हैं, जैसे पचपनवें और सत्तावनवें एपिसोड में। सात सौ की गिनती की बात परंपरा की है; संस्करण इसे अलग-अलग समझाते हैं। सात दिन की पाठ-विधि बहुत जगह छपी है, यहाँ स्मार्टपूजा डॉट कॉम से; दूसरी विधियाँ भी हैं। पाठ के नियम जीवित परंपरा हैं, और घर-घर, गुरु-गुरु में भिन्न। बारहवें अध्याय के वचन, स्तुति से बाधा शांत होना, अष्टमी, चतुर्दशी, नवमी, और शरद की महापूजा, देवीमाहात्म्यम डॉट औरोभारती डॉट इन पर अनुवाद सहित पढ़े गए, जहाँ इनकी संख्या दो, चार, बारह और तेरह है। क्षमा प्रार्थना के श्लोक द्रिकपंचांग डॉट कॉम पर पढ़े गए। श्लोकों की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    10 min
  • कामदहन

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    धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 73

    क्रोधं प्रभो संहर संहरेति यावद्गिरः खे मरुतां चरन्ति। तावत्स वह्निर्भवनेत्रजन्मा भस्मावशेषं मदनं चकार॥ प्रभु, क्रोध रोकिए, रोकिए! देवताओं की यह पुकार अभी आकाश में ही थी, कि शिव के नेत्र से जन्मी उस अग्नि ने कामदेव को राख कर दिया। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। तिहत्तरवाँ एपिसोड, दूसरा दिन। इकहत्तरवें एपिसोड में पार्वती पर्वत पर चढ़ीं, और तप से शिव को पाया। तब मैंने कहा था, कि उससे पहले एक प्रयास विफल हुआ था, और उसकी कथा अलग से सुनाऊँगा। आज वही कथा। चढ़ाई से पहले का दिन।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 71।

    स्रोत। श्रेणी: काव्य और पुराण, एक श्लोक सहित। बिना ऋतु का वसंत, नंदी का संकेत, शिव का आसन और बिन बरसे बादल की उपमा, चलती बेल जैसी पार्वती, शिव का मन थोड़ा डोलना, तीसरे नेत्र की अग्नि, रति का अचेत होना, शिव का गणों सहित अंतर्धान होना, और हाथी के दाँतों पर कमल की तरह हिमवान का पार्वती को घर ले जाना, यह सब कालिदास के कुमारसंभव, तीसरे सर्ग से है, जिसका सार कामकोटि डॉट ओआरजी पर पढ़ा गया। उद्धृत श्लोक, क्रोधं प्रभो संहर संहरेति, और उससे पहले का तीसरे नेत्र वाला श्लोक, वहीं पढ़े गए। कालिदास शास्त्रीय काव्य हैं, शास्त्र नहीं। तारकासुर का वर, रति को शिव का वचन, अनंग नाम और प्रद्युम्न रूप में जन्म शिव पुराण, रुद्र संहिता, पार्वती खंड, और दूसरे पुराणों के अनुसार है; वडवानल वाली बात शिव पुराण की कथा में है, और कहीं-कहीं अलग ढंग से मिलती है। श्लोक की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    11 min
  • ब्रह्मचारिणी

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    धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 72

    दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥ जो अपने कमल जैसे हाथों में जपमाला और कमंडल धारण करती हैं, वे सर्वश्रेष्ठ देवी ब्रह्मचारिणी मुझ पर प्रसन्न हों। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। बहत्तरवाँ एपिसोड, दूसरा दिन। इकहत्तरवें एपिसोड में पार्वती ने पर्वत पर एक-एक करके सब छोड़ा। हार, रेशम, शय्या, अन्न, और अंत में गिरे हुए पत्ते भी। अपर्णा कहलाईं। और शिव ने कहा, मैं तुम्हारा दास हूँ, तुम्हारे तप ने मुझे खरीद लिया। आज रात माँ का वह रूप, जो उस तप को अपने भीतर थामे हुए है। नवदुर्गा का दूसरा रूप। ब्रह्मचारिणी।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 71।

    स्रोत। श्रेणी: परंपरा, मनन सहित। नवदुर्गा में दूसरे रूप के रूप में ब्रह्मचारिणी का नाम देवी कवच की सूची से है, जो उनहत्तरवें एपिसोड में आई। ध्यान श्लोक, दधाना करपद्माभ्याम्, प्रचलित भक्ति श्लोक है, ब्रहत डॉट इन पर पढ़ा गया, जहाँ माला, कमंडल, श्वेत वस्त्र और नंगे पाँव वाला रूप भी दिया है। पार्वती के तप से संबंध नवदुर्गा परंपरा और शिव पुराण के पार्वती खंड से है; ब्रह्मचारी वेश कालिदास के कुमारसंभव, पाँचवें सर्ग से। ब्रह्मचर्य का अर्थ उसके शास्त्रीय प्रयोग से; स्वाधिष्ठान से संबंध और भोग की प्रथा बाद की और जीवित परंपरा है, और भिन्न है। ब्रह्मचारी द्वारा ब्रह्मचारिणी की परीक्षा वाली बात मेरा मनन है। श्लोक की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    11 min
  • पार्वती का तप

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    धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 71

    अद्य प्रभृत्यवनताङ्गि तवास्मि दासः। क्रीतस्तपोभिः। आज से, हे विनम्र, मैं तुम्हारा दास हूँ। तुम्हारे तप ने मुझे मोल ले लिया। यह वाक्य किसने कहा, और किससे? जिन्होंने कामदेव को एक दृष्टि में भस्म कर दिया था, जिन्हें कोई सौंदर्य नहीं डिगा सका, उन महादेव ने। एक कन्या से। आज की कथा यही है, कि यह वाक्य कैसे कहा गया। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। इकहत्तरवाँ एपिसोड, दूसरा दिन। अड़सठवें एपिसोड में सती ने पिता के यज्ञ में देह त्यागी, और शिव संसार से हटकर ध्यान में चले गए। कल रात, उनहत्तरवें एपिसोड में, हम पर्वत की बेटी से मिले, पार्वती से, जिन्हें नारद ने बताया था कि उनका पति एक योगी होगा। आज दूसरा दिन, माँ ब्रह्मचारिणी का। और यह उन्हीं की कथा है। पार्वती ने शिव को कैसे पाया। रूप से नहीं। कुल से नहीं। तप से।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 68।

    स्रोत। श्रेणी: पुराण और काव्य, कथा-रूप सहित। कथा का क्रम शिव पुराण, रुद्र संहिता, पार्वती खंड के अनुसार है: कामदहन के बाद पार्वती का तप, सप्तर्षियों की परीक्षा, और शिव का वेश बदलकर आना। अधिकतर चित्र कालिदास के कुमारसंभव से हैं: उमा नाम पहले सर्ग से; तप, अपर्णा नाम, ब्रह्मचारी द्वारा शिव की निंदा, पार्वती का उत्तर, और अंतिम श्लोक पाँचवें सर्ग से, जिसका सार कामकोटि डॉट ओआरजी पर पढ़ा गया। उद्धृत दोनों पंक्तियाँ, शैलाधिराजतनया न ययौ न तस्थौ, और अद्य प्रभृत्यवनताङ्गि तवास्मि दासः क्रीतस्तपोभिः, पाँचवें सर्ग के अंतिम श्लोकों से हैं। संवाद भाव में हैं, कहीं-कहीं मेरे शब्दों में। कालिदास शास्त्रीय काव्य हैं, शास्त्र नहीं। श्लोकों की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    15 min
  • चंडी पाठ से पहले: कवच, अर्गला, कीलक

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    धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 70

    जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥ आज शाम, बहुत से घरों में, सप्तशती का पहला अध्याय खुलने से पहले यह श्लोक गूँजा होगा। आपके घर में भी, शायद। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। सत्तरवाँ एपिसोड, पहले दिन का अंतिम एपिसोड। पहले सीज़न के सत्तावनवें एपिसोड में हमने पूछा था कि चंडी पाठ में पढ़ा क्या जाता है, और पाँचवें अध्याय की स्तुति सुनी थी, या देवी सर्वभूतेषु। आज, जब बहुत से लोग नौ दिन का पाठ आरंभ कर रहे हैं, उन तीन स्तोत्रों की बात, जो ग्रंथ खुलने से पहले पढ़े जाते हैं। कवच। अर्गला। कीलक।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 57।

    स्रोत। श्रेणी: परंपरा, छोटे उद्धरणों के साथ। देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक स्तोत्र दुर्गा सप्तशती पाठ के अंग हैं; ये मार्कण्डेय पुराण के तेरह अध्यायों का भाग नहीं हैं, और इनका क्रम तथा बाकी अंग पुस्तक के अनुसार भिन्न हैं। कवच में मार्कण्डेय का प्रश्न आर्ट ऑफ़ लिविंग के देवी कवच पृष्ठ पर, और अंगों की सूची तथा सौ वर्ष वाला वचन श्लोकम डॉट ओआरजी पर पढ़े गए, जहाँ छप्पन श्लोक हैं; बहुत सी पुस्तकें कवच को वाराह पुराण का बताती हैं। अर्गला का पहला श्लोक, जयन्ती मङ्गला काली, उसकी टेक, रूपं देहि जयं देहि, और कीलक के श्लोक, महादेव के कीलने और चतुर्दशी या अष्टमी को देने-लेने वाले, देवीमाहात्म्यम डॉट ऑरोभारती डॉट इन पर पढ़े गए। टेक और कीलक के अर्थ पर गुरुओं में मतभेद है। प्रकाशन से पहले किसी संस्कृत जानकार से श्लोकों की पुष्टि करा लेनी चाहिए।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    12 min
  • शैलपुत्री: पर्वत की बेटी

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    धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 69

    वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥ आज की रात यह श्लोक कितने ही घरों में पढ़ा जा रहा है। मनोकामना पूरी करने वाली, माथे पर अर्धचंद्र धारण करने वाली, वृषभ पर सवार, त्रिशूल धारिणी, यशस्विनी शैलपुत्री को मेरा प्रणाम। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। उनहत्तरवाँ एपिसोड, पहला दिन। अड़सठवें एपिसोड में सती ने पिता की दी हुई देह योग की अग्नि में छोड़ दी, और भागवत ने कहा कि वे हिमवान और मेना की बेटी बनकर फिर आएँगी। आज रात वही बेटी। नवदुर्गा का पहला रूप। शैलपुत्री।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 68।

    स्रोत। श्रेणी: परंपरा, पुराण और काव्य सहित। नवदुर्गा की सूची देवी कवच से है, जो दुर्गा सप्तशती से पहले पढ़ा जाता है; पंक्तियाँ आर्ट ऑफ़ लिविंग के देवी कवच पृष्ठ पर पढ़ी गईं, और छपाई में थोड़ा अंतर मिलता है। शैलपुत्री का ध्यान श्लोक, वन्दे वाञ्छितलाभाय, प्रचलित भक्ति श्लोक है, ब्रहत डॉट इन पर पढ़ा गया। हिमवान और मेना के घर पार्वती का जन्म भागवत, चौथा स्कंध, सातवाँ अध्याय, और शिव पुराण, पार्वती खंड से है; नारद की भविष्यवाणी शिव पुराण की कथा से। बचपन के चित्र कालिदास के कुमारसंभव, पहले सर्ग से, काव्य के रूप में, भाव में दिए हैं। मूलाधार से संबंध और भोग की प्रथा बाद की और जीवित परंपरा है, और भिन्न है। श्लोकों की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    10 min
  • सती की अग्नि

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    धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 68

    शिव ने उन्हें रोका नहीं था। बस इतना कहा था, मत जाओ। वहाँ तुम्हारा अपमान होगा, और वह अपमान तुम सह नहीं पाओगी। और सती चली गईं। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। अड़सठवाँ एपिसोड, पहला दिन। सड़सठवें एपिसोड में हमने कलश रखा, अखंड ज्योति जलाई। आज रात पहली बड़ी कथा। वह कथा जो बाकी सब से पहले आती है। आज हम शैलपुत्री को पूजते हैं, पर्वत की बेटी को। पर पर्वत की बेटी बनने से पहले, माँ को दक्ष की बेटी के रूप में देह छोड़नी पड़ी थी।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 67।

    स्रोत। श्रेणी: पुराण, कथा-रूप सहित। कथा का क्रम श्रीमद्भागवत, चौथा स्कंध, अध्याय दो से सात के अनुसार है: पहले यज्ञ में दक्ष का शाप, शिव की चेतावनी, सती की यात्रा, उनका वचन, योगाग्नि, वीरभद्र, बकरे के सिर के साथ दक्ष का पुनर्जीवन, और हिमवान व मेना के घर सती का पुनर्जन्म। शिव पुराण, रुद्र संहिता, सती खंड में यही कथा अधिक विस्तार से, कई अंतरों के साथ है। सती के वचन भाव रूप में दिए हैं, कहीं-कहीं मेरे शब्दों में। सती की देह लेकर शिव का घूमना और शक्तिपीठ बाद के ग्रंथों, जैसे देवी भागवत और कालिका पुराण, और मंदिर परंपरा से हैं; सूचियाँ भिन्न हैं। इस एपिसोड में कोई संस्कृत श्लोक उद्धृत नहीं है।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    18 min
  • नौ रातें आरंभ: कलश और दीप

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    धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 67

    माँ आ गई हैं। कल रात पितर विदा हुए। और आज सुबह, घर-घर में, किसी कोने को झाड़ा गया, धोया गया, और वहाँ एक छोटी सी जगह बनाई गई। माँ के लिए। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। सड़सठवाँ एपिसोड, पहला दिन। पहले सीज़न के छियासठवें एपिसोड में, पितृ पक्ष के अंत में, हमने कहा था कि पितर जाएँगे और माँ आएँगी। आज वह दिन है। पहले सीज़न के सारे एपिसोड इसी फ़ीड में हैं, जब मन हो, कहीं से भी सुन लीजिए।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 66।

    स्रोत। श्रेणी: परंपरा। घटस्थापना, जौ बोना, आम के पत्तों और नारियल वाला कलश, और अखंड ज्योति जीवित घरेलू परंपरा हैं, प्रकाशित विवरणों से; प्रदेश और कुल के अनुसार भिन्न हैं। कलश में विष्णु, रुद्र, ब्रह्मा और मातृगण वाला भाव प्रचलित कलश श्लोक से है, यहाँ केवल भाव दिया है, श्लोक नहीं। ग्यारह अक्टूबर दो हज़ार छब्बीस की तिथि, और दिल्ली के लिए मुहूर्त, सुबह लगभग छह उन्नीस से दस ग्यारह, और अभिजित लगभग ग्यारह चवालीस से बारह तीस, प्रकाशित पंचांगों से हैं, और शहर के अनुसार बदलते हैं। इस एपिसोड में कोई संस्कृत श्लोक उद्धृत नहीं है।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    9 min
  • कल से नवरात्रि: सीज़न 2

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    धर्म कथा · पहला सीज़न: पितृ पक्ष · एपिसोड 66

    आज रात चाँद नहीं है। कल शाम, सूर्यास्त के बाद पश्चिम की ओर देखिएगा। शायद नई रोशनी की सबसे पतली रेखा दिख जाए। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। पहला सीज़न, पितृ पक्ष। छियासठवाँ एपिसोड, ग्यारहवाँ दिन। इस सीज़न का अंतिम एपिसोड। अट्ठावनवें एपिसोड में हमने सुना कि बंगाल में महालया की भोर एक रेडियो की आवाज़ कैसे माँ को बुलाती है। अब, पितरों को विदा देने से पहले, आगे की एक छोटी झलक।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 58।

    स्रोत। श्रेणी: पुनःकथन और झलक। महालया के अगले दिन शारदीय नवरात्रि का आरंभ, जो प्रकाशित पंचांगों के अनुसार इस वर्ष ग्यारह अक्टूबर को है, और बताई गई क्षेत्रीय प्रथाएँ प्रकाशित विवरणों और जीवित परंपरा से हैं। देवी माहात्म्य के बाद के अध्याय, शुंभ, निशुंभ, रक्तबीज, काली और चामुंडा, रूपरेखा में बताए गए हैं। राम की अकाल पूजा की कथा बंगाल की कृत्तिवासी रामायण की परंपरा से है, वाल्मीकि रामायण से नहीं। दूसरे सीज़न की योजना अभी अंतिम नहीं है। इस एपिसोड में कोई श्लोक उद्धृत नहीं है।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    5 min

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