दिल की बातें

दिल की बातें

By Harsha ThakkerEducationSelf-Improvement
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दिल की बातें episodes

  • परिस्थिति हमारे हाथ में नहीं.
    परिस्थिति हमारे हाथ में नहीं.(Voice over - Harsha Thakker) मनुष्य को अपना सुखी जीवन जीने के लिए सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। जीवन में 'रात व दिन' की तरह आशा व निराशा के क्षण आते जाते रहते हैं। आशा जहां जीवन में संजीवनी शक्ति का संचार करती है वहीं निराशा मनुष्य को पतन की तरफ ले जाती है। निराश मानव जीवन में उदासीन और विरक्त होने लगता है। उसे अपने चारों तरफ अंधकार नजर आता है। निराशा का संबंध एकतरफा सोच भी है। साथ ही मनुष्य के दृष्टिकोण पर भी आधारित है, मनुष्य जिस तरह की भावनाएं रखता है वैसी ही प्रेरणाएं मिलती हैं। जो लोग स्वयं के लाभ के लिए जीवन भर व्यस्त रहते हैं उन्हें जीवन में निराशा, अवसाद, असंतोष ही परिणाम में मिलता है। यह एक बड़ा सत्य है कि जो लोग जीवन में परमार्थ सेवा एवं जनकल्याण का कार्य करते हैं उनमें आशा उत्साह होता है, जिसके आधार पर वह कठिन से कठिन कार्यो में सफलता प्राप्त करता है। मनुष्य दूसरे की सेवा करके निराशा से बचता रहता है। परोपकार करने वाले लोगों पर कभी भी निराशा अपना दबाव नहीं बना पाती। निराशा तो एक ऐसी व्यथा है जो स्वयं को तो परेशान रखती है साथ दूसरों का भी कल्याण नहीं कर पाती। जहां आशा है उत्साह है वहीं सफलता है। मनुष्य विजयश्री तो पाता है, किंतु जीवन में आशा उत्साह से कार्य पूरे होते हैं।और ऐसी ही अनेक बातें.. जानने के लिए सुनते रहिए.. टाटा Bby  take care.. Save trees🌲🌳🌴
    2 min
  • Right thinking - सही विचारधारा
    Right thinking - सही विचारधारा( Voice over - Harsha Thakker)
    जब एक इंसान बच्चे के रूप में दुनिया में आता है तो स्थान, दिन, समय, वंश उसके हाथ में नहीं होते हैं। ये सभी ईश्वर के द्वारा ही निर्धारित होते हैं। इनपर उसका कोई अधिकार नही होता है। इसी तरह जब वह दुनिया में आगे बढता है तो उसका ’प्रारब्ध’ अथवा भाग्य अथवा पिछले जन्म के कर्म उसके साथ चलते हैं। इस पर भी उसका कोई वंश नहीं होता है।
    परन्तु जब वह बच्चा इस दुनिया में अपनी पारी प्रारम्भ करता है तो दो योग उसके हाथ मेंं होते हैं जो उसके भाग्य विधाता होते हैं तथा जो उसकी जिन्दगी को उपरोक्त पांच योगों के प्रभाव अथवा चक्र से बाहर कर देते हैं उनमें प्रथम योग प्रार्थना है जो गुरू अथवा ईश्वर के प्रति आस्था, उसकी प्रार्थना एवं उसमें समर्पण का भाव होता है जो किसी भी व्यक्ति के भाग्य को नई दिशा दे सकते हैं। इसी श्रेणी में दूसरा योग पौरूष अथवा पराक्रम का होता है। अगर किसी व्यक्ति का पौरूष अथवा पराक्रम सकारात्मक है तो उसका भाग्य चमकता जायेगा परन्तु अगर पौरूष अथवा पराक्रम नकारात्मक है तो उसका भाग्य पतन की ओर जायेगा।
    और ऐसी ही अनेक बातें.. जानने के लिए सुनते रहिए.. टाटा Bby  take care.. Save trees🌲🌳🌴
    3 min
  • स्वयं परआत्मविश्वास
    स्वयं पर आत्मविश्वास (Voice Over - Harsha Thakker) संस्कूत में कहा गया है कि मत ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण है ‘मन एंव मनुष्याणां कारण बंधा न मोक्ष्यों।’ मन की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। मन ही व्यक्ति को सांसारिक बंधनों से बांधता है, मन ही उसे अन बंधनों से छुटकारा दिलाता है। मन ही मन उसे अनेक प्रकार की बुराईयों की ओर प्रवृत्त करता है, तो मन ही उसे अज्ञान से ज्ञान की ओर अंधकार से प्रकार की ओर ले जाता है। भाव यह है कि मन चाहे तो क्या नहीं कर सकता। इसलिए एक विचारक ने कहा है-
    ‘जिसने मन को जीत लिया
    बस उसने जीत लिया संसार’
    . और ऐसी ही अनेक बातें.. जानने के लिए सुनते रहिए.. टाटा Bby  take care.. Save trees🌲🌳🌴
    2 min
  • रुकिए नहीं, चलते रहिए
    रुकिए नहीं, चलते रहिए (Voice over- Harsha Thakker) . 'दुख-सुख सब कहँ परत है, पौरूष तजहू न मीत। मन के हारे हार है मन के जीते जीत।। ... अर्थात दुख और सुख तो सभी पर पड़ते हैं इसलिए अपना पौरूष मत छोड़ों क्योंकि हार-जीत तो केवल मन के मानने अथवा न मानने पर ही निर्भर होती है।और ऐसी ही अनेक बातें.. जानने के लिए सुनते रहिए.. टाटा Bby  take care.. Save trees🌲🌳🌴
    2 min
  • Samay Ek Sikka
    Samay Ek Sikka (Voice over- Harsha Thakker) हम सभी समय के मूल्य को जानते हैं लेकिन कई बार इसकी गति को पकड़ने में असफल रहते हैं जिससे अंत में हमें अपनी विफलता पर पछतावा होता है। हर किसी के लिए समय महत्वपूर्ण है चाहे वह छात्र हो, पेशेवर हो, राजनीतिज्ञ हो या कोई गृहिणी हो। कोई भी समय का मूल्य की अनदेखी नहीं कर सकता क्योंकि अगर समय बदलने लगा तो कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। और ऐसी ही अनेक बातें.. जानने के लिए सुनते रहिए.. टाटा Bby  take care.. Save trees🌲🌳🌴
    2 min
  • मन की जीत
    मन की जीत- मन की संकल्प–शक्ति के द्वारा व्यक्तियों ने अपनी हार को विजयश्री में परिवर्तित कर दिया। महाभारत के युद्ध में पाण्डवों की जीत का कारण यही था कि श्रीकृष्ण ने उनके मनोबल को दृढ़ कर दिया था। नचिकेता ने न केवल मृत्यु को पराजित किया, अपितु यमराज से अपनी इच्छानुसार वरदान भी प्राप्त किए। सावित्री के मन ने यमराज के सामने भी हार नहीं मानी और अन्त में अपने पति को मृत्यु के मुख से निकाल लाने में सफलता प्राप्त की।
    अल्प साधनोंवाले महाराणा प्रताप ने अपने मन में दृढ़–संकल्प करके मुगल सम्राट अकबर से युद्ध किया। शिवाजी ने बहुत थोड़ी सेना लेकर ही औरंगजेब के दाँत खट्टे कर दिए। द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका द्वारा किए गए अणुबम के विस्फोट ने जापान को पूरी तरह बरबाद कर दिया था, किन्तु अपने मनोबल की दृढ़ता के कारण आज वही जापान विश्व के गिने–चुने शक्तिसम्पन्न देशों में से एक है। दुबले–पतले गांधीजी ने अपने दृढ़ संकल्प से ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को हिला दिया था।
    2 min

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