**
प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के द्वितीय राष्ट्पति के जयंती दिवस को हम शिक्षक दिवस के रुप मे मनाते है।
शिक्षक ही है जो हमे अंधकार से प्रकाश की तरफ ले जाता है यह ही आदमी को आदमी बनाता है, इस लिए ये समाज मे सदैव सम्मान व स्नेह के अधिकारी है।
सुन्दर सुर सजाने को साज बनाता हूँ।
नौसिखिए परिंदो को बाज बनाता हूँ।।
चुपचाप सुनता हूँ सिकायते सबकी।
तब दुनिया बदलने की आवाज बनाता हूँ।।
समंदर तो परखता है, हौसले कश्तियो के।
मै तो डुबती कश्तियो को जहाज बनाता हूँ।।
बनाए चाहे चाँद पर कोई बुर्ज ए खालिफा।
अरे मै तो कच्ची ईटो से ही ताज बनाता हूँ।।
विशेष नमन🙏